Premanand Maharaj: पानी और बिजली की बर्बादी से पुण्य नष्ट होता है? प्रेमानंद महाराज ने दिया ये जवाब
प्रेमानंद महाराज ने हाल ही में एकांतिक वार्तालाप के दौरान बताया है कि पानी और बिजली का दुरुपयोग करने से हमारे अच्छे कर्म खत्म हो जाते हैं।

Premanand Maharaj Latest: वृंदावन के जाने माने संत प्रेमानंद महाराज अक्सर रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े सवालों को बहुत ही आसान भाषा में समझाते हैं। लोगों को आध्यात्म की राह पर चलने की समझ देने वाले प्रेमानंद महाराज रोज एकांतिक वार्तालाप करते हैं। यहां पर वो लोगों के सवाल का जवाब आमने-सामने होकर देते हैं। कई लोगों के मन में यह सवाल आता है कि क्या पानी और बिजली की बर्बादी करना सही है या नहीं? तो वहीं आपने ने भी ये कहीं ना कहीं देख या सुन लिया ही होगा कि इन चीजों का व्यर्थ करना मतलब अपने ग्रहों को खराब करना या फिर अपने कर्मों को खराब करना है लेकिन इस बात में कितनी सच्चाई है? इसे लेकर कन्फ्यूजन बना रहता है।
आज के समय में हम कई बार बिना सोचे-समझे इन चीजों का ज्यादा इस्तेमाल कर लेते हैं। धीरे-धीरे ये हमारी आदत बन जाती है और हम ध्यान ही नहीं देते कि हम कितना बेवजह खर्च कर रहे हैं। एक शख्स ने जब प्रेमानंद महाराज ने पूछा कि क्या बिजली और पानी की बर्बादी से हमारा पुण्य नष्ट होका है? तो सवाल पर प्रेमानंद महाराज ने जो जवाब दिया है वो जानने लायक है।
प्रेमानंद महाराज ने दिया ये जवाब
प्रेमानंद महाराज ने कहा कि मान लो टोटी खुली है पानी की तो व्यर्थ में खुली मत रखो। वो किसी के काम आएगी। अगर व्यर्थ में आप पानी ले रहे हो तो टैक्स लग रहा है आपका भजन कट रहा है। आपके पुण्य नष्ट हो रहे हैं। व्यर्थ में लाइट मत जलाओ। अगर काम चल रहा है बिना लाइट के तो मत जलाओ। प्रकृति के वस्तु का जितना उपभोग करोगे। कोई भी हो। उतने ही तुम्हारे पुण्य नष्ट होंगे। तो प्रकृति का एक बूंद पानी भी फ्री नहीं है। इसका भी टैक्स है। एक बूंद पानी भी फ्री नहीं है इसलिए प्रकृति का उतना ही प्रयोग करो जितनी तुम्हें आवश्यकता हो नहीं तो तुम्हारे पुण्य नष्ट हो रहे हैं।
ऐसे नष्ट होंगे हमारे पाप
प्रेमानंद महाराज ने आगे कहा कि ये हमारा सरकारी कानून है। जितना प्रकृति का भोग करोगे उतना ही तुम्हारे पुण्य नष्ट होंगे। अब जब पाप आएगा तो वही प्रकृति दंड देने वाली बन जाती है। वहीं फिर हमें बहुत दुख देती है। तो भजन करने वालों को जहां अहक उपासना कि मैं भजन करता हूं वहां इन बातों से बचना चाहिए।
भगवान की शरण में जाना
महाराज ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि जो भगवान की शरण जाता है वो तो जोई-जोई प्यारौ करै सोई मोहि भावै। महलों में रखो चाहे झोपड़ी में वास दो। जैसी तुम्हारी मर्जी हो। हे नाथ मैं आपकी शरण में हूं। उनका भजन नहीं करता हूं। उनका भजन सीधा भगवान को प्राप्त कराता है।
लेखक के बारे में
Garima Singhशॉर्ट बायो:
गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।
परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।
करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।
एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।
व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।
विशेषज्ञता (Areas of Expertise)
वास्तु शास्त्र
अंक शास्त्र
रत्न शास्त्र
फेंगशुई
हस्तरेखा शास्त्र


