प्रदोष व्रत कथा हिंदी में: आज यहां पढ़ें प्रदोष व्रत की कथा, शिव कृपा से बदली गरीब ब्राह्मणी की किस्मत
Pradosh Vrat Katha June 2026: आज जून महीने का पहला प्रदोष व्रत है जोकि भगवान शिव को समर्पित होता है। मान्यता है कि प्रदोष व्रत की पूजा के साथ-साथ इसकी कथा को सच्चे मन से पढ़ा जाए तो भगवान शिव की विशेष कृपा मिलती है।

आज शिव भगवान को समर्पित प्रदोष व्रत है। हर महीने की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। जून के महीने में पड़ने वाला पहला प्रदोष व्रत आज है और दूसरा 27 जून को पड़ेगा। मान्यता है कि इस दिन शुभ मुहूर्त पर भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा की जाए तो दोनों की असीम कृपा मिलती है। विधि-विधान से की गई पूजा के साथ ही प्रदोष व्रत और शिव चालीसा का पाठ करना भी बहुत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि प्रदोष व्रत की पूजा के दौरान इसकी कथा को पूरे मन से पढ़ना चाहिए।
यहां पढ़ें प्रदोष व्रत की पूरी कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार एक नगर में एक गरीब ब्राह्मणी अपने छोटे बेटे के साथ रहती थी। पति के चल बसने के बाद उस ब्राह्मणी का और कोई दूसरा सहारा नहीं था। ऐसे में वो भिक्षा मांगकर किसी तरह अपना गुजारा किया करती थी। एक दिन घर लौटते समय उसे रास्ते में एक घायल युवक मिला। उसे दया आई और फिर उसे अपने घर लाकर उसकी सेवा की और ठीक होने तक पूरे समर्पण के साथ उसकी देखभाल करती रही। वो कोई साधारण युवक बल्कि विदर्भ राज्य का राजकुमार था।
दरअसल शत्रुओं ने उसके राज्य पर हमला कर उसके पिता को बंदी बना लिया था और राजपाट छीन लिया था। इसी वजह से वो अपनी जान बचाते हुए भटकता रहा। स्वस्थ होने के बाद वो वहीं ब्राह्मणी और उसके पुत्र के साथ ही रहने लगा। कुछ समय बाद अंशुमति नाम की एक गंधर्व कन्या ने राजकुमार को देखा और उससे काफी प्रभावित हुईं। अगले ही दिन वह अपने माता-पिता को उससे मिलाने ले आई।
राजकुमार से मिलकर वो भी बहुत खुश हुए। तभी एक रात अंशुमति के माता-पिता को सपने में भगवान शिव के दर्शन हुए। भगवान ने उन्हें अपनी बेटी का विवाह राजकुमार से कराने का आदेश दिया। शिवजी की आज्ञा का पालन करते हुए उन्होंने जल्द ही दोनों का विवाह भी करवा दिया। उधर ब्राह्मणी पूरी श्रद्धा और नियम से प्रदोष व्रत रखती थी और भगवान शिव की पूजा करती थी। उसे अपनी इस भक्ति का फल ये मिला कि अंशुमति के पिता की सेना की सहायता से राजकुमार ने अपने शत्रुओं को परास्त कर विदर्भ राज्य दोबारा हासिल कर लिया और अपने पिता को भी सम्मानपूर्वक वापस राज्य दिलाया।
राजा बनने के बाद उसने ब्राह्मणी के बेटे को अपना प्रधानमंत्री नियुक्त किया और उनके उपकार का सम्मान किया। इसी वजह से मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से किए गए प्रदोष व्रत और भगवान शिव की भक्ति से जिंदगी की बड़ी से बड़ी मुश्किलें भी दूर हो जाती हैं।
लेखक के बारे में
Garima Singhशॉर्ट बायो:
गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।
परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।
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गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
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एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।
व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।
विशेषज्ञता (Areas of Expertise)
वास्तु शास्त्र
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