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Paush Purnima: पौष पूर्णिमा व्रत कब है? नोट कर लें सही डेट, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, उपाय से लेकर सबकुछ

Paush Purnima: पौष पूर्णिमा व्रत कब है? नोट कर लें सही डेट, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, उपाय से लेकर सबकुछ

संक्षेप:

Paush Purnima Vrat 2026: हिंदू पंचांग में पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। वर्ष 2026 की पहली पूर्णिमा पौष मास के शुक्ल पक्ष में पड़ रही है, जिसे पौष पूर्णिमा कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूर्णिमा के दिन चंद्रमा पूर्ण रूप में आकाश में विराजमान होते हैं।

Jan 02, 2026 03:54 pm ISTYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Paush Purnima Vrat 2026: हिंदू पंचांग में पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। वर्ष 2026 की पहली पूर्णिमा पौष मास के शुक्ल पक्ष में पड़ रही है, जिसे पौष पूर्णिमा कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूर्णिमा के दिन चंद्रमा पूर्ण रूप में आकाश में विराजमान होते हैं। यही वजह है कि इस तिथि को मानसिक शांति, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ा माना जाता है। पौष पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और चंद्रदेव की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से किया गया स्नान, दान और व्रत व्यक्ति के पापों का क्षय करता है और जीवन में सुख-समृद्धि लाता है। शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि पौष मास में किए गए धार्मिक कर्म, पौष पूर्णिमा के स्नान के बाद ही पूर्ण फल देते हैं। यही कारण है कि इस तिथि को पूरे पौष महीने का सार भी माना जाता है।

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प्रयागराज माघ मेले की शुरुआत भी इसी दिन से

पौष पूर्णिमा का महत्व केवल पूजा-पाठ तक ही सीमित नहीं है। इसी पावन तिथि से प्रयागराज में माघ मेले का शुभारंभ भी होता है। यह मेला भारत के सबसे बड़े आध्यात्मिक आयोजनों में गिना जाता है, जहां देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु संगम में स्नान के लिए पहुंचते हैं। मान्यता है कि पौष पूर्णिमा के दिन संगम में स्नान करने से व्यक्ति को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन के कई कष्ट दूर होते हैं।

2026 में पौष पूर्णिमा कब है?- हिंदू पंचांग के अनुसार, पौष पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 2 जनवरी 2026 को शाम 6 बजकर 53 मिनट से होगी और तिथि की समाप्ति 3 जनवरी 2026, दोपहर 3 बजकर 32 मिनट होगी। चूंकि व्रत और पूजा उदया तिथि के आधार पर मानी जाती है, इसलिए पौष पूर्णिमा का व्रत 3 जनवरी 2026, शनिवार को रखा जाएगा। इस दिन चंद्रमा का उदय शाम 5 बजकर 28 मिनट पर होगा।

स्नान-दान का शुभ मुहूर्त- धार्मिक दृष्टि से पौष पूर्णिमा पर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और दान करना सबसे श्रेष्ठ माना गया है।

ब्रह्म मुहूर्त 05:25 ए एम से 06:20 ए एम

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अन्य शुभ मुहूर्त-

अभिजित मुहूर्त 12:05 पी एम से 12:46 पी एम

विजय मुहूर्त 02:09 पी एम से 02:51 पी एम

गोधूलि मुहूर्त 05:34 पी एम से 06:02 पी एम

अमृत काल 08:33 ए एम से 09:58 ए एम

निशिता मुहूर्त 11:58 पी एम से 12:53 ए एम, जनवरी 04

इन समयों में किया गया दान-पुण्य भी विशेष फल देने वाला माना जाता है।

पौष पूर्णिमा पर इन चीजों का करें दान-

पौष पूर्णिमा के दिन दान का भी खास महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान अक्षय पुण्य देता है और कुंडली में मौजूद नकारात्मक ग्रह प्रभावों को भी शांत करता है। इस दिन खासतौर पर सफेद रंग से जुड़ी वस्तुओं का दान शुभ माना जाता है, जैसे- दूध, चावल, चीनी, सफेद वस्त्र, चांदी, सफेद चंदन। इसके अलावा, खीर बनाकर प्रसाद के रूप में बांटना, जरूरतमंदों को कंबल और ऊनी कपड़े देना, चावल, गेहूं, तिल, गुड़, घी और दूध का दान करना।

