Paryushan parv: पर्युषण पर्व के 10 दिन क्या हैं? जानें कितने प्रकार के होते हैं तप

लाइव हिन्दुस्तान
Follow us on Google News
share

Paryushan parv: भाद्रपद मास में प्रकृति की सरसता शिखर पर होती है। धरती का कण-कण सरसब्ज होता है। पत्रों-पुष्पों से वृक्ष-लताएं समृद्ध होती हैं। जानें पर्युषण पर्व कब से कब तक रहेगा।

paryushan parv 2026
पर्युषण पर्व कब से कब तक मनाया जाएगा?

Tap kitne prakar ke hote hai: पर्युषण अपनी आत्मा की आराधना-उपासना और मनोरंजन का पर्व है। यह 08-15 सितंबर तक मनाया जाएगा। यह आठ कर्म राशियों के दहन का पर्व है। पर्युषण के ये आठ दिन जाति, कुल, गोत्र, ऐश्वर्य, पद, ज्ञान आदि दंभों के दमन और शमन के दिन हैं। यह पर्व भाद्रपद कृष्ण त्रयोदशी से भाद्रपद शुक्ल पंचमी तक सामूहिक रूप से जप, तप, त्यागपूर्वक मनाया जाता है।

भाद्रपद मास में प्रकृति की सरसता शिखर पर होती है। धरती का कण-कण सरसब्ज होता है। पत्रों-पुष्पों से वृक्ष-लताएं समृद्ध होती हैं। सर्वत्र सहज आनंद, सहज उल्लास, सहज उत्सव का वातावरण होता है। ऐसी सुखद वेला में निरंतर आठ दिनों तक ‘पर्युषण’ की आराधना की जाती है।

पर्युषण पर्व के नियम:

कुछ लोग एक, दो, तीन या आठ दिन का उपवास रखते हुए, इन आठ दिनों में पूर्णतः संसार और संबंधों से विमुख रहते हैं। अपनी दिनचर्या का यथासंभव अधिक समय आत्म-चिंतन-मनन, स्वाध्याय, सत्संग में समर्पित करते हैं। जैन परंपरा में इन दिनों में अंतकृत दशांग सूत्र की वाचना दी जाती है। इस सूत्र में त्यागी, तपस्वी, क्षमाशील साधक-साधिकाओं के चरित्र हैं। इनके स्वाध्याय से सांसारिक (ईर्ष्या-द्वेष आदि) दुर्भाव क्षीण होते हैं। आध्यात्मिक (प्रेम, करुणा, पारस्परिक सहयोग आदि) भाव वर्धमान होते हैं। पर्युषण दिवसों में प्रमुख रूप से तपस्या की जाती है। इसका प्रमुख स्वरूप अनशन है। इनमें तप का विशेष महत्व है। तप बारह तरह के होते हैं-

अनशन : भोजन का त्याग करना।

ऊनोदरी : स्वल्प भोजन ग्रहण करना।

भिक्षाचरी : मुनिजन अनेक गृहस्थों के घर से थोड़ा-थोड़ा विधिपूर्वक शुद्ध आहार ग्रहण कर जीवन-यापन करते हैं। जैसा भी भोजन मिले, उसे संतोष भाव से ग्रहण करना।

रस-परित्याग : रसना के विविध रसों में निरासक्त रहना।

कायक्लेश : शरीर में उत्पन्न होने वाले रोगों को समभाव से सहन करना।

प्रतिसंलीनता : मन को बाह्य भावों से हटाकर आत्मभावों में लीन करना।

प्रायश्चित्त : कभी भूल हो जाए, तो विनम्र भाव से भूल को स्वीकार करके मन को शुद्ध करना।

विनय : मनसा, वाचा, कर्मणा विनम्रता धारण करना।

वैयावृत्त्य : वृद्धों, रोगियों एवं जरूरतमंदों की सेवा करना।

स्वाध्याय : जीवन में गुणों की वृद्धि करने वाले ग्रंथों को पढ़ना।

ध्यान : मन को शुभ और शुद्ध भावों से भावित रखना।

व्युत्सर्ग : मोह-ममता का त्याग करना।

अंतिम दिन संवत्सरी-

उपर्युक्त बारह प्रकार के तप के अभ्यास से व्यक्ति का तन-मन निर्मल हो जाता है। पर्युषण में इन तपों की आराधना की जाती है। इसका अंतिम दिन संवत्सरी कहलाता है। इसे पर्वाधिराज कहते हैं।

