Padmini Ekadashi vrat katha:आज पढ़ें अधिकमास की पद्मिनी एकादशी व्रत कथा, मां लक्ष्मी शिवशर्मा के बेटेपर हुईं थी प्रसन्न
padmini ekadashi vrat katha in hindi: अधिकमास में पद्मिनी एकादशी का व्रत किया जाता है, इसे कमला एकादशी भी कहते हैं। आज अगर व्रत रख रहे हैं तो यहां पढ़ें इस व्रत की कथा, यह 3 साल में एक बार आती है।

पद्मिनी एकादशी 3 साल में एक बार आती है। इस साल ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष पर पद्मिनी एकादशी कही जाती है। इस एकादशी के बारे में युधिष्ठिर ने पूछा था और भगवान श्री कृष्ण ने सवाल का जवाब दिया था। इस एकादशी का व्रत रखने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। इस साल पद्मिनी एकादशी 27 मई को मनाई जा रही है। आप भी इस व्रत रखें और यहां कथा पढ़ें, कथा इस प्रकार है-
युधिष्ठिर ने पूछा -पुरुषोत्तम मासकी एकादशी की कथा कहिये, उसका क्या फल है ? और उसमें किस देवताका पूजन किया जाता है? किस दानका क्या पुण्य है? मनुष्योंको क्या करना चाहिए ? उस समय कैसे स्त्रान किया जाता है ? किस मन्त्रका जप होता है ? कैसी पूजन-विधि बतायी गयी है ? इस प्रकार युधिष्ठिर ने भगवान से अधिकमास के एकादशी के व्रत की कथा सुनने की प्रार्थना की। भगवान ने कथा सुनाई -अब में श्रीविष्णु के ब्रतों में उत्तम व्रत का वर्णन कर रहा हूं, जो सब पापोंको हर लेने वाला और मनुष्यों की हर इच्छा को पूरा देनेवाला हो। उन्होंने बताया कि अधिक मास आनेपर जो एकादशी होती है, वह कमला' नाम से प्रसिद्ध है, इसे पद्मिनी एकादशी भी कहते हैं। ऐसा कहा जाता है कि जो इस व्रत को करता है, उससे मां लक्ष्मी प्रसन्न् रही हैं। इस दिन व्रत करें और एकादशी व्रत के नियमों को पूरे दिन मानें।
अवन्तीपुरी में शिवशर्मा नामक एक श्रेष्ठ ब्राह्मण रहते थे, उनके पांच पुत्र थे। इनमें जो सबसे छोटा था, वह बहुत पाप करता था। इसलिए उसके पिता और परिवार ने उससे नाता तोड़ लिया था। अपने बुरे कर्मेों के कारण लोगों ने उसे गांव से निकाल दिया, तो वह जंगल में जाकर रहने लगा। दैवयोगसे एक दिन वह तीर्थराज प्रयागमें जा पहुंचा। भूख से दुर्बल शरीर और दीन मुख लिए उसने त्रिवेणी में स्नान किया । फिर भुख से पीड़ित होकर वह वहां मुनियों के आश्रम देखने लगा। इतने में उसे वहां हरिमित्र मुनिका उत्तम आश्रम था। पुरुषोत्तम मास में वहां बहुत-से लोग आए थे। आश्रम पर ब्राह्मणों के मुखसे उसने कमला एकादशी की महिमा सुनी, जो परम पुण्यमयी तथा भोग और मोक्ष प्रदान करनेवाली है।
जयशर्मा ने विधिपूर्वक कमला एकादशी की कथा सुनकर उन सबके साथ मुनि के आश्रमपर ही ब्रत किया। जब आधी रात हुई तो भगवती लक्ष्मी उसके पास आकर बोलीं- ब्राह्मण कमला एकादशीके व्रत के प्रभाव से मैं तुम पर बहुत प्रसन्न हूं और श्रीहरि की आज्ञा पाकर वैकुण्ठधाम से आईं हूं। तुम्हें क्या वर चाहिए? ब्राह्मण बोला-माता लक्ष्मी! अगर आप आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो वह व्रत बताएं, जिसकी कथा-वार्ता में साधु-ब्राह्मण करते हैं।
लक्ष्मीने कहा-एकादशी का माहात्म्य श्रोताओं के सुनने के लिए बहुत उत्तम है। इससे दुःस्वप्र का नाश तथा पुण्य की प्राप्ति होती है, अतः इसका सुनना करना चाहिए। उत्तम पुरुष श्रद्धा से युक्त हो एक या आधे इलोक का पाठ करने से भी करोड़ों पापों का नाश होता है और मनुष्य तत्काल मुक्त हो जाता है। समस्त देवता आज भी एकादशी व्रत के ही लालच में धरती पर जन्म ले रहे हैं। जो लोग मेरे प्रभु नारायण के नामका सदा भक्तिपूर्वक जप करते हैं, उनकी ब्रह्मा आदि देवता सर्वदा पूजा करते हें। जो लोग श्रीहरि के नाम-जप उनके कीर्तन, और उनकी लीलाकथाओं के में तत्पर हैं, उन्हें श्रीहरि मिलते हैं। इस इस प्रकार वह बोला -मैं एकादशीको निराहार रहकर दूसरे दिन भोजन करूंगा। आप मुझे शरण दें । कथा समाप्त
इस तरह जो व्रत करता है, उसकी इंद्रियां वश में रहती हैं। शाम के समय गीत, वाद्य, नृत्य ओर पुराण-पाठ आदि के द्वारा रात्रिमें भगवान के समक्ष जागरण करें। फिर द्वादशीके दिन श्रीविष्णुकी पूजा करें। एकादशी को पश्चामृत से जनार्दनको नहलाकर द्वादशीको केवल दूध में स्नान कराने से श्रीहरि मिल जाते हैं। इस प्रकार देवताओं के स्वामी श्रीहरि से निवेदन करके भत्तिपूर्वक ब्राह्मणोंको भोजन कराएं और उसे दक्षिणा दें। अपने परिवार के साथ भोजन करें । इस प्रकार जो शुद्ध भावसे पुण्यमय एकादशीका ब्रत करता है, वह पुनरावत्तिसे रहित बैकुण्ठधामको प्राप्त होता है।
इस प्रकार बातों को सुनकर वह बोला, मैं अज्ञानी हूं, आपने मुझे इस व्रत का फल बताया,मैं धन्य हो गया । भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा कि ऐसा कहकर लक्ष्मीदेवी उस ब्राह्मणको वरदान देकर अन्तर्धान हो गयीं । फिर वह ब्राह्मण भी धनी होकर पिता के घरपर आ गया। इस प्रकार जो 'कमला' का उत्तम ब्रत करता हे तथा एकादशीके दिन इसका माहात्म्य सुनता है, वह सब पापोंसे मुक्त हो जाता है। उस पर मां लक्ष्मी की भी कृपा रहती हैं।
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Anuradha Pandeyशार्ट बायो
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