तीर्थ यात्रा पर जाना क्यों जरूरी है? प्रेमानंद महाराज से जानें

Dec 21, 2025 11:17 am ISTNavaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
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प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि परमात्मा सर्वत्र हैं, लेकिन उन्हें अनुभव करने के लिए हृदय की पवित्रता जरूरी है। तीर्थ स्थल हमें वह पवित्रता प्रदान करते हैं। आइए जानें तीर्थ यात्रा का महत्व।

तीर्थ यात्रा पर जाना क्यों जरूरी है? प्रेमानंद महाराज से जानें

वृंदावन के प्रसिद्ध संत श्री हित प्रेमानंद जी महाराज अपने सत्संगों में बार-बार तीर्थ यात्रा के महत्व पर जोर देते हैं। महाराज जी कहते हैं कि परमात्मा सर्वत्र हैं, लेकिन उन्हें अनुभव करने के लिए हृदय की पवित्रता जरूरी है। तीर्थ स्थल हमें वह पवित्रता प्रदान करते हैं। जैसे दूध में घी छिपा होता है, लेकिन घी निकालने के लिए दही बनाना, मंथन करना और गर्म करना पड़ता है, वैसे ही भगवान को पाने के लिए साधना और पवित्रता चाहिए। तीर्थ यात्रा हमें वह पवित्रता देती है। महाराज जी के अनुसार, तीर्थ यात्रा पर जाना हर व्यक्ति के लिए जरूरी है। आइए उनके उपदेशों से समझते हैं इसका महत्व।

तीर्थ यात्रा से मिलती है हृदय की पवित्रता

महाराज जी कहते हैं कि 'परमात्मा सर्वत्र हैं, लेकिन उन्हें पाने की प्रक्रिया है साधना। साधना के लिए पवित्रता चाहिए।' तीर्थ स्थलों जैसे हरिद्वार, काशी, वृंदावन, गंगा-यमुना तट पर जाने से मन और हृदय शुद्ध होता है। वहां का वातावरण, मंत्रों का कंपन और दिव्य ऊर्जा हमारे अंदर के पाप और नकारात्मकता को नष्ट करती है। महाराज जी उदाहरण देते हैं कि 'गंगा स्नान करने से पवित्रता का एहसास तभी होता है जब नियमानुसार स्नान करें।' तीर्थ पर जाने से अच्छे भाव जागृत होते हैं और वे भाव भगवान को समर्पित होकर दिव्य अनुभूति देते हैं।

पाप नाश और नई साधना की प्राप्ति

महाराज जी के अनुसार तीर्थ स्थल इसलिए बनाए गए हैं कि हमारी गलतियां और पाप नष्ट हो जाएं। 'अगर हमसे कुछ गलती हो जाती है, तो तीर्थ जाने से पाप खत्म हो जाते हैं।' तीर्थ यात्रा गृहस्थ जीवन के लिए नई साधना प्रदान करती है। वहां उपवास, स्नान और पूजा से मन-तन दोनों शुद्ध होते हैं। महाराज जी सलाह देते हैं 'तीर्थ पर कम से कम एक दिन पूर्ण उपवास करें। तीन दिन की यात्रा हो तो पहला दिन उपवास, दूसरा दिन फलाहार और तीसरे दिन अन्न ग्रहण करें।' तीर्थ पर कष्ट सहना भी पुण्य देता है, क्योंकि यह अहंकार को तोड़ता है।

तीर्थ पर प्राण त्यागना भी उत्तम गति

महाराज जी कहते हैं कि तीर्थ स्थलों पर कभी अनहोनी हो जाए तो नेगेटिव ना सोचें। 'शरीर तो छूटना ही है, लेकिन अगर हरिद्वार, काशी या वृंदावन में प्राण निकलें तो उत्तम गति होती है।' अनंत जन्मों से भटका जीव तीर्थ पर प्राण त्यागकर भगवान प्राप्ति कर लेता है। यह बड़ा लाभ है। इसलिए तीर्थ यात्रा पर जाना जीवन की सबसे बड़ी साधना है।

तीर्थ यात्रा का सही तरीका और लाभ

महाराज जी कहते हैं कि तीर्थ यात्रा नियमानुसार करें तो दिव्य अनुभूति होती है। वहां पूजा, स्नान, उपवास और भक्ति करें। तीर्थ हमें अध्यात्म का सहयोग देते हैं। इन स्थलों पर जाने से मन शुद्ध होता है, अच्छे भाव जागते हैं और भगवान का अनुभव होता है। हर व्यक्ति को जीवन में कम से कम एक बार प्रमुख तीर्थों – काशी, वृंदावन, हरिद्वार – की यात्रा जरूर करनी चाहिए। इससे जीवन में नई ऊर्जा और भक्ति बढ़ती है।

प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि तीर्थ यात्रा पर जाएं, पवित्रता प्राप्त करें और भगवान का अनुभव करें। यह यात्रा ना केवल शरीर और मन को शुद्ध करती है, बल्कि मोक्ष का मार्ग भी प्रशस्त करती है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Navaneet Rathaur

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नवनीत राठौर नए युग के डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में करीब 7 साल का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन के हिस्सा हैं। यहां वह अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष से जुड़ी खबरें लिखते हैं।


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डिजिटल मीडिया में अपनी अलग पहचान बना रहे नवनीत राठौर धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा में पाठकों के लिए परोसते हैं। वो अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और करीब 5 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान नवनीत ने वेबस्टोरी, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।


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नवनीत ने शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा से जनसंचार एवं पत्रकारिता में स्नातक और शुभारती विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।


नवनीत राठौर ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत जनतंत्र न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने सूर्या समाचार और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद नवनीत लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। पाठकों को सरल, विश्वसनीय और प्रेरणादायक जानकारी प्रदान करना ही नवनीत राठौर का मुख्य उद्देश्य है।


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