
यहां है विश्व की सबसे बड़ी बैठी हुई हनुमान की प्रतिमा, दर्शन मात्र से दूर होते हैं कष्ट
भारत में हनुमान जी के कई अनोखे व चमत्कारिक मंदिर है, जहां दर्शन मात्र से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। लेकिन एक जगह ऐसी भी है जहां हनुमान की जी की बैठी हुई विशाल प्रतिमा है, जहां दर्शन के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। यहां स्थापित हनुमान जी की बैठी हुई प्रतिमा काफी विशाल है।
भारत में हनुमान जी के कई अनोखे व चमत्कारिक मंदिर है, जहां दर्शन मात्र से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। लेकिन एक जगह ऐसी भी है जहां हनुमान की जी की बैठी हुई विशाल प्रतिमा है, जहां दर्शन के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। इस मंदिर का नाम पितरेश्वर हनुमान धाम है, जो मध्य प्रदेश के इंदौर में स्थित है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां हनुमान जी की प्रतिमा भूमि के भीतर स्थापित है। भक्तों को प्रतिमा के दर्शन के लिए सीढ़ियां उतरकर नीचे जाना होता है, जो इसे अत्यंत रहस्यमय बनाता है।
पितरेश्वर हनुमान धाम की विशेषताएं
पितरेश्वर हनुमान मंदिर इंदौर के पितृ पर्वत पर स्थित है। पितरेश्वर हनुमान धाम में हनुमान जी की दो प्रतिमाएं विराजित हैं। एक पूजनीय और दर्शनीय। दोनों का अपना विशेष महत्व है। पूजनीय प्रतिमा में माता अंजनी हनुमान जी को गोद में लिए हुए हैं। कहा जाता है रात्रि में हनुमानजी माता की गोद में विश्राम करते हैं। वहीं, दर्शनीय प्रतिमा अष्टधातु से निर्मित है जो 108 टन वजनी है। इसकी चौड़ाई 54 फीट और ऊंचाई 71 फीट है।
दर्शनीय प्रतिमा में हनुमान जी बैठकर प्रभु श्रीराम के कीर्तन में लीन हैं। यह विश्व में हनुमानजी की बैठी हुई सबसे बड़ी प्रतिमा है। यह प्रतिमा अष्टधातु से निर्मित दुनिया की सबसे ऊंची हनुमान जी की प्रतिमा है। पितरेश्वर हनुमान पीड़ा हरने वाले, मनोकामना पूर्ण करने वाले संकटमोचक माने जाते हैं।
निर्माण में कितना समय लगा
पितरेश्वर हनुमान की इस दर्शनीय प्रतिमा को पूर्ण करने में 125 कारीगरों को 7 साल का समय लगा। प्रतिमा को ग्वालियर से 264 भागों में लाया गया था, जिसे जोड़ने में कारीगरों को 3 साल का समय लगा। प्रतिमा पर 7 चक्र मौजूद हैं जिनसे ब्रह्मांड की ऊर्जा प्रवाहित होती है। पितरेश्वर हनुमान धाम के बारे में कहा जाता है कि यहां बजरंगबली से जो भी भक्त सच्चे मन से जो कुछ मांगते हैं, हनुमान जी उसकी मनोकामना जरूर पूरी करते हैं।
मंदिर से जुड़ी मान्यताएं
मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना पूरी होती हैं, पितरों की बाधा दूर होती है। इसके अलावा भय, नकारात्मक ऊर्जा और कष्टों से रक्षा होती है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।





