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Premanand Maharaj Pravachan: क्या करें कि मृत्यु के समय ना हो पछतावा? प्रेमानंद महाराज ने कही ये बात

Premanand Maharaj Pravachan: क्या करें कि मृत्यु के समय ना हो पछतावा? प्रेमानंद महाराज ने कही ये बात

संक्षेप:

प्रेमानंद महाराज ने हाल ही में एकांतित वार्तालाप के दौरान मृत्यु से जुड़े एक सवाल का जवाब दिया। सवाल था कि कि अपनी जिंदगी में ऐसा क्या किया जाए को मृत्यु के समय हमें कोई भी पछतावा ना हो। नीचे विस्तार से जानें उनका जवाब…

Jan 03, 2026 09:52 am ISTGarima Singh लाइव हिन्दुस्तान
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Premanand Maharaj Latest: वृंदावन के जाने-माने संत प्रेमानंद महाराज जीवन और मृत्यु को लेकर कई रोचक बातें बता चुके हैं। अपने एकांतित वार्तालाप में वह लोगों के कई ऐसे सवालों का जवाब दे चुके हैं, जिससे कोई भी आसानी से कनेक्ट हो जाएगा। हाल ही में हुई एकांतित वार्तालाप के दौरान उन्होंने फिर से मृत्यु से जुड़ी एक खूबसूरत बात कही। दरअसल एक श्रद्धालु ने सवाल पूछा कि ऐसा क्या किया जाए कि जब हमारी मृत्यु हो तो किसी भी चीज का पछतावा ना हो। देखा जाए तो ये सवाल कई लोगों के मन में जरूर आया होगा। तो चलिए जानते हैं कि आखिर प्रेमानंद महाराज ने इस सवाल का क्या जवाब दिया?

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नहीं पड़ेगी पछताने की जरूरत

प्रेमानंद महाराज ने इस सवाल का जवाब देते हुए कहा कि ये तो अभ्यास बचपन से कराया जाए या अभी जितनी आयु बची है, उसमें सब संभाल लो। हर सांस में नाम जप करो। श्वास श्वास नाम जपे दुविधा रहे ना कोई। अगर प्रत्येक सांस में प्रिय और प्रियतम का नाम जाप किया जाए, प्रभु का नाम जप किया जाए। वहीं अभ्यास करते रहो और अंतिम समय आ जाएगा और अंतिम समय में अगर भगवान का स्मरण हो तो मृत्यु महोत्सव हो जाए। इसके बाद पछताने की जरूरत नहीं है। भगवान का भजन अगर जीवन में नहीं किया तो कोई सोचे कि अंतिम समय में भगवान का स्मरण आ जाए तो असंभव है। जीवन भर अगर पाप आचरण किए हो तो अंतिम समय में उसी पाप आचरण का स्मरण होगा और दुर्गति हो जाएगी।

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अंतिम समय में करें भगवान का स्मरण

प्रेमानंद महाराज ने आगे कहा कि वर्तमान के समय को भजन में लगाते हुए व्यतीत करें। पता नहीं कौन सी सांस हमारी मृत्यु वाली सांस हो। आखिरी सांस हो। अपने लोगों को क्या पता कि किस समय हमारा शरीर छूट जाएगा? इसलिए प्रत्येक सांस में भगवान का नाम जप करो। अंतिम समय में भगवान का स्मरण आ जाए तो मरने का पछतावा नहीं होगा। आवागमन से मुक्त हो जाओगे। जीवन धारण करना सार्थक हो जाएगा। मृत्यु महोत्सव हो जाएगा।

Garima Singh

लेखक के बारे में

Garima Singh

शॉर्ट बायो


गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, न्यूमरोलॉजी, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।


परिचय और अनुभव

गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। वह पिछले 8 महीनों से लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।


करियर

गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि

गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।


एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच

गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।


व्यक्तिगत रुचियां

काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।


विशेषज्ञता

वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, फेंगशुई, डेली और वीकली राशिफल

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