प्रेमानंद जी महाराज: अपने गुरु को सबसे अच्छी गुरु दक्षिणा क्या देनी चाहिए?

Jan 17, 2026 07:24 pm ISTNavaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
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प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि गुरु दक्षिणा धन, सोना या संपत्ति से नहीं, बल्कि पूर्ण समर्पण, श्रद्धा और अनन्य भक्ति से दी जाती है। महाराज जी का स्पष्ट संदेश है कि गुरु को सबसे अच्छी दक्षिणा वह है, जो साधक खुद को ही गुरु के चरणों में समर्पित कर दे।

प्रेमानंद जी महाराज: अपने गुरु को सबसे अच्छी गुरु दक्षिणा क्या देनी चाहिए?

गुरु दक्षिणा का महत्व हिंदू धर्म और आध्यात्मिक परंपरा में सर्वोच्च है। गुरु वह व्यक्ति होता है, जो अज्ञान के अंधकार से ज्ञान का प्रकाश दिखाता है। वृंदावन के प्रसिद्ध संत श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज अपने सत्संगों में बार-बार कहते हैं कि गुरु दक्षिणा धन, सोना या संपत्ति से नहीं, बल्कि पूर्ण समर्पण, श्रद्धा और अनन्य भक्ति से दी जाती है। महाराज जी का स्पष्ट संदेश है कि गुरु को सबसे अच्छी दक्षिणा वह है, जो साधक खुद को ही गुरु के चरणों में समर्पित कर दे। आइए महाराज जी के उपदेश से जानते हैं कि गुरु को सच्ची और सबसे उत्तम दक्षिणा क्या होनी चाहिए।

गुरु दक्षिणा का मूल स्वरूप है पूर्ण समर्पण

प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि गुरु दक्षिणा का सबसे बड़ा रूप है 'मैं' का लोप। जब साधक कहता है कि 'मैं कुछ नहीं, सब कुछ गुरु का है, तब वह गुरु को सच्ची दक्षिणा देता है।' यह समर्पण धन या वस्तु से नहीं, बल्कि मन, बुद्धि, प्राण और आत्मा से होता है। महाराज जी बताते हैं कि जब तक साधक में अहंकार रहता है, तब तक दक्षिणा अधूरी रहती है। पूर्ण समर्पण से गुरु प्रसन्न होते हैं और साधक को अपना बना लेते हैं। यह दक्षिणा अमूल्य है और जीवन भर फल देती है।

अनन्य भक्ति और श्रद्धा ही गुरु का सबसे प्रिय उपहार

महाराज जी का कहना है कि गुरु को सबसे अच्छी दक्षिणा अनन्य भक्ति है। अनन्य का अर्थ है - केवल एक पर केंद्रित। साधक का मन, विचार और प्रेम सिर्फ गुरु और उनके आराध्य पर होना चाहिए। श्रद्धा इतनी गहरी हो कि साधक गुरु के हर वचन को वेद-वाक्य मान ले। महाराज जी कहते हैं कि गुरु की आज्ञा को अपना जीवन बना लें, यही सबसे बड़ी दक्षिणा है। जब साधक गुरु के बिना एक पल भी नहीं रह पाता, तब गुरु उसकी दक्षिणा से संतुष्ट हो जाते हैं। यह भक्ति धन से कहीं अधिक मूल्यवान है।

सच्ची गुरु दक्षिणा का प्रमाण है गुरु आज्ञा का पालन

प्रेमानंद जी महाराज बार-बार इस बात पर जोर देते हैं कि गुरु दक्षिणा गुरु आज्ञा के पालन में छिपी है। गुरु जो कहते हैं, उसे बिना संदेह के मानना ही सबसे बड़ी दक्षिणा है। चाहे वह साधना हो, त्याग हो या सेवा - गुरु आज्ञा का पालन करने से साधक का मन शुद्ध होता है और गुरु की कृपा प्राप्त होती है। महाराज जी कहते हैं कि गुरु आज्ञा का उल्लंघन सबसे बड़ा अपराध है, और उसका पालन सबसे बड़ी दक्षिणा है। जब साधक गुरु के चरणों में अपना सब कुछ अर्पित कर देता है, तब गुरु उसे अपना मान लेते हैं।

राधा नाम जप और गुरु भक्ति ही सर्वोत्तम दक्षिणा

महाराज जी का सबसे सुंदर संदेश है कि गुरु दक्षिणा राधा नाम जप में छिपी है। गुरु को सबसे अच्छी दक्षिणा वह है, जब साधक राधा नाम जपते हुए गुरु के चरणों में लीन हो जाता है। महाराज जी कहते हैं कि जब साधक राधा नाम में डूब जाता है, तब गुरु स्वयं उसकी दक्षिणा स्वीकार कर लेते हैं। यह दक्षिणा ना तो धन से खरीदी जा सकती है और ना ही दिखावे से। यह केवल हृदय की गहराई से दी जाती है। राधा नाम जपने से गुरु प्रसन्न होते हैं और साधक को मोक्ष का मार्ग दिखाते हैं।

प्रेमानंद जी महाराज का उपदेश है कि गुरु दक्षिणा धन या वस्तु से नहीं, बल्कि पूर्ण समर्पण, अनन्य भक्ति, श्रद्धा और गुरु आज्ञा पालन से दी जाती है। राधा नाम जपते हुए गुरु के चरणों में लीन होना ही सबसे बड़ी और सच्ची गुरु दक्षिणा है। ऐसा करने से गुरु प्रसन्न होते हैं और साधक का जीवन धन्य हो जाता है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Navaneet Rathaur

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नवनीत राठौर नए युग के डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में करीब 7 साल का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन के हिस्सा हैं। यहां वह अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष से जुड़ी खबरें लिखते हैं।


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डिजिटल मीडिया में अपनी अलग पहचान बना रहे नवनीत राठौर धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा में पाठकों के लिए परोसते हैं। वो अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और करीब 5 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान नवनीत ने वेबस्टोरी, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।


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नवनीत ने शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा से जनसंचार एवं पत्रकारिता में स्नातक और शुभारती विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।


नवनीत राठौर ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत जनतंत्र न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने सूर्या समाचार और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद नवनीत लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। पाठकों को सरल, विश्वसनीय और प्रेरणादायक जानकारी प्रदान करना ही नवनीत राठौर का मुख्य उद्देश्य है।


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