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क्रोध एवं घृणा को छुपा नहीं पाते ऐसे लोग

व्‍यक्‍ति की हथेली में शनि रेखा का असर उसके व्‍यक्‍तित्‍व पर दिखाई देता है। शनि के प्रभाव के चलते ना केवल व्‍यक्‍ति के शारीरिक गठन पर असर पड़ता है बल्‍कि उसके व्‍यवहार भी प्रभावित होता है। पं.अभि भारद्वाज के अनुसार हस्तरेखा में मध्यमा अंगुली के नीचे शनि पर्वत का स्थान है। यह पर्वत बहुत भाग्यशाली मनुष्यों के हाथों में ही विकसित अवस्था में मिलता है। शनि की शक्ति का अनुमान मध्यमा की लम्बाई और गठन में देखकर ही लगाया जा सकता है। मध्यमा अंगुली को भाग्य की देवी माना गया है है। भाग्यरेखा की समाप्ति प्रायः इसी अंगुली की मूल में होती है। पूर्ण विकसित शनि पर्वत वाला मनुष्य प्रबल भाग्यवान होता है। ऐसे मनुष्य जीवन में अपने प्रयत्नों से बहुत अधिक उन्‍नति प्राप्‍त करते हैं। शनि पर्वत प्रधान व्‍यक्‍ति, इंजीनियर, वैज्ञानिक, जादूगर, साहित्‍यकार, ज्‍योतिषी और बड़े कृषक होते हैं।

यदि शनि रेखा लम्बी और सीधी है तथा गुरु और शुक्र की अंगुलियां उसकी ओर झुक रही हैं तो मनुष्य के स्वभाव और चरित्र में शनिग्रहों के गुणों की प्रधानता हो जाती है। पं. अभि भारद्वाज के अनुसार शनि ग्रह से प्रभावित मनुष्य के शारीरिक गठन को बहुत आसानी से पहचान हो जाती है। ऐसे मनुष्य कद में असामान्य रूप में लम्बे होते हैं। उनका शरीर सुसंगठित लेकिन सिर पर बाल कम होते हैं। लम्बे चेहरे पर अविश्वास और संदेह से भरी उनकी गहरी और छोटी आंखें हमेशा उदास रहती हैं। यद्यपि उत्तोजना, क्रोध और घृणा को वह छिपा नहीं पाते। इस पर्वत के अभाव होने से मनुष्य अपने जीवन में अधिक सफलता या सम्मान नहीं प्राप्त कर पाता।

(इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं तथा इन्हें अपनाने से अपेक्षित परिणाम मिलेगा। जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।)

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