अंक ज्योतिष: किस मूलांक के लोगों को पहनना चाहिए नीलम रत्न? जानिए नियम

Jan 27, 2026 04:14 pm ISTDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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रत्न शास्त्र में कई तरह के रत्नों का जिक्र मिलता है, जो बेहद प्रभावशाली हैं। इन्हीं में से एक रत्न है नीलम। हालांकि नीलम हर किसी को सूट करे, यह जरूरी नहीं है। लेकिन कुछ मूलांक के लोगों को इसे धारण करना शुभ होता है। चलिए आजनते हैं कि किन मूलांक के लोगों को नीलम रत्न पहनना चाहिए।

अंक ज्योतिष: किस मूलांक के लोगों को पहनना चाहिए नीलम रत्न? जानिए नियम

अंक शास्त्र में सभी मूलांक का विशेष महत्व है। अंक ज्योतिष के मुताबिक हर एक मूलांक का संबंध अलग-अलग ग्रहों और नक्षत्रों से है। ग्रहों के कमजोर और मजबूत होने का असर व्यक्ति के जीवन पर पड़ता है। ग्रहों के प्रभाव को नियंत्रित करने के लिए लोग अलग-अलग प्रकार के रत्न धारण करते है। रत्न शास्त्र में कई तरह के रत्नों का जिक्र मिलता है, जो बेहद प्रभावशाली हैं। इन्हीं में से एक रत्न है नीलम। हालांकि नीलम हर किसी को सूट करे, यह जरूरी नहीं है। लेकिन कुछ मूलांक के लोगों को इसे धारण करना शुभ होता है। चलिए आजनते हैं कि किन मूलांक के लोगों को नीलम रत्न पहनना चाहिए।

मूलांक 4 के लिए शुभ है नीलम रत्न
ध्यान रखें कि कोई भी रत्न धारण करने से पहले किसी जानकार ज्योतिषि से जरूर परामर्श लें। बात नीलम रत्न की करें, तो मूलांक 4 के लिए नीलम रत्न को शुभ माना जाता है। अंक ज्योतिष के अनुसार 4, 13, 22 या 31 तारीख को जन्मे लोगों का मूलांक 4 होता है। इस मूलांक का ग्रह स्वामी राहु है। वहीं, नीलम रत्न राहु ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में मूलांक 4 के लोगों के लिए भाग्य और समृद्धि लाने में मदद करता है। यह रत्न करियर और व्यवसाय में सफलता दिलाने में मदद करता है। नीलम रत्न पहनने से धन और समृद्धि में वृद्धि होती है।

कैसे होते हैं मूलांक 4 के लोग
अंक ज्योतिष के मुताबिक मूलांक 4 के लोग व्यावहारिक, मेहनती और अनुशासित होते हैं। वे अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए दृढ़ संकल्पित होते हैं और उनके पास मजबूत इच्छाशक्ति होती है। इस मूलांक के जातक समय को लेकर बेहद पाबंद रहते हैं। साथ ही यह बड़े ही वफादार भी होते हैं।

मूलांक 4 वालों को कब पहनना चाहिए नीलम रत्न
- नीलम रत्न पहनने के लिए सबसे अच्छा दिन शनिवार को माना जाता है। क्योंकि यह शनि ग्रह से भी संबंधित है।
- शनिवार की शाम या रात का समय नीलम पहनने के लिए सबसे उत्तम है।
- इस रत्न को पंचधातु, चांदी या प्लैटिनम में जड़वाकर पहनना चाहिए।
- नीलम रत्न को मध्यमा उंगली यानी कि बीच वाली उंगली में पहनना चाहिए।
- इसे पहनने से पहले इसे गंगाजल या कच्चे दूध से शुद्ध करना चाहिए।
- नीलम रत्न को धारण करते समय शनिदेव के मंत्रों का जाप करना चाहिए।

नीलम रत्न पहनने के लाभ
- करियर और कारोबार में खूब तरक्की मिलती है।
- नीलम पहनने से आत्मविश्वावस बढ़ता है।
- मानसिक शांति और तनाव कम होता है।
- नीलम रत्न पहनने से शनि की साढ़ेसाती का दुष्प्रभाव भी कम होता है।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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लेखक के बारे में

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संक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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परिचय और अनुभव

धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
ग्रह और नक्षत्रों का असर
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