
गुरु धनेश होकर नवम भाव में हो या फिर मकर राशि पर गुरु हों तो पु्खराज देता है लाभ
पु्खराज गुरु का रत्न माना जाता है। इसलिए गुरु से जुड़े ग्रहों और राशियों के प्रभावित राशियों को पुखराज धारण करना चाहिए। मकर राशि पर गुरु हो तो शीघ्र पुखराज धारण करना चाहिए। इससे इसे धारण करने वालों को लाभ होता है। अपनी कुंडली के अनुसार आपको इसे पहनना चाहिए।
पु्खराज गुरु का रत्न माना जाता है। इसलिए गुरु से जुड़े ग्रहों और राशियों के प्रभावित राशियों को पुखराज धारण करना चाहिए। मकर राशि पर गुरु हो तो शीघ्र पुखराज धारण करना चाहिए। इससे इसे धारण करने वालों को लाभ होता है। अपनी कुंडली के अनुसार आपको इसे पहनना चाहिए। किसी योग्य ज्योतिष को कुंडली दिखाएं, अगर आपकी कुंडली में गुरु की स्थिति का पता है, तो इस तरह पुखराज धारण करने से आपको लाभ होगा। गुरु प्रधान हो, तो उन्हें पुखराज जरूर धारण करना चाहिए। इसलिए राशियों की बात करें तो धनु और मीन लग्न वाले लोगों को पुखराज जरूर धारण करना चाहिए। इसके अलावा अगर जन्मकुंडली में गुरु पांचवें, छठे, आठवें या 12वें भाव में रह रहा हो तो पुखराज पहिनना चाहिए। गुरु जब भी मेष, वृष, सिंह, वृश्चिक, तुला, कुंभ और मकर राशियों पर विराजमान हो, तो आपको पुखराज धारण करना श्रेष्ठ रहता है। इसके अलावा अगर किसी लड़की का विवाह ना हो रहा हो तो आपको पुखराज धारण करना चाहिए। इसे धारण करने विवाह जल्द होता है। ऐसा भी कहा जाता है कि पुखराज पहनने वाले के पाप कम होते हैं और उसमें आध्यात्म विचार बढ़ जाता है।

पुखराज कब और किसमें बनवाएं
गुरुवार को पुष्प नक्षत्र हो, उस दिन प्रातः सूर्योदय के समय पुखराज को बनवा लें। इससे पहनने के लिए ग्यारह बजे से पहले का समय रखें। इस बात का भी ध्यान रखें कि पुखराज हमेशा सोने में ही बनवाना चाहिए। सोने की अंगूठी में जो पुखराज लगभग सात रत्ती या इससे भारी हो पहनना चाहिए।आपको बता दें कि चार रत्ती से हल्का पुखराज नहीं पहनना चाहिए।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।





