Papamochani Ekadashi 2026: पापमोचिनी एकादशी व्रत आज, नोट कर लें पूजा-विधि व पारण का समय, दान करें ये चीजें

Mar 15, 2026 08:19 am ISTDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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papamochani ekadashi 2026: पापमोचिनी एकादशी का व्रत रखने और पूरे विधि-विधान से पूजा अर्चना करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है। साथ ही भगवान विष्णु व मां लक्ष्मी की कृपा से घर परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। इस दिन दान पुण्य का खास महत्व होता है।

Papamochani Ekadashi 2026: पापमोचिनी एकादशी व्रत आज, नोट कर लें पूजा-विधि व पारण का समय, दान करें ये चीजें

papamochani ekadashi 2026: आज यानी 15 मार्च 2026, दिन रविवार को चैत्र महीने के कृष्ण की एकादशी यानी पापमोचिनी एकादशी है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा पूरे विधि-विधान से की जाती है। साथ ही इस दिन व्रत रखने का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक पापमोचिनी एकादशी का व्रत रखने और पूरे विधि-विधान से पूजा अर्चना करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है। साथ ही भगवान विष्णु व मां लक्ष्मी की कृपा से घर परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। इस दिन दान पुण्य का खास महत्व होता है। कहते हैं पापमोचिनी एकादशी पर कुछ चीजों का दान करने से कई तरह के कष्ट नष्ट हो जाते हैं। साथ ही इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करना बेहद पुण्य फलदायी होता है।

पापमोचिनी एकादशी पूजा विधि

पापमोचिनी एकादशी के दिन सबसे पहले प्रात: उठकर स्नान करें और फिर साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थान तैयार करें। चौकी पर भगवान विष्णु की फोटो या मूर्ति रखें। एकादशी पूजा की शुरुआत में सबसे पहले भगवान गणपति की पूजा करें। इसके बाद भगवान विष्णु और महालक्ष्मी की पूजा शुरू करें। इसके बाद दीपक जलाएं। भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी का गंगाजल से अभिषेक करें। फिर पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद शुद्ध जल से स्नान कराएं। इसके बाद विष्णु जी को वस्त्र, आभूषण और जनेऊ अर्पित करें, देवी को लाल चुनरी, हार-फूल चढ़ाएं। फूल और तुलसी के पत्ते चढ़ाएं। मिठाई का भोग लगाएं। फिर कपूर जलाकर भगवान की आरती करें।

इन मंत्रों का करें जाप

पूजा के समय “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” और “ॐ विष्णवे नमः” मंत्र बोलना शुभ माना जाता है। अंत में पंचामृत, गुड़ और चने का भोग लगाकर आरती करें और पूजा का समापन करें।

पापमोचिनी एकादशी पर क्या करें

- पापमोचिनी एकादशी पर भगवान विष्णु के नामों का स्मरण करना चाहिए आप चाहें, तो विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ भी कर सकते हैं।
- इसके अलावा एकादशी की शाम तुलसी के पास दीपक जलाना चाहिए।
- तुलसी की पूजा करनी चाहिए, लेकिन ध्यान रखें शाम को तुलसी को ना छुएं। दूर से ही पूजा करनी चाहिए।
- साथ ही इस दिन तुलसी की पत्तियां भी नहीं तोड़नी चाहिए।
- इस दिन किसी से झगड़ा न करें। कटु वचन बोलने से बचें।
- व्रत करने वाले व्यक्ति को दिनभर निराहार रहना चाहिए। जो लोग भूखे नहीं रह पाते हैं, वे फलों का और दूध का सेवन कर सकते हैं।
- पापमोचिनी एकादशी व्रत करने वाले भक्त को पानी में गंगाजल और काले तिल मिलाकर स्नान करना चाहिए।
- इस तरह स्नान करने से व्यक्ति को तीर्थ स्नान के समान पुण्य मिलता है और उसके जाने-अनजाने में हुए पाप कर्मों के फल खत्म होते हैं।
- स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए।

पापमोचिनी व्रत पारण का समय

एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में किया जाता है। पंचांग के मुताबिक इस बार 16 मार्च को सुबह 9 बजकर 30 मिनट के बाद व्रत पारण किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता है कि व्रत के साथ उसका सही समय पर पारण करना भी जरूरी माना जाता है। द्वादशी तिथि पर सुबह विष्णु-लक्ष्मी की पूजा करें। जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं, इसके बाद स्वयं भोजन करें। इस तरह एकादशी व्रत पूरा होता है।

एकादशी व्रत से लाभ

पापमोचिनी एकादशी व्रत से साधक को कई तरह से लाभ मिलाता है। मान्यता है कि व्रत करने से भक्त को पाप कर्मों से मुक्ति मिलती है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। कहते है ंकि जो व्यक्ति पापमोचिनी एकादशी का व्रत करता है, उसे गाय दान करने के बराबर पुण्य मिलता है।

एकादशी पर क्या करें दान

पापमोचिनी एकादशी पर दान का विशेष महत्व होता है। इस दिन साधकों को तिल, कपड़े, नमक, गुड़ और घी का दान करना चाहिए। इसके अलावा जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना चाहिए। किसी गोशाला में गायों की देखभाल के लिए धन का दान करना चाहिए। पक्षियों के लिए अनाज और पानी की व्यवस्था करनी चाहिए।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

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