पौष पूर्णिमा का व्रत क्यों रखें- मान्यताओं के अनुसार, पौष पूर्णिमा का व्रत रखने से मानसिक शांति मिलती है, आत्मबल मजबूत होता है, पितरों की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आ रही बाधाएं धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं।

पूजा विधि: पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। अगर नदी या किसी पवित्र स्थान पर स्नान संभव हो तो बहुत अच्छा माना जाता है, नहीं तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान कर लें। इसके बाद साफ कपड़े पहनकर पूजा की जगह को सलीके से साफ करें। एक चौकी पर सफेद कपड़ा बिछाएं और भगवान विष्णु की तस्वीर या मूर्ति रखें। दीपक जलाएं, धूप दिखाएं और मन को शांत करके पूजा शुरू करें। भगवान विष्णु को फूल, चंदन, अक्षत और भोग अर्पित करें। इसके साथ सूर्य देव को जल अर्पित करना भी शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान मन से भगवान का नाम लें, थोड़ा बहुत मंत्र या विष्णु सहस्रनाम पढ़ लें, जितना सहज लगे उतना ही करें। अंत में पूर्णिमा व्रत कथा सुनें या पढ़ें और अपनी सामर्थ्य के अनुसार किसी जरूरतमंद को दान जरूर दें।

पूर्णिमा के उपाय: पूर्णिमा के दिन कुछ छोटे-छोटे उपाय करने से मन की अशांति दूर होती है और जीवन में सकारात्मकता आती है। इस दिन सुबह स्नान के बाद सूर्य देव को जल में थोड़ा सा गुड़ या लाल फूल डालकर अर्घ्य दें, इससे आत्मविश्वास और स्वास्थ्य में सुधार माना जाता है। शाम के समय चंद्रमा निकलने पर खुले आसमान के नीचे खड़े होकर चंद्रमा को दूध या जल से अर्घ्य दें और मन ही मन अपनी किसी एक मनोकामना को शांत भाव से रखें। पूर्णिमा के दिन किसी भूखे व्यक्ति या जरूरतमंद को भोजन, दूध या सफेद वस्त्र दान करना बहुत शुभ माना जाता है। अगर मन भारी रहता है या मानसिक तनाव है, तो इस दिन सफेद मोमबत्ती या दीपक जलाकर कुछ देर शांत बैठना भी लाभ देता है। मान्यता है कि पूर्णिमा पर श्रद्धा से किए गए ये सरल उपाय जीवन में सुख, शांति और संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं।

Yogesh Joshi

लेखक के बारे में

Yogesh Joshi
योगेश जोशी हिंदुस्तान डिजिटल में सीनियर कंटेंट प्रड्यूसर हैं। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के मेहला गांव के रहने वाले हैं। पिछले छह सालों से पत्रकरिता कर रहे हैं। एनआरएआई स्कूल ऑफ मास कम्युनिकेश से जर्नलिज्म में स्नातक किया और उसके बाद 'अमर उजाला डिजिटल' से अपने करियर की शुरुआत की, जहां धर्म और अध्यात्म सेक्शन में काम किया।लाइव हिंदुस्तान में ज्योतिष और धर्म- अध्यात्म से जुड़ी हुई खबरें कवर करते हैं। पिछले तीन सालों से हिंदुस्तान डिजिटल में कार्यरत हैं। अध्यात्म के साथ ही प्रकृति में गहरी रुचि है जिस कारण भारत के विभिन्न मंदिरों का भ्रमण करते रहते हैं। और पढ़ें
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