Nirjala ekadashi daan: निर्जला एकादशी पर जल से घड़ा दान कैसे किया जाता है?

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Nirjala ekadashi Vrat: निर्जला एकादशी व्रत कर रहे हैं तो इस व्रत का दान करना भी जरूरी है। इस व्रत में किन चीजों का दान किया जाता है, यहां आप पढ़ सकते हैं।

Lord Vishnu

ज्येष्ठ माह के दिन बड़े होते हैं ऐसे में एकादशी के दिन निर्दजा एकादशी का व्रत किया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जो निर्जला एकादशी का व्रत करता है, वो सभी एकादशी का फल पा लेता है। इस दिन किस चीज का दान करना उत्तम है। निर्जला एकादशी के दिन अन्न, छतरी ,पंखी तथा फल आदि का दान करना चाहिए। लेकिन घड़े का दान सबसे अधिक बड़ा बताया गया है। ऐसा कहाजाता है कि दो व्यक्ति इस दिन निर्जल होकर व्रत रखता है और फिर घड़ा भरकर पानी का दान करता है, वो अपने जीवन में सुख समृद्धि पा लेता है। अब हम आपको बताएंगे कि जल से भरे कलश का दान कैसे करना चाहिए। इस साल निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून गुरुवार को किया जाता है।

कैसे करें जल से भरे कलश का दान

निर्जला एकादशी के दिन जल से भरे कलश का दान करने के लिए सबसे पहले मिट्टी का कलश लें। अब इसे साफ पानी से धो लें। इसमें साफ पीने का पानी भरें, उसमें कुछ चीनी डालें। इसके बाद इस दिन व्रत करने वाले को चाहिए कि वो उस कलश पर सफेद या पीला वस्त्र से ढक्कन रखें। उसके ऊपर शर्करा, चीनी रखें, पैसे मनस कर रखेंष इस पर मौसमी फल जैसे आम खरबूजा रखें। कलश पर स्वास्तिक बनाएं। इसके बाहर हल्दी भी बनाएं। तथा यथा सम्भव दक्षिणा रखकर ब्राह्मणों को संकल्प कर दान दें।

श्रीहरि की अराधना है बहुत खास

दूसरे गर्मी की अधिकता के कारण बार-बार प्यास लगती है, क्योकि इस दिन जल नहीं पिया जाता। इस लिए यह व्रत कष्ट एवं संयम-साध्य भी है। जलपान के निषिद्ध होने पर भी इस व्रत में जल दान करने का विधान है। इस एकादशी का व्रत करके यथा संभव इस दिन निर्जल व्रत करते हुए शेषशायी रूप में भगवान विष्णु की आराधना का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन विधि पूर्वक जल कलश का दान करने वालों को वर्ष भर की एकादशियों का फल प्राप्त हो जाता है।

पारण के समय भी दान करें

इसी व्रत को करके भीमसेन ने दस हजार हाथियों का बल प्राप्त कर दुर्योधन के ऊपर विजय प्राप्त की थी। यह व्रत न लोगों को नहीं करना चाहिए, जिनकी व्रत रखने की क्षमता नहीं है। पूरे दिन व्रत रखकर दूसरे दिन द्वादशी तिथि में भगवान विष्णु का पूजन करने के बाद पारणा करना चाहिए, जो इस वर्ष शुक्रवार को सूर्योदय के पश्चात् प्रातः10:00 बजे के पूर्व पारण कर सकते है。

Anuradha Pandey

लेखक के बारे में

Anuradha Pandey

शार्ट बायो

अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


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अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।


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