‘संवत्सरी’ शिखर-कलश है। इस दिन मन, चित्त, आत्मा का पूर्ण शुद्धिकरण किया जाता है। आराधक विनम्र और प्रसन्न भाव से कहता है- ‘मैं सभी प्राणियों को क्षमा करता हूं। सभी प्राणी मुझे क्षमा करें। सभी जीवों के प्रति मेरा मैत्री भाव है। किसी भी जीव के प्रति मेरे मन में वैर या द्वेष भाव नहीं है।’

पर्युषण के आठ दिवस अत्यंत पवित्र हैं। ये आत्म-साक्षात्कार, आत्म-उपासना और आत्म-शुद्धि के पावन पर्व हैं। लौकिक प्रभावों, विभावों, दिखावों से दूर रहते हुए प्रत्येक व्यक्ति को पर्युषण की आराधना करनी चाहिए।

-उपाध्याय रवीन्द्र मुनि

Saumya Tiwari

लेखक के बारे में

Saumya Tiwari

संक्षिप्त विवरण

सौम्या तिवारी लाइव हिन्दुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा हैं और इस संस्थान के साथ करीब 5 वर्षों से अधिक समय से जुड़ी हैं। इन्हें डिजिटल पत्रकारिता में करीब 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। यहां वह ग्रह राशि परिवर्तन, टैरो, वैदिक ज्योतिष, फेंगशुई, अंकराशि, रत्न शास्त्र और व्रत-त्योहार आदि से जुड़ी खबरें लिखती हैं।


विस्तृत बायो


परिचय और अनुभव

सौम्या तिवारी की ग्रह राशि परिवर्तन, व्रत-त्योहार, सामुद्रिक शास्त्र, अंकज्योतिष, वास्तु शास्त्र एवं फेंगशुई, कथा-कहानी जैसे विषयों पर अच्छी पकड़ है। उन्हें ज्योतिष एवं धार्मिक विषयों में करीब 6 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर डिप्टी कंटेंट प्रोड्यूसर कार्यरत हैं और धर्म व ज्योतिष (एस्ट्रोलॉजी) सेक्शन का हिस्सा हैं।


इसके अलावा उन्होंने मनोरंजन (एंटरटेनमेंट) और राजनीतिक (पॉलिटिक्स) विषयों पर भी विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम किया है। लाइव हिन्दुस्तान में सौम्या की टॉप परफॉर्मेंस रही है, जिसके लिए उन्हें कई बार पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। खाली समय में वह धार्मिक ग्रंथों और पुराणों का अध्ययन करना और पाठकों तक सही जानकारी पहुंचाना पसंद करती हैं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि

सौम्या तिवारी ने कानपुर विश्वविद्यालय से स्नातक (बीए) किया है और जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से जनसंचार एवं पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा प्राप्त किया है। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान ही उन्हें हैदराबाद की लोकल न्यूज वेबसाइट इंडिलिक्स से पहली नौकरी का प्रस्ताव मिला।


इसके बाद वह जनसत्ता (द इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप), द क्विंट और जी न्यूज जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों से जुड़ी रहीं। साल 2020 में वह लाइव हिन्दुस्तान के धर्म व ज्योतिष सेक्शन का हिस्सा बनीं।


व्यक्तिगत रुचियां

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की रहने वाली सौम्या तिवारी को धार्मिक और ज्योतिषीय विषयों की जानकारी जुटाना पसंद है। इसके अलावा उन्हें नई-नई जगहों पर घूमने का भी शौक है।


विशेषज्ञता

ग्रह और नक्षत्रों का राशि पर असर
फेंगशुई
वास्तु शास्त्र
अंक शास्त्र
रत्न विज्ञान

और पढ़ें
जानें Navratri 2026, Rashifal और Panchang की सटीक जानकारी। रोजाना पूजा-पाठ के लिए पढ़ें Shiv Chalisa, Shiv Aarti, Shiv Mahamrityunjaya Mantra, Shiv Stuti, Hanuman Chalisa और Bajrang Baan।
Hindi Newsधर्म न्यूज़पर्युषण पर्व के 10 दिन क्या हैं? जानें कितने प्रकार के होते हैं तप