कल अमावस्या से लगेगा पंचक, 5 दिनों तक भूलकर भी ना करें ये काम

Feb 16, 2026 04:00 pm ISTNavaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
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फाल्गुन अमावस्या इस साल 17 फरवरी 2026 को पड़ रही है। पंचांग के अनुसार, इसी दिन सुबह 09:05 बजे से पंचक प्रारंभ हो जाएगा, जो 21 फरवरी, दिन - शनिवार, शाम 07:07 बजे तक चलेगा। यह पंचक अग्नि पंचक के रूप में शुरू हो रहा है।

कल अमावस्या से लगेगा पंचक, 5 दिनों तक भूलकर भी ना करें ये काम

फाल्गुन अमावस्या इस साल 17 फरवरी 2026 को पड़ रही है। पंचांग के अनुसार, इसी दिन सुबह 09:05 बजे से पंचक प्रारंभ हो जाएगा, जो 21 फरवरी, दिन - शनिवार, शाम 07:07 बजे तक चलेगा। यह पंचक अग्नि पंचक के रूप में शुरू हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र में पंचक को अशुभ काल माना जाता है। इस दौरान कुछ खास कार्य करने से बाधाएं, विलंब और हानि की संभावना बढ़ जाती है। नारद संहिता, बृहत् पराशर होरा शास्त्र और अन्य ग्रंथों में भी पंचक में कुछ कार्यों से परहेज करने की सलाह दी गई है। आइए जानते हैं पंचक क्या है, इसके प्रकार और इन 5 दिनों में किन कामों से बचना चाहिए।

पंचक क्या है और यह कब लगता है?

जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में प्रवेश करते हुए धनिष्ठा नक्षत्र के उत्तरार्ध से लेकर शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती नक्षत्रों से गुजरता है, तब पंचक लगता है। ये कुल पांच नक्षत्र हैं, इसलिए इसे पंचक कहते हैं। यह अवधि सामान्यतः 5 दिन की होती है। पंचक में किए गए कुछ कार्यों का फल उल्टा या विलंब से मिलता है, इसलिए शास्त्रों में इन दिनों में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

पंचक के 5 प्रकार

पंचक शुरू होने वाले दिन के आधार पर इसके 5 प्रकार होते हैं:

  • अग्नि पंचक (मंगलवार से शुरू) - अग्नि से जुड़े कार्यों में सबसे अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।
  • नाग पंचक (बुधवार से शुरू) - सर्प दोष या सर्प से संबंधित बाधाएं बढ़ सकती हैं।
  • मृत्यु पंचक (गुरुवार से शुरू) - स्वास्थ्य और आयु से जुड़ी सावधानी जरूरी।
  • काल पंचक (शुक्रवार से शुरू) - समय और भाग्य से जुड़े कार्यों में रुकावट।
  • रोग पंचक (शनिवार से शुरू) - रोग और स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती हैं।

फरवरी 2026 का पंचक अग्नि पंचक है, इसलिए आग, बिजली, मशीनरी और निर्माण से जुड़े कार्यों में विशेष सतर्कता बरतें। इस समय कोई भी नया निर्माण कार्य, भवन निर्माण, छत डालना या अग्नि से संबंधित कार्य शुरू करने से बचना चाहिए। यदि अनजाने में कोई कार्य शुरू हो गया हो तो उसे जल्द से जल्द रोक देना बेहतर है।

पंचक में किन 5 कामों से बचना चाहिए?

  1. लकड़ी घर में लाना – पंचक में बाहर से लकड़ी, ईंधन या निर्माण सामग्री घर लाना अशुभ माना जाता है। इससे घर में अशांति या आर्थिक हानि हो सकती है।
  2. चारपाई या पलंग बनवाना/बुनना – इस दौरान नई चारपाई बुनना, पुरानी चारपाई खोलना या पलंग बनवाना वर्जित है। ऐसा करने से घर में नींद संबंधी परेशानी या पारिवारिक कलह बढ़ सकती है।
  3. घर की छत डालना या निर्माण कार्य शुरू करना – पंचक में छत डालने, मकान की नींव रखने या बड़े निर्माण कार्य शुरू करने से बचना चाहिए। इससे निर्माण कार्य में रुकावट या दुर्घटना का खतरा रहता है।
  4. रंगाई-पुताई या बड़े मरम्मत कार्य – घर की रंगाई, पुताई या बड़े स्तर पर मरम्मत का काम पंचक में नहीं करना चाहिए। इससे घर में अशांति या स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो सकती है।
  5. अग्नि से जुड़े कार्य – अग्नि पंचक में फैक्ट्री, मशीन, भट्टी या अग्नि से संबंधित नए कार्य शुरू करने से बचें। इससे आग लगने या मशीनरी खराब होने का भय रहता है।

पंचक में क्या कर सकते हैं और क्या नहीं?

पंचक में सभी कार्य वर्जित नहीं होते हैं। साधारण दैनिक कार्य, पूजा-पाठ, दान-पुण्य और यात्रा की जा सकती है। इस दौरान भगवान शिव, विष्णु या हनुमान जी की पूजा करना शुभ रहता है। पंचक में कोई भी नया कार्य शुरू करने से पहले किसी ज्योतिषी से सलाह लेना उचित है। अगर कोई कार्य अनिवार्य है, तो उसका शुभ मुहूर्त देखकर या नक्षत्र शांति पूजा कराकर किया जा सकता है। पंचक का समय सतर्कता का है, ना कि भय का।

पंचक में सावधानी बरतने से जीवन में अनावश्यक परेशानियां कम होती हैं। फरवरी 2026 में 17 से 21 फरवरी तक पंचक रहेगा। इस दौरान ऊपर बताए गए कार्यों से बचें।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Navaneet Rathaur

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नवनीत राठौर नए युग के डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में करीब 7 साल का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन के हिस्सा हैं। यहां वह अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष से जुड़ी खबरें लिखते हैं।


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नवनीत ने शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा से जनसंचार एवं पत्रकारिता में स्नातक और शुभारती विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।


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