पांचवे सावन सोमवार पर भद्रा की छाया 7 घंटे से भी ज्यादा, जानें किस टाइम पूजा अति उत्तम रहेगी
- Sawan Monday Muhurat for Shiva Pooja : आज सावन का आखिरी व पांचवा सोमवार कई शुभ योग में पड़ रहा है। गौर करने वाली बात यह रहेगी की सुबह से ही भद्रा भी लग रही है और राहुकाल का साया भी रहने वाला है।

19 अगस्त के दिन सावन के पांचवे सोमवार का व्रत पड़ रहा है। यह पांचवा सावन का सोमवार 3 शुभ योग में पड़ रहा है। सावन के सोमवार के दिन कई शुभ और अशुभ योगों का निर्माण हो रहा है। वहीं, ध्यान रखने वाली बात यह है ही सुबह से ही भद्रा का साया मंडराने वाला है साथ ही 7 बजे से राहुकाल भी लग रहा है। ऐसे में शिव के भक्तों में कन्फ्यूजन बनना तो नॉर्मल है की आखिर पूजा किस वक्त करना सही रहेगा। इस 5वें सावन सोमवार पर भद्रा की छाया लगभग 7 घंटे 40 मिनट तक रहने वाली है। ऐसे में आइए जानते हैं शिव पूजन के उत्तम मुहूर्त और भद्रा के उपाय-
पांचवे सोमवार पर कब करें शिव की पूजा?
दृक पंचांग के अनुसार, सावन के पांचवे सोमवार के दिन सुबह 7 बजकर 31 मिनट से राहुकाल लग रहा है, जो 9 बजकर 08 मिनट पर खत्म हो जाएगा। वहीं, इस दिन सुबह 05:53 बजे से लेकर दोपहर 01:35 मिनट तक भद्रा रहने वाली है। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:25 से शुरू हो जाएगा। ऐसे में शिव भक्तों के लिए राहुकाल से पहले यानि 7 बजकर 31 मिनट से पूर्व पूजन कर लेना बेहद उत्तम साबित हो सकता है। लेकिन बाद में भी पूजा कुछ शुभ मुहूर्त में की जा सकती है। आप अभिजित मुहूर्त- 11:58 ए एम से 12:51 पी एम और अमृत काल 08:24 पी एम से 09:50 पी एम (राहुकाल 9:08 पर समाप्त होगा, उसके पश्चात पूजा करना शुभ होगा) के समय पूजा कर सकते हैं। ध्यान रखें शाम 7 बजे से पंचक भी लगने वाला है।
भद्राकाल में क्या नहीं करना चाहिए?
भद्राकाल के समय किसी भी शुभ कार्य करने की मनाही होती है। भद्रा के समय विवाह, त्योहारों की मुख्य पूजा, नया व्यापार, मुंडन संस्कार, ग्रह प्रवेश आदि शुभ-मांगलिक काम वर्जित माने जाते हैं।
भद्राकाल के बुरे प्रभाव से कैसे बचें?
भद्रा के 12 नामों यानि भद्रा, धन्या, विष्टि, दधिमुखी, कालरात्रि, महामारी, खरानना, भैरवी, असुरक्षयकरी, महाकाली, महारुद्रा और कुलपुत्रिका का जाप करने से भद्रा का बुरा प्रभाव कम हो सकता है।
क्या पांचवे सोमवार पर भद्राकाल में पूजा होगी?
मन्यताओं के अनुसार, जब चंद्रमा कर्क राशि, सिंह राशि, कुंभ राशि या मीन राशि में होता है, तब पृथ्वी पर भद्रा का वास माना जाता है। पांचवे सावन सोमवार पर चंद्र देव मकर राशि में विराजेंगे लेकिन शाम 7 बजे के बाद कुंभ राशि में प्रवेश कर जाएंगे। भद्रा का साया सिर्फ दोपहर तक रहेगा। ऐसे में भद्रा का निवास पृथ्वी लोक पर मान्य नहीं होगा। कहा जाता है की भद्रा का प्रभाव उसी लोक पर पड़ता है, जिस लोक में वह रहती है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Shrishti Chaubeyसंक्षिप्त विवरण
सृष्टि चौबे पत्रकारिता जगत में 4 वर्षों का अनुभव रखती हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर कार्यरत हैं। वह ज्योतिष, ग्रह गोचर, राशिफल, नक्षत्र परिवर्तन, अंकज्योतिष, रत्न, और वास्तु से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। पाठक-केंद्रित व आसान भाषा में जानकारी पेश करना इनके लेखन की पहचान है। धार्मिक ग्रंथों को पढ़कर लोगों तक सही जानकारी पहुंचाना और उन पर शोध करना इनकी विशेष पसंद है।
विस्तृत बायो
परिचय और अनुभव
सृष्टि पिछले ढाई साल से लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। ज्योतिष से जुड़े किसी भी टॉपिक को पाठकों तक आसान, प्रामाणिक और आकर्षक भाषा में पहुंचाना, सृष्टि बखूबी जानती हैं। डिजिटल मीडिया में काम करते हुए सृष्टि ने रीडर बिहेवियर,बदलते कंटेंट फॉर्मेट पर अच्छी पकड़ हासिल की है। पाठकों की रुचियों व जरूरतों को समझते हुए वे फैक्ट आधारित उपयोगी जानकारी पहुंचाने की कोशिश करती हैं।
अपने करियर की शुरुआत इन्होंने हिन्दी दैनिक समाचार पत्र से की। इसके बाद इन्होंने डिजिटल मीडिया में कदम रखा। सृष्टि वेब स्टोरी, यूट्यूब शॉर्ट्स व इंस्टाग्राम रील्स जैसे विभिन्न डिजिटल स्टोरीटेलिंग फॉर्मेट का अनुभव रखती हैं। मनोरंजन, खेल व सेहत पर अच्छी पकड़ के साथ अब सृष्टि ज्योतिष और धार्मिक विषयों को कवर कर अपनी पहचान बना रही हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
सृष्टि ने जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। पोस्ट ग्रेजुएशन के दौरान बतौर संपादक इन्होंने कैम्पस समाचार पत्र प्रकाशित किया, लाइव रिपोर्टिंग की। डाटा स्टोरी और फैक्ट चेकिंग की भी अच्छी समझ रखती हैं। सामाजिक मुद्दे पर डॉक्यूमेंट्री भी बना चुकी हैं।
एस्ट्रोलॉजी लेखन और दृष्टिकोण
सृष्टि का मानना है कि एस्ट्रोलॉजी का उद्देश्य फैक्ट आधारित उपयोगी जानकारी को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाना है। इनका फोकस रहता है कि ज्योतिषीय जानकारी को आसान भाषा में रचनात्मक तरीके से पेश करें।
व्यक्तिगत रुचियां
सृष्टि को ट्रैवल करना, किताबें पढ़ना, म्यूजिक सुनना, लिखना और नई चीजें सीखने का शौक है। इनका मानना है कि पर्सनल ग्रोथ के लिए खुद को अपडेट रखना चाहिए।
विशेषज्ञता
राशिफल
साप्ताहिक राशिफल
ग्रह गोचर
नक्षत्र परिवर्तन
अंकज्योतिष
व्रत-त्योहार, पूजा-विधि
रत्न विज्ञान
ज्योतिषीय उपाय
वास्तु शास्त्र
हस्तरेखा


