Purnima Kab hai: कल है वैशाख पूर्णिमा, मई में इस साल 2 पूर्णिमा, कल दिखेगा तुला राशि में माइक्रो मून, 31 मई को ब्लड मून
खगोल प्रेमियों के लिए इस पूर्णिमा पर 1 मई की रात बेहद खास रहने वाली है। इस दिन तुला राशि में ‘माइक्रो मून’ नजर आएगा, जहां चांद, सुपरमून की अपेक्षा करीब 12 से 14 प्रतिशत छोटा होगा। वहीं, करीब माइनस 12.5 मैग्नीट्यूड की चमक लिए चंद्रमा, पृथ्वी से करीब 4 लाख किलोमीटर दूर रहेगा।

खगोल प्रेमियों के लिए इस पूर्णिमा पर 1 मई की रात बेहद खास रहने वाली है। इस दिन तुला राशि में ‘माइक्रो मून’ नजर आएगा, जहां चांद, सुपरमून की अपेक्षा करीब 12 से 14 प्रतिशत छोटा होगा। वहीं, करीब माइनस 12.5 मैग्नीट्यूड की चमक लिए चंद्रमा, पृथ्वी से करीब 4 लाख किलोमीटर दूर रहेगा। खगोलविदों के अनुसार, शाम लगभग 6:30 बजे पूर्व दिशा में 20 डिग्री दक्षिण की ओर चंद्रमा का उदय शुरू हो जाएगा, जबकि इसका चरम बिंदु रात 10:53 बजे होगा। यह सुपरमून की तुलना में 30 प्रतिशत कम चमकदार नजर आएगा।
कब है वैशाख पूर्णिमा
बैसाख पूर्णिमा को व्रत रखकर प्रदोषकाल में भगवान श्री सत्यनारायण की कथा सुनने तथा ब्राह्मण भोजन व दान करने से मनोकामना पूर्ण होती है। पूर्णिमा तिथि 30 अप्रैल रात 9 बजकर 12 मिनट से प्रारम्भ होकर एक मई को देर रात 10 बजकर 52 मिनट तक रहेगा। अतः एक मई को सूर्योदय से लेकर देर रात तक व्रत के साथ-साथ स्नान व दान किया जाएगा। भविष्य पुराण में कथन है कि बैसाख पूर्णिमा के दिन गंगा या अन्य नदी में स्नान के बाद योग्य ब्राह्मण को दान अवश्य करना चाहिए।
वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला के खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पूर्णिमा तिथि 30 अप्रैल रात 9:12 बजे से शुरू होकर 1 मई रात 10:52 बजे तक रहेगी। हालांकि, चंद्रमा एक दिन पहले और बाद में भी लगभग पूर्ण दिखाई दे सकता है। उनका कहना है कि यह घटना तब होती है जब पूर्णिमा के समय चंद्रमा पृथ्वी से सबसे अधिक दूर यानी अपोजी के पास होता है। उन्होंने बताया कि मई महीने की पूर्णिमा को परंपरागत रूप से ‘फ्लॉवर मून’ कहा जाता है, क्योंकि इस समय प्रकृति में फूलों की भरमार होती है। उनके अनुसार, चंद्रमा के पृथ्वी से अधिक दूर होने के कारण इसका आकार छोटा दिखता है, इसलिए इसे ‘माइक्रो मून’ कहा जाता है। यह वैशाख पूर्णिमा या बुद्ध पूर्णिमा से प्रचलित है।
वर्ष में कभी-कभी 13 पूर्णिमा
अमर पाल सिंह ने बताया कि ज्यादातर वर्षों में 12 पूर्णिमा होती हैं। हालांकि, कैलेंडर खगोलीय घटनाओं के साथ पूरी तरह से मेल नहीं खाता है। इसलिए, कभी-कभी किसी वर्ष में 13 पूर्णिमा भी होती हैं। जब ऐसा होता है, तो उन 13 पूर्णिमा में से कम से कम एक को ‘ब्लू मून’ कहा जाता है। मई 2026 में दो पूर्णिमा पड़ रही हैं पहली पूर्णिमा 1 मई और दूसरी 31 मई को। यहां दूसरी पूर्णिमा के चांद को ‘ब्लू मून’ कहा जाएगा। यह घटना औसतन हर ढाई साल में एक बार होती है, इसलिए इसे विशेष माना जाता है। उन्होंने बताया कि ‘वन्स इन अ ब्लू मून’ मुहावरे का अर्थ भी किसी ऐसी घटना से है जो बहुत ही दुर्लभ रूप से घटित होती है। दिलचस्प बात यह है कि ब्लू मून उतना दुर्लभ नहीं है जितना कि प्रचलित कहावत से लगता है।
माइक्रो मून (बड़ा सुपरमून व छोटा माइक्रो मून)
ये हैं अलग-अलग 12 पूर्णिमा
माह पूर्णिमा का चांद
जनवरी वुल्फ मून
फरवरी स्नो मून
मार्च वर्म मून
अप्रैल पिंक मून,
मई फ्लावर मून/माइक्रो मून
जून स्ट्रॉबेरी मून
जुलाई बक मून
अगस्त स्टर्जन मून
सितंबर कॉर्न मून
अक्तूबर हंटर मून
नवंबर बीवर मून
दिसंबर कोल्ड मून
(इसके अलावा, 13 पूर्णिमा वाले वर्ष में एक ब्लू मून दिखाई देता है, जो आगामी 31 मई को नजर आएगा।)
लेखक के बारे में
Anuradha Pandeyशार्ट बायो
अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।
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