Pradosh Vrat 2026: मई के पहले प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त करें नोट, इन 3 गलतियों से रहें सावधान

Garima Singh लाइव हिन्दुस्तान
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मई महीने का पहला प्रदोष व्रत 14 मई 2026 को है। इस दिन के लिए पूजा का शुभ मुहूर्त जानें। साथ ही जानें कि इस दिन किन चीजों को लेकर सावधानी बरतनी है?

Pradosh Vrat 2026: मई के पहले प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त करें नोट, इन 3 गलतियों से रहें सावधान

मई महीने का प्रदोष व्रत जल्द ही पड़ने वाला है। मान्यता है कि अगर शुभ मुहूर्त में प्रदोष व्रत की पूजा की जाए तो इसके शुभ फल मिलते हैं। हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत की पूजा और व्रत का विशेष महत्व होता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। शिवभक्तों को हर महीने आने वाले प्रदोष व्रत का बेसब्री से इंतजार होता है। लोग दिनभर उपवास रखकर शाम के समय प्रदोष काल में पूजा करते हैं। ऐसा माना जाता है कि सच्चे मन से इस व्रत को करने से सारे कष्ट दूर होते हैं और भगवान शिव और माता पार्वती के आशीर्वाद से सारी मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं। महीने में प्रदोष व्रत दो बार आते हैं। इसे कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदिशी तिथि पर रखते हैं। तो चलिए जानते हैं कि मई के महीने में पहला प्रदोष व्रत कब है और इसका शुभ मुहूर्त क्या है? साथ ही जानेंगे कि इस दिन हमें किन 3 चीजों को लेकर सावधान रहना चाहिए।

गुरु प्रदोष व्रत की सही तारीख और मुहूर्त

मई महीने का पहला प्रदोष व्रत कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाएगा। ये 14 मई को पड़ रहा है। इस दिन गुरुवार होगा तो इस प्रदोष व्रत को गुरु प्रदोष व्रत कहा जाएगा। बता दें कि इस बार त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 14 की सुबह से ही हो जाएगी। तिथि के शुरुआत होने का समय सुबह 11:20 बजे से हो जाएगी। वहीं इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 15 मई की सुबह होगी। तिथि के समापन का समय सुबह 8:31 बजे तक है। शाम के समय त्रयोदिशी तिथि के होने की वजह से प्रदोष व्रत उसी दिन रखा जाता है। ऐसे में मई महीने का पहला प्रदोष व्रत 14 मई को रखा जाएगा।

गुरु प्रदोष व्रत पूजा शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के हिसाब से इस बार प्रदोष व्रत की पूजा के लिए 1 घंटा 42 मिनट तक शुभ मुहूर्त रहेगा। 14 मई की शाम में गुरु प्रदोष व्रत की पूजा 5:22 बजे से लेकर शाम में 7:04 बजे तक है। इस दौरान की गई पूजा का महत्व होगा।

गुरु प्रदोष व्रत पर ना करें ये काम

गुरु प्रदोष व्रत के दिन सबसे पहले इस बात का ध्यान रखें कि मन में नकारात्मक विचार ना आएं। ना ही इस दिन गुस्सा करें और ना ही किसी के लिए कोई खराब शब्द कहें। इस दिन भगवान शिव की पूजा शांत और पवित्र मन से करना ही फलदायी माना जाता है। इसके अलावा व्रत के दौरान तामसिक भोजन जैसे लहसुन, प्याज, मांस-मछली और शराब का सेवन नहीं करना चाहिए। माना जाता है कि इससे व्रत का पुण्य कम हो सकता है। प्रदोष काल के समय पूजा करने में लापरवाही ना करें। सही समय पर विधि-विधान से पूजा करना बेहद जरूरी होता है तभी व्रत का पूरा फल मिलता है।

डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)

Garima Singh

लेखक के बारे में

Garima Singh

शॉर्ट बायो: गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।

परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।

करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।

एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।

व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।

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