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यहां निशान होने से व्‍यक्‍ति को होती हैं कई समस्‍याएं

मंगल का प्रभाव कुंडली और हाथ दोनों में होता है। पं.शिवकुमार शर्मा के अनुसार यदि उच्‍च का मंगल बुध पर्वत की ओर खिसका हो तो ऐसे जातक उग्र स्वभाव के होते हैं। वे खुद को हमेशा एक कुशल योद्धा समझते हैं। इसके कारण ऐसे व्‍यक्‍ति के शरीर की जीवन में कभी भी चीरफाड हो सकती है और अत्याधिक मात्रा में रक्त भी बह सकता है। मंगल पर्वत से निकलकर यदि कोई रेखा जीवनरेखा तक पहुंचे तो वह रेखा जहां जीवन रेखा को काट रही हो उस समय तथा उम्र में किसी दुर्घटना अथवा लड़ाई में अपने शरीर का कोई अंग भी गंवा सकता है। दुर्घटना में ऐसे व्‍यक्‍ति के अंग-भंग की आशंका बनी रहती है। इसके अतिरिक्त मंगल पर्वत पर कोई क्रास का निशान या द्वीप होना जातक को सिरदर्द, थकान और गुस्से जैसी समस्याएं दे सकता है।

मंगल पर्वत पूरी तरह विकसित नहीं होने की स्‍थिति में व्‍यक्‍ति डिप्रेशन का मरीज होता है। यदि मगंल के उस पर्वत से कोई रेखा चंद्र पर्वत तक जाए तो ऐसा जातक निर्णय लेने में विलंब तथा लगातार अनियमित कार्य करने का आदी होता है। यह मंगल पर्वत यदि चंद्र पर्वत से दबा हो तो उसे सफलता ना मिलने के कारण चिड़चिड़ापन भी होता है। इस पर्वत पर कोई अशुभ चिह्न व्यक्ति को आर्थिक मुसीबतों और पारिवारिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है और उसकी वाणी प्रभावित होती है।

(इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। ये जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं  पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया  गया है।)

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