Hindi Newsधर्म न्यूज़premanand Maharaj talks about the signs of a successful life
Premanand Maharaj: कब समझा जाए कि जीवन सफल हो गया है? जानें क्या बोले प्रेमानंद महाराज

Premanand Maharaj: कब समझा जाए कि जीवन सफल हो गया है? जानें क्या बोले प्रेमानंद महाराज

संक्षेप:

वृंदावन के जाने माने संत प्रेमानंद महाराज ने अपने एकांतित वार्तालाप के दौरान बताया कि हम कब मानें कि जीवन सफल हो गया? उन्होंने कई ऐसी बातें कहीं जिससे कोई भी आसानी से कनेक्ट हो जाएगा।

Jan 09, 2026 05:15 pm ISTGarima Singh लाइव हिन्दुस्तान
share Share
Follow Us on

Premanand Maharaj Latest: एकांतित वार्तालाप के दौरान वृंदावन के महान संत प्रेमानंद महाराज लोगों के सवालों के जवाब देते हैं। इस दौरान वह कई ऐसी बातें कह देते हैं, जिससे कोई भी कनेक्ट कर सकता है। हाल ही में हुए एकांतित वार्तालाप में उनसे पूछा गया कि हम कब मान लें कि हमारा जीवन अब सफल हो गया है? इस पर प्रेमानंद महाराज ने आसानी से हर एक चीज समझाई। नीचे जानें उनका जवाब...

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

इस सवाल के जवाब में प्रेमानंद महाराज ने कहा कि जब एक सेकंड के लिए भी भगवत स्मरण ना छूटे। भगवत स्मरण जो हमारे अंदर बैठ गया है। एक सेकंड के लिए भी इसका स्मरण ना छूटे और विस्मरण का नाश हो जाए तब हम मानें। जब हम उठते-बैठते, चलते-फिरते, खाते-पीते हर समय भगवत स्मरण करने में तन्मय रहें। विस्मरण का कहीं भी किसी भी रूप से कोई गुंजाइश ना रह जाए। तब हम मानें कि हमारा जीवन सफल है। अब हमें कोई आवश्यकता नहीं है। जब भगवान में तन्मय वृत्ति है, तब हमारा जीवन सार्थक होता है। या फिर हमें आत्म स्वरूप का बोध हो जाए। स्थूल शरीर, सूक्ष्म शरीर और कारण शरीर...इन तीनों शरीर से हमारा संबंध खत्म हो जाए। एकमात्र आत्मस्वरुप में अपने स्वरूप हो जाए तो जीवन सफल हो जाए। दो स्थिति है। या तो भगवत स्मरण लगातार होता रहें। या फिर आत्मस्वरुप का ज्ञान हो जाए। ये दो ही ऐसी चीजें हैं जो परम लाभ देते हैं। अगर ये दो चीजें नहीं हैं तो कोई भी मान्यता नहीं है।

क्या है जीवन का लाभ?

प्रेमानंद महाराज ने आगे कहा कि देखो तुम कितना सोना चांदी पहन सकते हो। कितना सोना चांदी एकत्रित कर सकते हो। चार लाख योजन का एक पहाड़ है जिसका नाम सुमेरु है। एक योजन का मतलब चार कोष होता है। एक कोष में 3 किमी होते हैं। चार लाख योजन लंबा और चार लाख योजन चौड़ा सुमेरु पर्वत है। ऐसे बहुत से पर्वत है और रत्नों की खान भूमि है। रत्नों के खान समुद्र है। एक से एक रत्न हैं। ये सब व्यर्थ का जीवन है। ये मिल जाना जीवन का कोई लाभ नहीं है। जीवन का लाभ है भगवत का स्मरण प्राप्त हो जाना। भगवान का नाम स्मरण, नाम जप और आत्मस्वरुप का बोध होना, ये सब उपलब्धि है। इसके अलावा कोई भी उपलब्धि नहीं है।

ये भी पढ़ें:आत्मा या फिर शरीर? आखिर किसे मिलता है पाप और पुण्य का फल
ये भी पढ़ें:क्या करें कि मृत्यु के समय ना हो पछतावा? प्रेमानंद महाराज ने कही ये बात

कौन है हमारा साथी?

उन्होंने आगे कहा कि चाहे जितने बड़े पद पर हो। जब शरीर ही छूट जाएगा तो पद किस काम में आएगा? चाहे जितना बड़ा नाम हो आपका जब शरीर ही छूट जाएगा तो दूसरी योनि में जाओगे। तीसरी योनि का किया हुआ सब व्यर्थ हो गया। सिर्फ सार्थक है तुम्हारा भगवत का स्मरण करना। भगवत नाप जप और परोपकार, भगवान की अराधना, शास्त्रों का अध्ययन करना..यही सार्थक बात है। नहीं तो सब कुछ मित्था है। किसी भी समय हमारा शरीर छूट सकता है। जब शरीर छूट सकता है तो कौन हमारा साथी है? अकेला यहां से जाना है। इसलिए एक मात्र भगवत स्मरण ही सार्थक वस्तु है।

Garima Singh

लेखक के बारे में

Garima Singh
गरिमा सिंह हिंदुस्तान लाइव में ज्योतिष सेक्शन में काम करती हैं। उन्हें पत्रकारिता में 10 वर्षों का अनुभव है। इससे पहले वह एंटरटेनमेंट बीट पर भी काम कर चुकी हैं। उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से टेलीविजन और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। और पढ़ें
जानें धर्म न्यूज़ ,Choti Diwali Wishes , Rashifal, Panchang , Numerology से जुडी खबरें हिंदी में हिंदुस्तान पर| हिंदू कैलेंडर से जानें शुभ तिथियां और बनाएं हर दिन को खास!