कल है मंगला गौरी व्रत, सिर्फ 1 उपाय से बढ़ेगा धन, सौभाग्य

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Parvati Chalisa in hindi, Mangla Gauri Vrat upay: मंगला गौरी व्रत पर कुछ उपाय करने से आप जीवन में चल रही मुसीबतों को दूर कर सकते हैं। इस दिन लव लाइफ, धन की स्थिति और मैरिड लाइफ को सुधारने के लिए जरूर करें ये उपाय-

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भगवान शिव और माता पार्वती के गठबंधन की विधि

Mangla Gauri Vrat upay : इस साल का तीसरा मंगला गौरी व्रत 18 अगस्त के दिन पड़ रहा है। सावन के महीने में आने वाले व्रतों में सबसे शुभ मंगला गौरी व्रत माना जाता है। मां पार्वती को समर्पित यह व्रत विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं द्वारा अखंड सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली के लिए रखा जाता हैं। अविवाहित कन्याएं अच्छे वर की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं। इस दिन कुछ उपाय करने से आप जीवन में चल रही मुसीबतों को दूर कर सकते हैं। मंगला गौरी व्रत के दिन लव लाइफ, धन की स्थिति और मैरिड लाइफ को सुधारने के लिए श्री पार्वती चालीसा का पाठ करें। 11 या 21 बार श्री पार्वती चालीसा का पाठ करने से मां पार्वती प्रसन्न होकर धन और सौभाग्य में वृद्धि का आशीर्वाद देती हैं और सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।

कल है मंगला गौरी व्रत, सिर्फ 1 उपाय से बढ़ेगा धन, सौभाग्य

॥ दोहा ॥

जय गिरी तनये दक्षजे, शम्भु प्रिये गुणखानि।

गणपति जननी पार्वती, अम्बे शक्ति भवानि॥

॥ चौपाई ॥

ब्रह्मा भेद न तुम्हरो पावे।पंच बदन नित तुमको ध्यावे॥

षड्मुख कहि न सकत यश तेरो।सहसबदन श्रम करत घनेरो॥

तेऊ पार न पावत माता।स्थित रक्षा लय हित सजाता॥

अधर प्रवाल सदृश अरुणारे।अति कमनीय नयन कजरारे॥

ललित ललाट विलेपित केशर।कुंकुम अक्षत शोभा मनहर॥

कनक बसन कंचुकी सजाए।कटी मेखला दिव्य लहराए॥

कण्ठ मदार हार की शोभा।जाहि देखि सहजहि मन लोभा॥

बालारुण अनन्त छबि धारी।आभूषण की शोभा प्यारी॥

नाना रत्न जटित सिंहासन।तापर राजति हरि चतुरानन॥

इन्द्रादिक परिवार पूजित।जग मृग नाग यक्ष रव कूजित॥

गिर कैलास निवासिनी जय जय।कोटिक प्रभा विकासिन जय जय॥

त्रिभुवन सकल कुटुम्ब तिहारी।अणु अणु महं तुम्हारी उजियारी॥

हैं महेश प्राणेश! तुम्हारे।त्रिभुवन के जो नित रखवारे॥

उनसो पति तुम प्राप्त कीन्ह जब।सुकृत पुरातन उदित भए तब॥

बूढ़ा बैल सवारी जिनकी।महिमा का गावे कोउ तिनकी॥

सदा श्मशान बिहारी शंकर।आभूषण हैं भुजंग भयंकर॥

कण्ठ हलाहल को छबि छायी।नीलकण्ठ की पदवी पायी॥

देव मगन के हित अस कीन्हों।विष लै आपु तिनहि अमि दीन्हों॥

ताकी तुम पत्नी छवि धारिणि।दूरित विदारिणी मंगल कारिणि॥

देखि परम सौन्दर्य तिहारो।त्रिभुवन चकित बनावन हारो॥

भय भीता सो माता गंगा।लज्जा मय है सलिल तरंगा॥

सौत समान शम्भु पहआयी।विष्णु पदाब्ज छोड़ि सो धायी॥

तेहिकों कमल बदन मुरझायो।लखि सत्वर शिव शीश चढ़ायो॥

नित्यानन्द करी बरदायिनी।अभय भक्त कर नित अनपायिनी॥

अखिल पाप त्रयताप निकन्दिनि।माहेश्वरी हिमालय नन्दिनि॥

काशी पुरी सदा मन भायी।सिद्ध पीठ तेहि आपु बनायी॥

भगवती प्रतिदिन भिक्षा दात्री।कृपा प्रमोद सनेह विधात्री॥

रिपुक्षय कारिणि जय जय अम्बे।वाचा सिद्ध करि अवलम्बे॥

गौरी उमा शंकरी काली।अन्नपूर्णा जग प्रतिपाली॥

सब जन की ईश्वरी भगवती।पतिप्राणा परमेश्वरी सती॥

तुमने कठिन तपस्या कीनी।नारद सों जब शिक्षा लीनी॥

अन्न न नीर न वायु अहारा।अस्थि मात्रतन भयउ तुम्हारा॥

पत्र घास को खाद्य न भायउ।उमा नाम तब तुमने पायउ॥

तप बिलोकि रिषि सात पधारे।लगे डिगावन डिगी न हारे॥

तब तव जय जय जय उच्चारेउ।सप्तरिषि निज गेह सिधारेउ॥

सुर विधि विष्णु पास तब आए।वर देने के वचन सुनाए॥

मांगे उमा वर पति तुम तिनसों।चाहत जग त्रिभुवन निधि जिनसों॥

एवमस्तु कहि ते दोऊ गए।सुफल मनोरथ तुमने लए॥

करि विवाह शिव सों हे भामा।पुनः कहाई हर की बामा॥

जो पढ़िहै जन यह चालीसा।धन जन सुख देइहै तेहि ईसा॥

॥ दोहा ॥

कूट चन्द्रिका सुभग शिर,जयति जयति सुख खानि।

पार्वती निज भक्त हित,रहहु सदा वरदानि॥

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Shrishti Chaubey

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Shrishti Chaubey

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सृष्टि चौबे पत्रकारिता जगत में 4 वर्षों का अनुभव रखती हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर कार्यरत हैं। वह ज्योतिष, ग्रह गोचर, राशिफल, नक्षत्र परिवर्तन, अंकज्योतिष, रत्न, और वास्तु से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। पाठक-केंद्रित व आसान भाषा में जानकारी पेश करना इनके लेखन की पहचान है। धार्मिक ग्रंथों को पढ़कर लोगों तक सही जानकारी पहुंचाना और उन पर शोध करना इनकी विशेष पसंद है।

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