घर में कबूतरों का अंडा देना शुभ होता है या नहीं, जानिए इसके बारे में सबकुछ

Feb 19, 2026 08:49 pm ISTNavaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
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कबूतर को लक्ष्मी जी का भक्त और शांति का प्रतीक कहा जाता है, लेकिन जब वे घर में घोंसला बनाते हैं या अंडे देते हैं, तो इसका अर्थ बदल जाता है। आइए जानते हैं इसका शुभ-अशुभ प्रभाव और क्या करना चाहिए।

घर में कबूतरों का अंडा देना शुभ होता है या नहीं, जानिए इसके बारे में सबकुछ

हिंदू ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और शकुन शास्त्र में घर में कबूतरों का आना, बसेरा बनाना या अंडा देना एक महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। कबूतर को लक्ष्मी जी का भक्त और शांति का प्रतीक कहा जाता है, लेकिन जब वे घर में घोंसला बनाते हैं या अंडे देते हैं, तो इसका अर्थ बदल जाता है। कई लोग इसे सुख-समृद्धि का संकेत मानते हैं, जबकि ज्योतिष और वास्तु के अनुसार यह ज्यादातर अशुभ माना जाता है। आइए विस्तार से जानते हैं इसका शुभ-अशुभ प्रभाव और क्या करना चाहिए।

कबूतरों का घर में आना और घोंसला बनाना

वास्तु शास्त्र के अनुसार, कबूतर शांति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। यदि कबूतर घर की बालकनी, छत या आंगन में दाना चुगकर उड़ जाता है, तो यह सुख-समृद्धि और लक्ष्मी के आगमन का शुभ संकेत है। लेकिन यदि कबूतर घर में स्थायी रूप से घोंसला बनाता है, तो यह अशुभ माना जाता है। घोंसला बनाने से घर में अस्थिरता, आर्थिक हानि और परिवार में कलह बढ़ने की संभावना रहती है। ज्योतिष में कबूतर का संबंध राहु से जोड़ा जाता है, इसलिए इसका स्थायी बसेरा नकारात्मक ऊर्जा लाता है।

कबूतरों का अंडा देना - शुभ या अशुभ?

शकुन शास्त्र और लोक मान्यताओं के अनुसार, घर में कबूतर का अंडा देना अशुभ संकेत है। यह आर्थिक तंगी, कर्ज बढ़ने, स्वास्थ्य समस्याएं या परिवार में कलह का संकेत देता है। कई ज्योतिषी इसे 'आर्थिक बाधा' और 'परिवारिक अशांति' का प्रतीक मानते हैं। यदि कबूतर बार-बार अंडा दे रहा है, तो यह आने वाली बड़ी समस्या या नुकसान का इशारा माना जाता है। हालांकि कुछ लोग इसे संतान प्राप्ति का संकेत भी मानते हैं, लेकिन अधिकांश शास्त्रों में इसे सावधानी का प्रतीक बताया गया है।

कबूतरों से जुड़े अन्य संकेत और प्रभाव

  • सुबह की गुटरगूं - प्रेम, सुख और सकारात्मकता का संकेत।
  • शाम की गुटरगूं - झगड़े, चोरी या कलह का शक।
  • घर में गंदगी - कबूतरों की गंदगी नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती है, जिससे स्वास्थ्य और आर्थिक समस्याएं बढ़ती हैं।
  • बहुत सारे कबूतर - घर में अस्थिरता और नकारात्मकता का संकेत।

वास्तु के अनुसार, कबूतरों का घोंसला मुख्य द्वार, पूजा स्थल या रसोई के पास बनना विशेष रूप से अशुभ होता है।

कबूतरों के घोंसले और अंडे से बचाव के उपाय

  1. घोंसला हटाना - कबूतरों को प्यार से घर से दूर किसी पेड़ या सुरक्षित स्थान पर घोंसला बनाने दें। नुकसान पहुंचाने से बचें।
  2. साफ-सफाई - कबूतरों के आने वाले स्थान को नियमित रूप से साफ रखें। गंदगी ना होने दें।
  3. दाना-पानी - कबूतरों को दाना-पानी घर से दूर पार्क या खुले स्थान पर दें। इससे बुध और गुरु ग्रह मजबूत होते हैं।
  4. हनुमान जी की पूजा - अगर कबूतर बार-बार आ रहे हैं तो हनुमान चालीसा का पाठ करें और हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाएं।
  5. वास्तु उपाय - घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक या ॐ का चिन्ह बनाएं। पीपल या तुलसी का पौधा लगाएं।

कबूतरों का आना सामान्य है, लेकिन घोंसला बनाना और अंडा देना ज्यादातर अशुभ माना जाता है। वास्तु और ज्योतिष के अनुसार सावधानी बरतें और घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखें।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Navaneet Rathaur

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नवनीत राठौर नए युग के डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में करीब 7 साल का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन के हिस्सा हैं। यहां वह अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष से जुड़ी खबरें लिखते हैं।


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नवनीत ने शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा से जनसंचार एवं पत्रकारिता में स्नातक और शुभारती विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।


नवनीत राठौर ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत जनतंत्र न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने सूर्या समाचार और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद नवनीत लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। पाठकों को सरल, विश्वसनीय और प्रेरणादायक जानकारी प्रदान करना ही नवनीत राठौर का मुख्य उद्देश्य है।


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