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Paush Amavasya 2025: मिनी पितृपक्ष पौष अमावस्या कब है, इन उपायों से प्रसन्न होंगे पितृ

Paush Amavasya 2025: मिनी पितृपक्ष पौष अमावस्या कब है, इन उपायों से प्रसन्न होंगे पितृ

संक्षेप:

पौष मास को छोटा ‘पितृ पक्ष’ भी कहा जाता है। इस मास में पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान किया जाता है। गया जी में देश भर से लोग इस मास में पितरों के तर्पण के लिए जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन पितरों की पूजा करने पर उन्हें मुक्ति मिलती है।

Dec 14, 2025 11:51 am ISTAnuradha Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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पौष मास को छोटा ‘पितृ पक्ष’ भी कहा जाता है। इस मास में पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान किया जाता है। गया जी में देश भर से लोग इस मास में पितरों के तर्पण के लिए जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन पितरों की पूजा करने पर उन्हें मुक्ति मिलती है। इससे प्रसन्न होकर वे आशीर्वाद देकर जाते हैं, जिससे हमारी लाइफ में सुख समृद्धि आती है। पौष मास में सूर्य का बड़ा गोचर होता है, जिसे धनु संक्रांति होती है, इसके बाद सूर्य का सबसे बड़ा गोचर मकर संक्रांति होता है। सूर्य के धनु राशि में जाने पर ‘खर’ मास आरंभ होता है। इस मास में मांगलिक और शुभ कार्य वर्जित होते हैं। पौष माह को मिनी पितृपक्ष का शुरू हो गया है। पौष कृष्ण पक्ष में पितरों का पिंडदान कर मोक्ष की कामना के लिए लाखों लोग गया जी में जाते हैं। छोटा पितृपक्ष की अमावस्या इस साल 19 दिसंबर को रहेगी। इस महीने में श्राद्ध कर्म तथा पिंड दान और सूर्य के साथ विष्णु की अराधना की जाती है। आश्विन, कार्तिक, पौष और चैत्र इन महीनों में पितरों के लिए पिंडदान बहुत अच्छा माना गया है, लेकिन इनमें से कार्तिक, पौष और चैत्र को मिनी पितृपक्ष कहा जाता है।

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पौष अमावस्या कब है

इस साल पंचांग के अनुसार पौष माह की अमावस्या तिथि 19 दिसंबर, शुक्रवार के दिन सुबह 04 बजकर 59 मिनट पर शुरू होगी, अमावस्या तिथि का समापन 20 दिसंबर सुबह 07 बजकर 12 मिनट पर होगा। ऐसे में पौष अमावस्या 19 दिसंबर, शुक्रवार के दिन मनाई जाएगी। पौष माह में भगवान विष्णु और सूर्य की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। पितरों के प्रति श्रद्धा, धार्मिक अनुष्ठान और आस्था की ऊर्जा से आने वाले दिनों में विष्णुनगरी पूरी तरह आध्यात्मिक माहौल में डूबी रहेगी।

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पौष अमावस्या पर क्या उपाय करें

पौष अमावस्या गंगा में स्नान कर पितरों का तर्पण करना चाहिए। इस दिन हो सके तो काले तिल से पितरों को तर्पण दें, इसके साथ ही काला तिल दान भी करना चाहिए। काले तिल के दान से पापों का नाश होता है। इस महीने में सूर्य को काले तिल डालकर जल अर्पित करना चाहिए। हो सके तो पितरों का पिंडदान करें और उनकी मुक्ति के लिए कामना करें। इसके साथ अनावस्या पर शाम को पीपल के पेड़ के पास और पवित्र नदियों के पास दीपक जलाना चाहिए, इससे पितृ प्रसन्न होते हैं।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Anuradha Pandey

लेखक के बारे में

Anuradha Pandey
अनुराधा पांडे लाइव हिन्दुस्तान में एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन लीड कर रही हैं। इन्हें पत्रकारिता जगत में करीब डेढ़ दशक का अनुभव है। ज्योतिष और धर्म-अध्यात्म से जुड़े विषयों पर पिछले 10 सालों से लिख रही हैं। इन्होंने हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा भारतीय जनसंचार संस्थान, दिल्ली और ग्रैजुएशन दिल्ली विश्वविद्यालय से किया है। लाइव हिन्दुस्तान में करियर का लंबा हिस्सा बीता और काम करते-करते 9 साल हो गए हैं। एस्ट्रोलॉजी और करियर से जुड़ी खबरों के अलावा हेल्थ पर लिखने शौक है। इससे पहले तीन साल तक आज तक वेबसाइट में एजुकेशन सेक्शन में भी काम किया है। और पढ़ें
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