Garud Puran:पुत्र के अलावा कौन-कौन कर सकता है पिता का श्राद्ध? गरुड़ पुराण में छिपा है उत्तर
Garud Puran in hindi: गरुड़ पुराण में जन्म मृत्यु से जुड़े कई रहस्य लिखे हैं। वहीं पितृपक्ष आने वाला है। ऐसे में अगर आप भी पितरों का श्राद्ध करते हैं और परिवार में बेटा नहीं है तो पढ़ें कौन कर सकता है पितरों का श्राद्ध

गरुड़ पुराण में जन्म मृत्यु से जुड़े कई रहस्य लिखे हैं। वहीं पितृपक्ष आने वाला है। इस साल सितंबर में 26 सितंबर 2026 यानी पूर्णिमा श्राद्ध से पितृपक्ष शुरू होगा। पितृपक्ष 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के दिन समाप्त होगा। पितृपक्ष में पितरों के लिए 15 दिन श्राद्ध किया जाता है। ऐसे में श्राद्ध से जुड़े कई सवाल हैं, जो लोगों को पता नहीं हैं। इनका जवाब गरुड़ पुराण में कहा गया है। अगर आप भी पितरों का श्राद्ध करते हैं और परिवार में बेटा नहीं है तो आपको गरुड़ पुराण से जानना चाहिए कि कौन पितरों का श्राद्ध कर सकता है। गरुड़ पुराण की मानें तो पितरों का श्राद्ध आधिकारिक तौर पर बेटा ही कर सकता है। बेटे को ही श्राद्ध करने के लिए गरुड़ पुराण में कहा गाया है।
क्या लिखा है गरुड़ पुराण में
अगर किसी के बेटा नहीं है तो क्या उसकी बेटी श्राद्ध कर सकती है, तो आपको बता दें कि बेटी के श्राद्ध करने को लेकर कोई नियम गुरुड़ पुराण में नहीं लिखा है। अगर बेटा नहीं है तो धर्मपत्नी अपने पति का श्राद्ध कर सकती है। लेकिन बेटी के किए गए श्राद्ध को लेकर कुछ नहीं कहा गया है। श्राद्ध के दौरान पितरों का तर्पण आदि किया जाता है और उनके लिए किसी को भोजन कराया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इससे पितृ तृप्त होकर जाते हैं और खूब आशीर्वाद अपनी संतान को देकर जाते हैं। इससे परिवार में पितृदोष नहीं आता है।
अगर धर्मपत्नी भी नहीं है तो कौन कर सकता है श्राद्ध
अगर धर्मपत्नी नहीं है तो बेटी का बेटा अपने नाना श्राद्ध कर सकता है। गरुड़ पुराण में इसको लेकर कहा गया है कि बेटी के बेटे से श्राद्ध को मान्य किया गया है। इसलिए नाना का श्राद्ध बेटी का बेटा कर सकता है। पिंड दान समेत श्राद्ध कर्म श्राद्ध के दिनों में खास माना जाता है।
कहा जाता है कि श्राद्ध से पितृ ऋण चुकाना और मृतक की आत्मा को शांति देना होता है। ऐसा कहा जाता है कि जिनकी हम पीढ़ी हैं, उन्हें सम्मान देना और मरने के बाद उनके लिए भोजन देना और उन्हें याद करने के लिए पितरों के लिए ये पितृपक्ष बनाया गया है। इस 15 दिनों में हम अपने पितरों की तिथि के अनुसार उनका श्राद्ध किया जाता है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।


