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साल 2025 की अंतिम एकादशी कब है? नोट कर लें डेट, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त

साल 2025 की अंतिम एकादशी कब है? नोट कर लें डेट, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त

संक्षेप:

हिंदू धर्म में एकादशी का बहुत अधिक महत्व होता है। हर माह में दो बार एकादशी पड़ती है। एक कृष्ण पक्ष में और एक शुक्ल पक्ष में। साल में कुल 24 एकादशी पड़ती हैं।इस समय पौष का पावन महीना चल रहा है। पौष माह के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है।

Dec 22, 2025 11:44 am ISTYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Paush Putrada Ekadashi 2025: हिंदू धर्म में एकादशी का बहुत अधिक महत्व होता है। हर माह में दो बार एकादशी पड़ती है। एक कृष्ण पक्ष में और एक शुक्ल पक्ष में। साल में कुल 24 एकादशी पड़ती हैं।इस समय पौष का पावन महीना चल रहा है। पौषमाह के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह एकादशी साल 2025 की अंतिम एकादशी भी है। एकादशी का पावन दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है। भगवान विष्णु की कृपा से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में सबसे बड़ा व्रत माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी व्रत का फल व्यक्ति को उसकी मृत्यु के बाद भी मिलता है।

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मुहूर्त-

एकादशी तिथि प्रारम्भ - दिसम्बर 30, 2025 को 07:50 ए एम बजे

एकादशी तिथि समाप्त - दिसम्बर 31, 2025 को 05:00 ए एम बजे

पौष पुत्रदा एकादशी तिथि का मान इस बार दो दिन रहेगा। जिस वजह से इस बार दो दिन व्रत रखा जाएगा। जब एकादशी तिथि दो दिनों में पड़ती है, तब ऐसी मान्यता है कि गृहस्थ पहले दिन और संत–वैष्णव दूसरे दिन व्रत रखते हैं। इसका कारण यह है कि गृहस्थ परंपरा में व्रत का निर्णय सूर्योदय पर मौजूद तिथि के आधार पर किया जाता है, जबकि संत और वैष्णव परंपरा में हरिवासर (एकादशी का शुद्ध काल) को अधिक महत्व दिया जाता है। जब पहले दिन एकादशी तिथि रात में शुरू होती है और दूसरे दिन हरिवासर पूरा होता है, तब संत दूसरे दिन व्रत करते हैं। इसी वजह से ऐसी स्थिति में एकादशी दो दिन मानी जाती है।

पौष पुत्रदा एकादशी व्रत कब है?- गृहस्थजन 30 दिसंबर को व्रत रखेंगे तो संत–वैष्णवजन 31 दिसंबर को व्रत रखेंगे।

पौष पुत्रदा एकादशी मंगलवार, दिसम्बर 30, 2025 को रखने वाले 31 दिसंबर को पारण करेंगे।

31 दिसंबर को, पारण (व्रत तोड़ने का) समय - 01:26 पी एम से 03:31 पी एम

पारण तिथि के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय - 10:12 ए एम

पौष पुत्रदा एकादशी व्रत 31 दिसंबर को रखने वाले 1 जनवरी को पारण करेंगे-

1 जनवरी को एकादशी के लिए पारण (व्रत तोड़ने का) समय - 07:14 ए एम से 09:18 ए एम

पारण के दिन द्वादशी सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगी।

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पूजा विधि: एकादशी व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं। इसके बाद घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें फिर भगवान विष्णु का गंगा जल से अभिषेक करें। अभिषेक करने के बाद भगवान विष्णु को पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें। अगर संभव हो तो इस दिन व्रत भी रखें। भगवान की आरती करें। आरती के बाद भगवान को भोग लगाएं। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है। भगवान विष्णु के भोग में तुलसी को जरूर शामिल करें। ऐसा माना जाता है कि बिना तुलसी के भगवान विष्णु भोग ग्रहण नहीं करते हैं। इस पावन दिन भगवान विष्णु के साथ ही माता लक्ष्मी की पूजा भी करें। इस दिन भगवान का अधिक से अधिक ध्यान करें।

एकादशी व्रतपूजा सामग्री लिस्ट- श्री विष्णु जी का चित्र अथवा मूर्ति, पुष्प, नारियल, सुपारी, फल, लौंग, धूप, दीप, घी , पंचामृत , अक्षत, तुलसी दल, चंदन, मिष्ठान।

Yogesh Joshi

लेखक के बारे में

Yogesh Joshi

संक्षिप्त विवरण


योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


विस्तृत बायो


परिचय और अनुभव


योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।


न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि


योगेश जोशी ने मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की इस पढ़ाई ने उन्हें तथ्यों के साथ जिम्मेदारी और संतुलन बनाए रखने की समझ दी, जो उनके लेखन में साफ झलकती है।


करियर की शुरुआत और प्रोफेशनल सफर


योगेश ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफॉर्म से की। यहां उन्होंने डिजिटल न्यूज़, कंटेंट राइटिंग और एडिटिंग पर काम करते हुए मजबूत आधार तैयार किया। इसके बाद डिजिटल मीडिया में लगातार काम करते हुए उन्होंने एस्ट्रोलॉजी और धार्मिक विषयों से जुड़े कंटेंट में विशेषज्ञता विकसित की।
पाठक किस भाषा में बात समझता है और किस तरह की जानकारी उसके लिए उपयोगी होती है—यह समझ उनके प्रोफेशनल सफर की सबसे बड़ी ताकत रही है।

एस्ट्रोलॉजी लेखन और उद्देश्य


योगेश के लिए ज्योतिष केवल भविष्य बताने का जरिया नहीं है। वह इसे आत्मचिंतन और सही फैसलों में मदद करने वाले एक मार्गदर्शक के रूप में देखते हैं। इसी सोच के साथ वह राशिफल और अन्य ज्योतिषीय विषयों को संतुलित, व्यावहारिक और भरोसेमंद तरीके से प्रस्तुत करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों को डराना नहीं, बल्कि जानकारी के जरिए उन्हें सोचने और समझने की दिशा देना है।


व्यक्तिगत रुचियां


काम के अलावा योगेश को सामाजिक विषयों पर पढ़ना, लिखना और भारतीय परंपराओं को समझना पसंद है। उनका मानना है कि एक पत्रकार के लिए सीखना और खुद को अपडेट रखना सबसे जरूरी है।


विशेषज्ञता (Areas of Expertise):

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दशा-महादशा
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