Premanand Maharaj Pravachan: भगवान हमारे सामने आ जाएं तो उन्हें कैसे पहचाना जाए? प्रेमानंद महाराज ने दिया ये जवाब

Apr 11, 2026 07:08 am ISTGarima Singh लाइव हिन्दुस्तान
share

प्रेमानंद महाराज ने हाल ही में अपने प्रवचन के दौरान एक ऐसे सवाल का जवाब दिया है जो हर किसी के मन में होगा। आखिर भगवान जब सामने आएं तो उन्हें कैसे पहचाना जाए? 

Premanand Maharaj Pravachan: भगवान हमारे सामने आ जाएं तो उन्हें कैसे पहचाना जाए? प्रेमानंद महाराज ने दिया ये जवाब

Premanand Maharaj Pravachan: वृंदावन के जाने-माने संत प्रेमानंद महाराज अपने प्रवचन से लोगों का मार्गदर्शन करते हैं। एकांतिक वार्तालाप के दौरान वह लोगों के जवाब देते हुए कुछ ना कुछ ऐसा कह देते हैं जिससे हर कोई रिलेट कर जाता है। अपने प्रवचन के दौरान वह लोगों को बताते हैं कि आखिर हमारी जिंदगी का उद्देश्य क्या है और इसे कैसे सही काम में लगाना है? जिंदगी से पहले और बाद की हर कहानी उन्होंने बहुत ही आसान भाषा में समझाया है। हाल ही में एक महिला ने प्रेमानंद महाराज से भगवान से जुड़ा हुआ ऐसा सवाल किया जो लगभग हर किसी के मन में होगा। आइए जानते हैं इस सवाल के बारे में और प्रेमानंद महाराज ने इसके जवाब में क्या कहा?

एकांतिक वार्तालाप का सवाल

अगर कभी भगवान हमारे सामने आ जाएं तो उन्हें किस तरह से पहचाना जाए?

प्रेमानंद महाराज का जवाब

प्रेमानंद महाराज ने इस सवाल का जवाब देते हुए कहा कि वो सामने तो हैं ही। जब तक वो पहनावना ना चाहें तो नहीं पहचान सकते हैं। वो तो हर समय हैं। कहहु सो कहां जहां प्रभु नाहीं। सब रूपों में हैं लेकिन पहचानने वाली दृष्टि वो दे दें। किसी सूझ वाली आंख ने पहचान की॥ है कण कण में झांकी भगवान की। वो सूझ। वो सूक्ष्म दृष्टि वो दिव्य दृष्टि वो ज्ञान दृष्टि वो प्रेम दृष्टि जब तक गुरुदेव के द्वारा नहीं मिलती है तब तक हम सर्वत्र विराजमान हैं। भगवान को हम नहीं पहचान सकते हैं। अगर भगवान ऐसा ना चाहें कि कोई उन्हें पहचान पाएं तो कोई भी पहचान नहीं सकता है। अगर पहचान वो देना चाहें तो वही देख सकता है।

पवित्र दृष्टि से दिखेगा सब कुछ

देखो गुरु के द्वारा दृष्टि मिली नामदेव जी को तो कुत्ते से भी विट्ठल भगवान को प्रकट कर लिया। कुत्ते में देखा विट्ठल भगवान। भूत में देखा विट्ठल भगवान। अब दृष्टि है और पवित्र हो गई तो सर्वत्र भगवान दिखते हैं। हमारी दृष्टि त्रिगुणमायामयी है तो स्त्री दिखाई देती है पुरुष दिखाई देता है। पापी दिखाई देता है और पुण्य आत्मा दिखाई देता है। महात्मा दिखाई देता है। दुरात्मता दिखाई देता है। ये त्रिगुणमायादृष्टि है।

हर जगह विराजमान हैं भगवान

पहले भजन के द्वारा हम ज्ञान दृष्टि प्राप्त करें। भगवत दृष्टि प्राप्त करें। तब सिया राम मय सब जग जानी। करहुँ प्रनाम जोरि जुग पानी। सब जगह भगवान विराजमान हैं। रोज भगवान आपके सामने आते हैं आपसे मिलते हैं लेकिन आप जान ही नहीं पाते हैं क्योंकि वो दृष्टि ही नहीं है। आपको लगता है कि ये कुत्ता है। आपको लगता है कि ये मनुष्य है। ये गाय है। ये अमुख है। मगर भगवान आकर मिलें ऐसा कहां? जब सबमें भगवान का दर्शन होगा तब भगवान की कृपा का अनुभव होगा।

नाम जप करने से पवित्र होगी दृष्टि

इसलिए खूब नाम जप करो। नाम जप से बढ़कर कोई साधना नहीं है। इससे सब कुछ प्राप्त हो जाएगा। जितना ज्यादा नाम जप किया जाए, उतनी ही दृष्टि पवित्र होती चली जाएगी और ऐसे ही धीरे-धीरे भगवान की पहचान हो जाएगी।

Garima Singh

लेखक के बारे में

Garima Singh

शॉर्ट बायो: गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।

परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।

करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।

एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।

व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।

विशेषज्ञता (Areas of Expertise)
वास्तु शास्त्र
अंक शास्त्र
रत्न शास्त्र
फेंगशुई
हस्तरेखा शास्त्र

और पढ़ें
जानें लेटेस्ट Dharm News, Aaj ka Rashifal और सटीक Panchang की जानकारी। अपनी डेली पूजा के लिए यहाँ पढ़ें Shiv Chalisa, Hanuman Chalisa और Bajrang Baanहिंदू कैलेंडर 2026 की शुभ तिथियों के साथ अपने हर दिन को खास बनाएं!