जब सब पहले से ही तय है तो हम मेहनत क्यों करें? प्रेमानंद महाराज ने दिया इस सवाल का ये जवाब

Garima Singh लाइव हिन्दुस्तान
share

प्रेमानंद महाराज ने एकांतिक वार्तालाप के दौरान इस सवाल का जवाब दिया कि जब भगवान सब निर्धारित करता है तो हम मेहनत क्यों करें? जानिए प्रेमानंद महाराज ने इस पर क्या कहा?

जब सब पहले से ही तय है तो हम मेहनत क्यों करें? प्रेमानंद महाराज ने दिया इस सवाल का ये जवाब

प्रेमानंद महाराज आए दिन भक्तों के हर सवाल का बड़ी ही आसानी से जवाब देते हैं। हर एक सवाल पर उनका जवाब ऐसा होता है कि कोई भी उनसे कनेक्ट हो जाता है। वृंदावन के जाने-माने संतों मे से एक प्रेमानंद महाराज हर दिन एकांतिक वार्तालाप के जरिए लोगों से मिलते हैं। इस दौरान लोग अपने रोजमर्रा से जुड़ी दिक्कतों को भी प्रेमानंद महाराज से शेयर करते हैं। एक व्यक्ति ने जब उनसे पूछा कि जब हमारा भाग्य पहले से ही तय होता है भगवान ही सब निर्धारित करते हैं और कहा जाता है कि जो होता है वो होकर ही रहता है तो हम फिर मेहनत ही क्यों करें? इस पर प्रेमानंद महाराज ने बहुत ही सुंदर जवाब दिया। नीचे पढ़ें प्रेमानंद महाराज का ये जवाब-

प्रेमानंद महाराज ने दिया शिव-सती का उदारहरण

प्रेमानंद महाराज ने इस सवाल का जवाब देते हुए कहा है कि क्यों प्रयास क्यों नहीं करना है? होइहि सोइ जो राम रचि राखा। ये प्रयास के बाद आता है। जब भगवान शंकर ने पूरा प्रयास कर लिया सती जी को समझाने का कि ये परमब्रह्म परमात्मा हैं ये राजकुमार नहीं हैं। सती जी के मन में संशय रहा कि अगर परमब्रह्म परमात्मा हैं तो हे खग हे मृग हे मधुकर सैनी, तुम देखी सीता मृग नैनी। ऐसा पूछ क्यों रहे हैं और यदि ये राजकुमार हैं तो सच्चिदानंद भगवान शिव शंकर ने जय करके प्रणाम क्यों किया? बार-बार संशय हुआ।

जब थक हार गए शिवजी

प्रेमानंद महाराज ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा कि जब हर प्रकार से समझाकर देखा भगवान शंकर ने तो उनकी समझ में नहीं आया तब उन्होंने कहा कि जौं तुम्हरें मन अति संदेहू, तौ किन जाइ परीछा लेहू। अब होइहि सोइ जो राम रचि राखा, को करि तर्क बढ़ावै साख। बात को समझो कहीं की बात और कहीं का टांग जोड़ोंगे ते बात नहीं बनेगी। इस बात को समझिए।

क्या है भाग्य का विधान?

प्रेमानंद महाराज ने आगे कहा कि बहुत प्रयास करने के बाद मन में हम ये सोच सकते हैं कि होइहि सोइ जो राम रचि राखा। जो आपने कहा कि सुनहु भरत भावी प्रबल, बिलखि कहेउ मुनिनाथ, हानि लाभु जीवनु मरनु, जसु अपजसु बिधि हाथ। ये फल पर है क्रिया पर नहीं है। हम क्रिया कर रहे हैं। अब उसके फल में हानि ही हानि या फिर लाभ आना है ये भगवान का देन है। ये हमारे भाग्य का विधान होगा लेकिन क्रिया तो हमको करनी है।

प्रेमानंद महाराज ने कहा कि पहले हमें प्रयास करना है और इसके बाद है कि होइहि सोइ जो राम रचि राखा। क्रिया के बाद ही परिणाम पर हानि लाभ जीवन मरण है। क्रिया तो प्रधान है ही।

Garima Singh

लेखक के बारे में

Garima Singh

शॉर्ट बायो: गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।

परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।

करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।

एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।

व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।

विशेषज्ञता (Areas of Expertise)
वास्तु शास्त्र
अंक शास्त्र
रत्न शास्त्र
फेंगशुई
हस्तरेखा शास्त्र

और पढ़ें
जानें लेटेस्ट Dharm News, Aaj ka Rashifal और सटीक Panchang की जानकारी। अपनी डेली पूजा के लिए यहाँ पढ़ें Shiv Chalisa, Hanuman Chalisa और Bajrang Baanहिंदू कैलेंडर 2026 की शुभ तिथियों के साथ अपने हर दिन को खास बनाएं!