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Premanand Maharaj Pravachan: लंबे समय से नाम जप करने के बाद भी नहीं मिल रहा फायदा? प्रेमानंद महाराज ने कही ये बात

Premanand Maharaj Pravachan: लंबे समय से नाम जप करने के बाद भी नहीं मिल रहा फायदा? प्रेमानंद महाराज ने कही ये बात

संक्षेप:

Premanand Maharaj Latest: वृंदावन के जाने-माने संत प्रेमानंद महाराज ने एक बार फिर से नाम जप से जुड़ा एक कन्फ्यूजन दूर किया है। एक महिला श्रद्धालु के पूछने पर उन्होंने बताया कि लंबे समय से नाम जप करने के बाद भी भगवान क्यों नहीं मिलते हैं?

Dec 19, 2025 01:58 pm ISTGarima Singh लाइव हिन्दुस्तान
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Premanand Maharaj Pravachan: अपने इष्ट देवता के नाम को बार-बार याद करने को ही नाम जप कहा जाता है। आजकल लोग मेडिटेशन के तौर नाम जप करना प्रिफर करते हैं। वहीं वृंदावन के जाने-माने संत प्रेमानंद महाराज हमेशा लोगों को नाम जप करने के लिए प्रेरित करते हैं। माना यही जाता है कि इससे मन शांत रहता है और धीरे-धीरे एक दिन भगवत की प्राप्ति भी हो जाती है। हालांकि इसे लेकर कई नियम हैं और लोग कुछ चीजों को लेकर कन्फ्यूज भी होते हैं। हाल ही में एक महिला श्रद्धालु ने प्रेमानंद महाराज से एकांतित वार्तालाप के दौरान पूछा कि लंबे समय से नाम जप करने के बाद भी भगवत की प्राप्ति नहीं हो रही है तो क्या किया जाए। इस सवाल का के जवाब में प्रेमानंद महाराज ने ऐसी बात कही जिससे हर कोई रिलेट कर पाएगा।

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परमात्मा एक है

प्रेमानंद महाराज ने कहा कि जन्म जन्म लग जाते हैं। अभी पहले विकारों को नष्ट करने की सोचो। कोई विकार ना रहें। हमारा काम कि केवल 24 घंटे में निरंतर भगवत स्वरुप का स्मरण...उन्हीं को श्रीकृष्ण कहते हैं, उन्हीं को वाहेगुरु कहते हैं, उन्हीं को परमात्मा कहते हैं। उन्हीं को ब्रह्म कहते हैं। अलग-अलग भावों से उच्चारण होता है। ज्ञानीजन ब्रह्म कहते हैं। योगीजन परमात्मा कहते हैं। भक्तजन भगवान कहते हैं। जो गुरु साहब के महाकरुणा में पल रहे हैं वो लोग वाहेगुरु वाहेगुरु कहते हैं। वाहेगुरु उसी परमात्मा को कहते हैं। कोई दूसरा थोड़ी है। एक ही परमात्मा है। वही अकाल पुरुष है। वही परम पुरुष है। तो जब हम ये नियम ले लें कि हमारा एक ही काम है कि चिंतन नहीं छूटना चाहिए।

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ऐसे होती है भगवान की प्राप्ति

प्रेमानंद महाराज ने आगे कहा कि अब आप इस कसौटी पर खुद को कसें। जब इतनी व्याकुलता हो जाए वाहेगुरु की प्राप्ति की कि जैसे प्यासे हम हो और हमें कोई रबड़ी पिलाएं तो हमें लगेगा कि पानी पिलाओ रबड़ी नहीं। जैसे हमें सांस चाहिए जल में डुबो देने पर। ऐसे ही हमें परमात्मा चाहिए। जब ऐसी व्याकुलता हो जाएगी तो हमें परमात्मा मिल जाएंगे। जब हमारी इतनी व्याकुलता होगी कि अब परमात्मा के बिना अब जीया नहीं जा रहा है तो वो तुम्हारे अंदर ही बैठे हैं। वो तुम्हारी व्याकुलता को देख रहे हैं और वो निश्चित तुम्हें प्राप्त हो जाएंगे। तुम्हें कुछ भी कहना नहीं पड़ेगा। अभी अपनी कमी को ठीक करो। अपनी चाहतों को मिटाओ। जब सब चाहतें मिट जाती हैं और एक चाहत रह जाती है परमात्मा की तो उस चाहत में हम परम व्याकुल हो जाते हैं। तब जाकर भगवान का दर्शन होता है। तब भगवान की प्राप्ति होती है।

Garima Singh

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शॉर्ट बायो


गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, न्यूमरोलॉजी, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।


परिचय और अनुभव

गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। वह पिछले 8 महीनों से लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।


करियर

गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि

गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।


एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच

गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।


व्यक्तिगत रुचियां

काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।


विशेषज्ञता

वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, फेंगशुई, डेली और वीकली राशिफल

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