Pradosh Vrat 2026: नहीं रख पा रहे हैं प्रदोष व्रत? 1 लोटा जल के साथ करें ये उपाय, मिलेगा शिवजी का आशीर्वाद
हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। अलग-अलग दिनों की प्रदोष अलग-अलग फल देती है और अगर पूरा व्रत न रख पा रहे हों, तो भी एक छोटा सा उपाय करके शिवजी का आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है। आइए जानते हैं इस उपाय के बारे में।

सनातन धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने का एक अत्यंत शक्तिशाली उपाय माना जाता है। हर महीने दोनों पक्षों में त्रयोदशी तिथि पर पड़ने वाला प्रदोष काल शिव भक्ति का विशेष समय होता है। कथावाचक प्रदीप मिश्रा जी अपने प्रवचनों में प्रदोष व्रत की महिमा को बड़े ही सरल और भावपूर्ण तरीके से समझाते हैं। उन्होंने बताया कि अलग-अलग दिनों की प्रदोष अलग-अलग फल देती है और अगर पूरा व्रत न रख पा रहे हों, तो भी एक छोटा सा उपाय करके शिवजी का आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है।
अप्रैल माह का प्रदोष व्रत
अप्रैल 2026 में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 15 अप्रैल को है। पंचांग के अनुसार, यह तिथि 15 अप्रैल को रात 12:12 बजे शुरू होगी और उसी दिन रात 10:31 बजे समाप्त होगी। इसलिए प्रदोष व्रत 15 अप्रैल 2026, मंगलवार को रखा जाएगा। प्रदोष काल शाम 6:01 बजे से 7:31 बजे तक रहेगा। इस मुहूर्त में पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है।
प्रदोष व्रत का महत्व और अलग-अलग दिनों का फल
प्रदीप मिश्रा जी बताते हैं कि प्रदोष के दिन शिवजी विभिन्न स्थानों पर विराजमान होते हैं। सोमवार की प्रदोष में वे कैलाश पर, मंगलवार की प्रदोष में काशी में, बुधवार की प्रदोष में रजत भवन में, गुरुवार की प्रदोष में गंगा तट पर, शुक्रवार की प्रदोष में नीलकंठ पर, शनिवार की प्रदोष में शमी वृक्ष के नीचे और रविवार की प्रदोष में बेलपत्र के वृक्ष के नीचे निवास करते हैं।
प्रदीप मिश्रा जी के अनुसार सोमवार की प्रदोष इच्छापूर्ति करती है। मंगलवार की प्रदोष रोग से मुक्ति दिलाती है। बुधवार की प्रदोष कामना पूरी करती है। गुरुवार की प्रदोष शत्रु नाश करती है। शुक्रवार की प्रदोष सुख और शांति देती है। शनिवार की प्रदोष संतान सुख देती है। रविवार की प्रदोष वह काम करती है जो दुनिया में कोई नहीं कर सकता है।
नहीं रख पा रहे व्रत तो करें यह सरल उपाय
प्रदीप मिश्रा जी कहते हैं कि अगर कोई व्यक्ति पूरा व्रत नहीं रख पा रहा है, तो भी निराश होने की जरूरत नहीं है। शिव पुराण के अनुसार, प्रदोष काल में एक लोटा जल में 5 बेलपत्र डालकर शिवलिंग पर चढ़ा दें। यह उपाय पूरे प्रदोष व्रत के बराबर फल देता है। बस श्रद्धा और विश्वास के साथ यह कार्य करना चाहिए।
प्रदोष व्रत कितने बार करें?
प्रदीप मिश्रा जी बताते हैं कि जीवन में कम से कम 11 या 26 प्रदोष व्रत करने के बाद उद्यापन किया जा सकता है। उद्यापन के बाद व्रत को विराम दिया जा सकता है। लेकिन जो भक्त नियमित प्रदोष व्रत रखना चाहते हैं, वे आजीवन रख सकते हैं।
प्रदोष व्रत के दौरान इन बातों का ध्यान रखें
प्रदोष काल में शिवलिंग पर बेलपत्र, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें। ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें। प्रदोष के दिन सात्विक भोजन करें या निर्जल व्रत रखें। व्रत के बाद पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद करें।
प्रदोष व्रत शिव भक्ति का सुंदर माध्यम है। प्रदीप मिश्रा जी के अनुसार, सच्चे भाव से किया गया यह व्रत या छोटा उपाय भी भगवान शिव को प्रसन्न कर देता है। जो भक्त नियमित रूप से प्रदोष व्रत रखते हैं या उपाय करते हैं, उनके जीवन से संकट दूर होते हैं और शिव कृपा बनी रहती है।
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