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Gemstone: इन तारीखों पर जन्मे लोगों के लिए बेस्ट है पुखराज, पहनते समय ना करें ये गलती

Gemstone: इन तारीखों पर जन्मे लोगों के लिए बेस्ट है पुखराज, पहनते समय ना करें ये गलती

संक्षेप:

किसी भी रत्न को धारण करने के लिए सिर्फ कुंडली देखने की जरूरत नही हैं। आप अपने मूलांक के आधार पर भी अपने लिए परफेक्ट रत्न को सेलेक्ट कर सकते हैं। आज जानिए कि पुखराज किस मूलांक के लोगों के लिए बेस्ट होता है?

Jan 17, 2026 11:58 am ISTGarima Singh लाइव हिन्दुस्तान
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रत्नशास्त्र की दुनिया में उन रत्नों का जिक्र है, जिनमें हमारी कुंडली के ग्रहों के प्रभाव को काफी हद तक कम करने की ताकत है। हीरा, मोती, पन्ना और पुखराज समेत कई ऐसे रत्न हैं, जिसे ज्योतिष जरूरत के हिसाब से पहनने की सलाह देते हैं। आम तौर पर लोग कुंडली दिखाकर ही अपने लिए रत्न बनवाते हैं। वहीं मूलांक के आधार पर भी रत्नों को धारण कर सकते हैं। आज बात करेंगे रत्नशास्त्र की दुनिया के कीमती रत्नों में से एक पुखराज की। पुखराज का संबंध बृहस्पति ग्रह यानी गुरु से जुड़ा हुआ है। इससे पहनने से करियर और विवाह संबंधी कई बाधाएं दूर होती हैं। तो चलिए जानते हैं कि आखिर किस तारीख पर जन्मे लोगों के लिए ये सूटेबल होता है।

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इस मूलांक के लिए लकी है पुखराज

बता दें कि हर किसी की जन्म तारीख से जुड़ा हुआ एक मूलांक होता है। मूलांक हमारी जिंदगी की दिशा और भविष्य को किसी ना किसी रूप में जरूर प्रभावित करते हैं। बात करें पुखराज की तो ये मूलांक 3 वालों के लिए काफी लकी होता है। जिन लोगों का जन्म किसी भी महीने की 3, 12, 21 या फिर 30 तारीख को होता है, उनका मूलांक 3 होता है। मूलांक 3 वाले जातक वैसे तो काफी क्रिएटिव और एक्टिव रहते हैं लेकिन कई बाद अपने तनाव के चलते ये कई चीजों में मात खा जाते हैं। ऐसे में पुखराज की मदद से इनकी जिंदगी में स्थिरता आती है। साथ ही पुखराज की एनर्जी से इनकी क्रिएटिविटी और निखरती है और ये सही दिशा में क्लैरिटी के साथ सोच पाते हैं। हालांकि पुखराज को धारण करने का नियम है। इसे धारण करते वक्त कोई भी गलती नहीं करनी चाहिए।

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पुखराज पहनने का नियम

किसी भी रत्न को धारण करने से पहले उसका शुद्धीकरण करना जरूरी है। कई बार लोग ऐसा ना करके ही इस रत्न को धारण कर लेते है जोकि सही नहीं है। वहीं इसे धारण करने के लिए एक विशेष दिन है। इस दिन ही पुखराज को धारण करना फलदायी माना जाता है। ऐसे में पुखराज को हमेशा गुरुवार के दिन ही पहनना चाहिए। साथ ही इसे हमेशा सोने में ही जड़वाना चाहिए। धारण करने से पहले इसे दूध और गंगाजल से शुद्ध कर लें। इसके बाद ॐ बृं बृहस्पतये नमः मंत्र का 108 बार जाप करें और इसे सच्ची श्रद्धा के साथ धारण कर लें।

डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए रत्नशास्त्र विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)

Garima Singh

लेखक के बारे में

Garima Singh

शॉर्ट बायो


गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, न्यूमरोलॉजी, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।


परिचय और अनुभव

गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। वह पिछले 8 महीनों से लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।


करियर

गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि

गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।


एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच

गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।


व्यक्तिगत रुचियां

काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।


विशेषज्ञता

वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, फेंगशुई, डेली और वीकली राशिफल

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