Premanand Maharaj on Navratri: ये 5 लोग ना रखें चैत्र नवरात्रि का व्रत, प्रेमानंद महाराज ने बताई वजह
Premanand Maharaj Latest: वृंदावन के जाने-माने संत प्रेमानंद महाराज ने हाल ही में चैत्र नवरात्रि को लेकर कई चीजें बताई हैं। उन्होंने बताया कि किन लोगों को चैत्र नवरात्रि का व्रत नहीं रखना चाहिए?

Premanand Maharaj on Navratri Vrat: चैत्र का महीना चल रहा है और आज प्रतिपदा तिथि है। हिंदू धर्म में इस तिथि का खास महत्व होता है। आज से ही चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो रही है। साथ ही आज हिंदू नव वर्ष भी है। इसे नव संवत्सर के नाम से भी जाना जाता है। इस तिथि पर गुड़ी पड़वा भी मनाई जाती है। साथ ही आज का दिन इसलिए भी खास है क्योंकि आज चैत्र अमावस्या का दूसरा दिन है। इस दिन स्नान-दान करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। बात की जाए चैत्र नवरात्रि कि तो कई लोग पूरे नौ दिन का व्रत रखते हैं। वहीं ज्यादातर लोग पहली और अष्टमी के दिन व्रत रखकर मां दुर्गा की उपासना करते हैं। नवरात्रि का व्रत कोई भी रख सकता है लेकिन प्रेमानंद महाराज के हिसाब से इस व्रत को 5 पुरुष और महिलाओं को नहीं रखना चाहिए। तो चलिए जानते हैं कि आखिर किन लोगों को नवरात्रि का व्रत नहीं रखना चाहिए?
इन लोगों को नहीं रखना चाहिए नवरात्रि का व्रत
1. ना करें व्रत का दिखावा
प्रेमानंद महाराज के हिसाब से दिखावे की भक्ति करने वालों को कभी भी नवरात्रि का व्रत नहीं रखना चाहिए। जो लोग पाखंडी और अंहकार से भरे हुए हैं उन्हें नवरात्रि के व्रत से दूर ही रहना चाहिए क्योंकि इससे उन्हें कोई लाभ नहीं मिलने वाला है। प्रेमानंद महाराज ने कहा कि माता रानी भाव की भूखी है भोजन और दिखावे की नहीं। अगर कोई महिला या पुरुष चैत्र नवरात्रि का व्रत इसलिए रख रहे हैं कि उनकी पड़ोसन ने रखा है या फिर लोग उन्हें बड़ी भक्त समझेंगे और उनका रुतबा बढ़ेगा और व्रत के नाम पर ये लोग सोशल मीडिया पर तस्वीरें डालेंगे। साथ ही कई लोग डाइटिंग और वजन कम करने के लिए व्रत का बहाना कर रही हैं तो इससे बडा जघन्य अपराध और क्रूर मजाक कुछ भी नहीं है। शास्त्रों में इसे महापाप कहा जाता है। मां दुर्गा करुणा की मूरत हैं वो सिर्फ उसी घर में जाकर वास करती है जिनके दिल में निश्चल भक्ति भाव और पूर्ण समर्पण हो। अगर मन में दुनियादारी का मैल है और अंहकार है तो 9 दिन व्रत रखने से बस शरीर में बदलाव दिखेगा लेकिन पुण्य के नाम पर कुछ नहीं होगा।
2. अपवित्र विचार वाले लोग
जो महिला और पुरुष चरित्रहीन, अपवित्र विचारों वाली और दूसरों का हमेशा बुरा करने वाले होते हैं तो उनके लिए शास्त्रों में लिखा है कि जो लोग चरित्रहीन हैं, उन लोगों को इस पवित्र व्रत को रखने और माता की ज्योति को छूने का अधिकार बिल्कुल भी नहीं है। साथ ही जो लोग दूसरों की चुगली करते हैं और दूसरों के घर टूटने पर खुश होती हैं और दूसरों की तरक्की देखकर अंदर ही अंदर ईष्या के भाव से जलते हैं को इनकी पूजा हमेशा व्यर्थ ही जाती है। जब मन और शरीर की पवित्रता और आत्मा अंदर से मर चुकी है तो ऐसे लोगों को पूजा कभी भी सफल नहीं होती है।
3. गालियां देने वाले लोग
जो लोग बात-बात पर गाली देते हैं और कड़वा बोलते हैं और लोगों को अपमान करते हैं तो ऐसे लोगों को भी व्रत नहीं रखना चाहिए। शास्त्रों में नारी को गृहलक्ष्मी कहा जाता है लेकिन जो महिला गंदी जुबान बोलती है और उसकी वजह से घर में कलेश होता है तो ऐसे लोगों को भी व्रत रखने का कोई अधिकार नहीं है। ऐसे लोगों के हाथ से चढ़ाई हुए कोई भी चीज माता रानी स्वीकार नहीं करती हैं।
4. पीरियड्ल में ना रखें व्रत
पीरियड्स के दौरान महिलाओं को चैत्र नवरात्रि का व्रत या फिर संकल्प बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। इसके अलावा कलश की स्थापना भी नहीं करनी चाहिए। इस दौरान शरीर और वस्त्र अशुद्ध होता है। ऐसे में शरीर की ऊर्जा पूरी तरह से अलग होती है। इसके अलावा प्रेमानंद महाराज के अनुसार अगर किसी महिला ने व्रत शुरु कर दिया है और अगर नवरात्रि के तीसरे-चौथे या फिर किसी भी दिन पीरियड्स शुरु हो जाएं तो ऐसे लोगों को व्रत नहीं तोड़ना चाहिए। ये लोग अपना व्रत जारी रख सकते हैं। बस पूजा का कोई भी सामान नहीं छूना है। दूर रहकर मानसिक पूजा करना सही होगा। वहीं जो महिलाएं हाल ही में मां बनी हैं और जिनके घर में सूतक काल लग चुका है, उन्हें भी व्रत नहीं रखना चाहिए। दरअसल ऐसे समय में शरीर और घर दोनों को अशुद्ध माना जाता है।
5. ऐसे लोग भी ना रखें व्रत
प्रेमानंद महाराज के अनुसार जो लोग बहुत बीमार हैं वो भी नवरात्रि का व्रत ना रखें। ऐसी स्थिति में शरीर साथ नहीं देता है और व्रत रखकर खुद को कमजोर करने की जरूरत नहीं है। अगर सच्चे मन से भी मां को याद किया जाए तो वो अपना आशीर्वाद जरूर देती हैं। इसके लिए खुद को इतना कष्ट देने की जरूरत नहीं है। वहीं गर्भवती महिलाएं भी चैत्र नवरात्रि पर व्रत ना रखें।
लेखक के बारे में
Garima Singhशॉर्ट बायो:
गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।
परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।
करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।
एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।
व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।
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