
2 दिसंबर को भौम प्रदोष व्रत, पढ़ें प्रदोष व्रत की कथा और शिव जी की आरती
Pradosh Katha in hindi: इस साल 02 दिसंबर, 2025 के दिन मंगलवार को मार्गशीर्ष माह के भौम प्रदोष का व्रत रखा जाएगा। भौम प्रदोष का व्रत बिना कथा सुनें या कहे अधूरा माना जाता है। इसलिए जरूर पढें भौम प्रदोष की व्रत कथा-
Bhaum Pradosh Vrat Katha: इस साल मार्गशीर्ष महीने के शुक्ल पक्ष का प्रदोष व्रत 2 दिसंबर के दिन रखा जाएगा। मंगलवार का प्रदोष व्रत भौम प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। इस दिन व्रत रखा हो या नहीं पूरी श्रायद्ध के साथ भगवान शिव की पूजा और प्रदोष व्रत की कथा सुनना बेहद लाभकारी माना जाता है। इससे जीवन के दुख-दर्द दूर हो सकते हैं। आगे पढ़ें भौम प्रदोष व्रत की कथा और शिव जी की आरती-
2 दिसंबर को भौम प्रदोष व्रत, पढ़ें प्रदोष व्रत की कथा और शिव जी की आरती
प्राचीन काल की बात है। एक नगर में एक अत्यंत गरीब ब्राह्मण परिवार निवास करता था। ब्राह्मण की पत्नी और उनका एक पुत्र था। दरिद्रता इतनी थी कि वे बड़ी मुश्किल से अपना जीवन यापन कर पाते थे।
एक दिन, ब्राह्मण की पत्नी ने पुत्र को अपने नाना के यहां भेजने का निश्चय किया। पुत्र अपने नाना के घर गया और वहां खुशी-खुशी रहने लगा।
इधर, ब्राह्मण की पत्नी स्वयं हर मंगलवार को आने वाले भौम प्रदोष व्रत का विधि-विधान से पालन करने लगी। वह व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती और उनसे अपनी दरिद्रता दूर करने की प्रार्थना करती।
एक बार, व्रत के प्रभाव से और शिव-पार्वती की कृपा से, माता पार्वती ने उस स्त्री का दुख दूर करने का विचार किया। उन्होंने एक वृद्धा का रूप धारण किया और उस ब्राह्मणी के घर पहुंचीं।
वृद्धा ने ब्राह्मणी से कहा, "पुत्री, मैं जानती हूं कि तुम बहुत कष्ट में हो। तुम अपने पुत्र को लेकर पास के शिव जी के मंदिर में जाओ। वहां जाकर पुत्र से कहो कि वह मंदिर में सफाई करे।"
ब्राह्मणी को वृद्धा की बात पर कुछ संशय हुआ, पर वृद्धा के आग्रह पर उसने अपने पुत्र को नाना के घर से वापस बुलाया और उसे शिव जी के मंदिर में सफाई करने को कहा।
पुत्र नियमित रूप से मंदिर में जाकर मन लगाकर सफाई करने लगा। एक दिन, सफाई करते-करते पुत्र को मंदिर में एक स्वर्ण कलश मिला। वह उसे लेकर अपनी माता के पास आया।
माता को जब यह पता चला कि पुत्र को मंदिर में सफाई करते हुए स्वर्ण कलश मिला है, तो उसे यह समझते देर न लगी कि यह सब भौम प्रदोष व्रत के पुण्य और भगवान शिव की कृपा का फल है।
गरीब परिवार की दरिद्रता दूर हो गई। उन्होंने उस धन का सदुपयोग किया और एक सुखी तथा समृद्ध जीवन व्यतीत करने लगे। उन्होंने यह भी प्रण लिया कि वे आजीवन हर मंगलवार को आने वाले भौम प्रदोष व्रत का पालन करते रहेंगे।
शिव जी की आरती
जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव…॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव…॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखता त्रिभुवन जन मोहे॥ ॐ जय शिव…॥
अक्षमाला बनमाला मुण्डमाला धारी।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी॥ ॐ जय शिव…॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥ ॐ जय शिव…॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥ ॐ जय शिव…॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥ ॐ जय शिव…॥
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी॥ ॐ जय शिव…॥
त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय शिव…॥
जय शिव ओंकारा हर ॐ शिव ओंकारा
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव ओंकारा…॥
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।





