
Pradosh Vrat 2025: आज प्रदोष व्रत में स्कंदपुराण के अनुसार कैसे करें शिवजी का पूजन, पढ़ें मुहूर्त
Paush Pradosh Vrat :दिसंबर के अंतिम प्रदोष व्रत के आज है। इस दिन शाम को सबसे पहले व्रत का संकल्प करें। भगवान से बोलें-इस व्रत में आप यहं पधारिए ओर मेरी को हुई इस पूजा को पार्वतीजी के साथ करिए।' इस प्रकार संकल्प और आवाहन करके पूजा शुरु करनी चाहिये।
दिसंबर के अंतिम प्रदोष व्रत के आज है। इस दिन शाम को सबसे पहले व्रत का संकल्प करें। भगवान से बोलें-इस व्रत में आप यहं पधारिए ओर मेरी को हुई इस पूजा को पार्वतीजी के साथ करिए।' इस प्रकार संकल्प और आवाहन करके पूजा शुरु करनी चाहिये। इसके बाद मनुष्य एकाग्रचित्त हो रुद्रसूक्तका पाठ करें। इसके बाद शंख के जलसे ओर पंचामृतसे महादेवजी का अभिषेक करें। उनके मंत्रों से आसन समर्पित करें। उसीपर भगवान् को विराजमान करके अष्टगुणयुक्त अर्घ्य का निवेदन करे। फिर शुद्ध जल से आचमन कराकर मधुपर्क दें। उसके बाद पुनः आचमन के लिये जल देकर मन्त्रोच्चारण करके स्नान कराएं। फिर यज्ञोपवीत, वस्त्र ओर आभूषण अर्पण करें। परम पवित्र अष्टांगयुक्त चन्दन चढाएं। इसके बाद बिल्व, मदार लाल कमल, धतूर, कनेर, सनका फूल, चमेली, कुशा, अपामार्ग, तुलसी, जूही, चम्पा के फूलों में से जितने मिल जाएं, उन सबको शिवोपासक भगवान् शिव पर चढाएं। इनके अतिरिक्त भी नाना प्रकारके सुगन्धित पुष्प निवेदन करे। घी, मिठाई, पूआ, शक्कर और गुड के बने हुए पदार्थं और खीर का नैवेद्य भोग लगाएं। मधु, दही ओर जल भी अर्पण करें। उस खीर का ही मन्त्र द्रारा प्रज्वलित की हुई अग्निमें हवन करें।
शाम को शिवलिंग पर क्या अर्पित करें
इस दिन अगर आप शिवलिंग पर शिवलिंग पर गेहूं और धतूरा अर्पित करें तो आपको इससे संतान को लाभ होगा, इससे बहुत लाभ होगा। पौष मास के अंतिम प्रदोष व्रत पर शिवलिंग पर तिल अर्पित करने चाहिए। इसके लिए जल में काले तिल मिलाकर इस मिश्रित जल से अभिषेक करें। इससे आपके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 16 दिसंबर 2025, रात 11:57 बजे से हुई है, त्रयोदशी तिथि समाप्त 18 दिसंबर 2025, रात 2:32 बजे तक है।
प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त:
शाम 6:04 बजे से रात 8:41 बजे तक
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।





