
न्यूमेरेलॉजी: इन तारीखों पर जन्मे लोगों के लिए लकी होता है मूंगा, जानें पहनने का तरीका
आप अपने मूलांक के हिसाब से भी रत्न धारण कर सकते हैं। आज जानेंगे कि आखिर मूंगा किन-किन तारीखों पर जन्मे लोग पहन सकते हैं और साथ ही जानेंगे इसे पहनने का सही तरीका…
न्यूमेरेलॉजी यानी अंकशास्त्र में सब कुछ नंबर के इर्द-गिर्द ही घूमता है। इस शास्त्र में मूलांक के हिसाब से हर चीज का आंकलन किया जाता है। आम तौर पर रत्नों की दुनिया का संबंध ज्योतिष शास्त्र से होता है लेकिन आप मूलांक के हिसाब से भी रत्न धारण कर सकते हैं। तो आज बात करेंगे मूंगा रत्न की और जानेंगे कि आखिर किस मूलांक के लिए ये रत्न लकी साबित होता है?
इस मूलांक के लिए लकी है मूंगा
रत्न शास्त्र के नियम के अनुसार मूंगा हर मूलांक के लोगों को सूट नहीं करेगा। शास्त्र में बताया गया है कि मूंगा सिर्फ मूलांक 9 वालों के लिए लकी होता है। हालांकि राशि के अनुसार ये चीजें अलग होती हैं लेकिन रत्न शास्त्र के नियम के हिसाब से मूंगा इन लोगों को अच्छे रिजल्ट देता है। बता दें कि जिन लोगों का जन्म किसी भी महीने की 9, 18 या फिर 27 तारीख को होता है तो उनका मूलांक 9 होता है। इस मूलांक का ग्रह स्वामी मंगल ग्रह है। मंगल की वजह से ही इस मूलांक के लोग निडर होते हैं और मेहनत करने से घबराते हैं। हालांकि जिंदगी में आने वाले उतार-चढ़ाव से बचने के लिए इन्हें मूंगा पहनने की सलाह दी जाती है। खासकर मूंगा उन लोगों पर फिट बैठता है, जिनका मंगल ग्रह कमजोर होता है।
मूंगा पहनने के नियम
जब भी आपको मूंगा धारण करना हो तो सबसे पहले इसका सही तरीका जान लें। इस रत्न को अगर मंगलवार के दिन पहना जाए तो ये ज्यादा फलदायी साबित होता है। धारण करने से पहले गंगाजल और दूध से शुद्ध कर लें। शुद्धीकरण के बाद ॐ अं अंगारकाय नमः मंत्र का 108 बार जाप करते हुए इसे धारण कर लें। इसे हमेशा दाएं हाथ की अनामिका उंगली में पहना जाता है। ऐसा करने से माना जाता है कि मंगल ग्रह की ऊर्जा एक्टिव हो जाती है और ये अपना प्रभाव देना शुरू कर देता है। इस बात का ध्यान रखें कि इस रत्न को कभी भी नीलम और पन्ना के साथ भूलकर भी नहीं पहनना चाहिए। साथ ही हीरे के साथ भी इसे पहनना सही नहीं माना जाता है। अगर आपको ये चीजें एक साथ पहननी हैं तो ज्योतिष की सलाह जरूर लें।
डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए रत्नशास्त्र विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)





