हरतालिका तीज में प्रदोष काल में पढ़ें मां पार्वती की आरती- जय पार्वती माता
Parvati Mata aarti: हरतालिका तीज के व्रत में शिवजी संग मां पार्वती की आरती की जाती है। यहां पढ़ें शिवजी और मां पार्वती की आरती

हरतालिका तीज में पूजा का खास महत्व है। भगवान शिव की पूजा खास तौर पर प्रदोष काल में होती है। भगवान शिव का एक व्रत भी है प्रदोष व्रत, इसलिए शाम के समय पूजन कर कथा पढ़नी चाहिए, इसका बड़ा महत्व है। हरतालिका तीज में महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र को लेकर सोमवार यानी आज हरतालिका तीज का व्रत रखेंगी।शाम को जब सूर्य अस्त हो रहे हैं और तो बीच के समय को प्रदोष काल कहते है, इस समय में महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें और अखंड सुहाग की कामना करें। इस दिन मिट्टी से शिवजी की प्रतिमा बनाई जाती है और उसकी की पूजा होती है। महिलाएं शिवजी से और गौरा मां से सुहाग दान भी लेती हैं। इसके बाद आरती की जाती है। इसमें भगवान शिव और मां पार्वती दोनों की आरती जरूरी है। कहते हैं कि मां पार्वती ने शिवजी को पाने के लिए कठोर तपस्या की, उन्होंने ना कुछ खाया ना ही जल पिया और तीज के दिन मिट्टी से शिवजी बनाकर उनका पूजन किया और उनकी पूजा से शिवजी प्रसन्न हुए।
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखत त्रिभुवन जन मोहे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघंबर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
कर के मध्य कमण्डल चक्र त्रिशूलधारी।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा।
भांग धतूरे का भोजन, भस्मी में वासा॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥ स्वामी ओम जय शिव ओंकारा॥
2. पार्वती माता की आरती
ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल की दाता॥
जय पार्वती माता
अरिकुल पद्म विनाशिनि जय सेवक त्राता।
जग जीवन जगदंबा, हरिहर गुण गाता॥
जय पार्वती माता
सिंह को वाहन साजे, कुण्डल हैं साथा।
देव वधू जस गावत, नृत्य करत ताथा॥
जय पार्वती माता
सतयुग रूपशील अतिसुन्दर, नाम सती कहलाता।
हेमांचल घर जन्मी, सखियन संग राता॥
जय पार्वती माता
शुम्भ-निशुम्भ विदारे, हेमांचल स्थाता।
सहस्त्र भुजा तनु धरि के, चक्र लियो हाथा॥
जय पार्वती माता
सृष्टि रूप तुही है जननी शिवसंग रंगराता।
नन्दी भृंगी बीन लही सारा जग मदमाता॥
जय पार्वती माता
देवन अरज करत हम चित को लाता।
गावत दे दे ताली, मन में रंगराता॥
जय पार्वती माता
श्री प्रताप आरती मैया की, जो कोई गाता।
सदासुखी नित रहता सुख सम्पत्ति पाता॥


