पंचक में क्यों नहीं करना चाहिए शव का अंतिम संस्कार, किस उपाय को करके इस दोष से बच सकते हैं

Anuradha Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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panchak mein kyun nahi: पंचक में शव का अंतिम संस्कार नहीं करना चाहिए. इसके अलावा भी इन पांच दिनों में कुछ कार्यों को करने की मनाही है। इसलिए इस तरह का काम ना करें।

पंचक में क्यों नहीं करना चाहिए शव का अंतिम संस्कार, किस उपाय को करके इस दोष से बच सकते हैं

panchak mein kya na karein: आपको बता दें कि 6 जून से पंचक लग रहे हैं। पंचक के बारे में जानना क्यों जरूरी है। और पंचक क्या है, इसके बारे में आपको जानकारी होनी चाहिए। पहले बात करते हैं पंचक के बारे में। धनिष्ठा, उत्तरार्ध, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र को पंचंक कहते हैं। पंचक शुभ समय नहीं होता है, इसलिए इस समय में अच्छे कार्य नहीं करने चाहिए। इसमें कुछ कार्यों के बारे में बताया गया है, जो पंचक में नहीं किए जाते हैं।

किन कार्यों को पंचक में नहीं किया जाता है?

धनिष्ठा आदि पांच नक्षत्रों में शव को श्मशान नहीं ले जाना चाहिए। इसके अलावा इस दौरान शव का दाह संस्कार नहीं किया जाता है। पंचक से पहले कोई मरा हो लेकिन पंचक में आप उसे शमशान नहीं ले जा सकते हैं। ऐसा कहा जाता है कि जो इस दौरान मना किए गए कामों को करता है, उसे उसकी पुनर्वात्ति करनी पड़ती है। इस दौरान गृह का छेदन, लकड़ी का संग्रह, दक्षिण दिशामें यात्रा और रस्सी से चारपाई की बुनाई नहीं करनी चाहिए। अपने घर में छट या चौखट डलवाना भी नहीं चाहिए। इन कामों में पंचक के दौरान मनाही बोती है। चन्द्रमा कुंभ और मीन में हो तो अर्थात्‌ धनिष्ठा से रेवतीतक नक्षत्र में हो तो किसी भी हालत में शव का जलाना, शय्या (खाट, चटाई, पलंग आदि)-का बुनना, घर में गंभे डालना या गाड़ना, दक्षिण दिशा को यात्रा करना, लकड़ी को जलाना या एकत्र करना नहीं चाहिए।

अगर पंचक में किसी की मृत्यु हई है तो क्या कर सकते हैं दोष निवारण?

अगर पंचक में किसी की मृत्यु हई है को पंचक शांन्ति करनी चाहिए। कई धार्मिक किताबों में लिखा है कि भले ही किसी ती मृत्यु पंचकके पहले हो गई हो और लेकिन दाह पंचक में होना हो तो 5 पुतला दाह का विधान है। । इसके विपरीत अगर पंचक में मृत्यु हो गई हो और दाह पंचक के बाद हुआ हो तो पंचकशान्ति कर्म करना चाहिए।

पंचक शान्ति इसलिए जरूरी है क्योंकि इसका असर पारिवार लोगों पर भी पड़ता है। इसके लिए कुशों की पांच प्रतिमा बनाकर सूत्र से जौ के आटे की पीठी से उसका लेपनकर उन प्रतिमाओं के साथ शव का दाह करना चाहिए।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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शार्ट बायो

अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


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अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।


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