निर्जला एकादशी व्रत: कल दोपहर 2:42 बजे से लगेगी एकादशी तिथि, कल या परसों व्रत का मान्य कब?
Nirjala ekadashi 2026 Vrat Kis din hai: हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी व्रत का खास महत्व है। इस व्रत में अन्न और जल का त्याग किया जाता है। जानें 24 या 25 जून किस दिन एकादशी व्रत का होगा मान्य?

Nirjala ekadashi 2026 date and time: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को एकादशी व्रत किया जाता है। पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी व्रत का विधान है। निर्जला एकादशी व्रत अन्य सभी एकादशी व्रतों में श्रेष्ठ माना जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से सभी एकादशी व्रत के बराबर पुण्य मिलता है। 24 जून 2025, बुधवार को दोपहर 02 बजकर 42 पर समाप्त एकादशी तिथि प्रारंभ होगी, जिसका समापन 25 जून को होगा। एकादशी तिथि दो दिन होने के कारण लोगों के बीच निर्जला एकादशी व्रत की तारीख को लेकर भ्रम की स्थिति है। आइए जानते हैं निर्जला एकादशी व्रत का मान्य किस दिन रहेगा।
निर्जला एकादशी व्रत किस दिन होगा मान्य:
पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 24 जून 2025 को दोपहर 02 बजकर 42 मिनट पर प्रारंभ होगी, एकादशी तिथि का समापन 25 जून 2026 को शाम 04 बजकर 39 मिनट पर होगा। हिंदू धर्म में व्रत के लिए उदया तिथि उत्तम मानी जाती है। इसलिए निर्जला एकादशी व्रत का मान्य 25 जून 2026, गुरुवार को है।
निर्जला एकादशी पर बन रहे कई शुभ संयोग:
इस बार निर्जला एकादशी पर रवि योग, शिव योग और सिद्ध योग का शुभ संयोग बन रहा है। मान्यता है कि इन शुभ योगों में भगवान विष्णु के साथ मां लक्ष्मी का पूजन और जप-तप के साथ दान करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है।
निर्जला एकादशी के दिन क्या करना चाहिए:
निर्जला एकादशी के दिन विष्णुसहस्त्र का पाठ अत्यंत लाभकारी माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु को प्रिय मंत्र ओम नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का जाप करें। मान्यता है कि इस एकादशी व्रत कथा सुनने मात्र से ही समस्त पापों से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति सभी सुखों को भोगकर अंत में मोक्ष को जाता है।
निर्जला एकादशी के दिन क्या दान करना चाहिए:
निर्जला एकादशी के दिन जल दान सबसे शुभ और महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन घड़े में जल और उसमें तुलसी दल डालकर दान करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
निर्जला एकादशी व्रत का पारण कब किया जाएगा:
निर्जला एकादशी व्रत का पारण 26 जून 2026, शुक्रवार को किया जाएगा। एकादशी व्रत खोलने के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 05 बजकर 49 मिनट से सुबह 09 बजकर 03 मिनट तक रहेगा। पारण के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय शाम 06 बजकर 52 मिनट है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Saumya Tiwariसंक्षिप्त विवरण
सौम्या तिवारी लाइव हिन्दुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा हैं और इस संस्थान के साथ करीब 5 वर्षों से अधिक समय से जुड़ी हैं। इन्हें डिजिटल पत्रकारिता में करीब 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। यहां वह ग्रह राशि परिवर्तन, टैरो, वैदिक ज्योतिष, फेंगशुई, अंकराशि, रत्न शास्त्र और व्रत-त्योहार आदि से जुड़ी खबरें लिखती हैं।
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सौम्या तिवारी की ग्रह राशि परिवर्तन, व्रत-त्योहार, सामुद्रिक शास्त्र, अंकज्योतिष, वास्तु शास्त्र एवं फेंगशुई, कथा-कहानी जैसे विषयों पर अच्छी पकड़ है। उन्हें ज्योतिष एवं धार्मिक विषयों में करीब 6 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर डिप्टी कंटेंट प्रोड्यूसर कार्यरत हैं और धर्म व ज्योतिष (एस्ट्रोलॉजी) सेक्शन का हिस्सा हैं।
इसके अलावा उन्होंने मनोरंजन (एंटरटेनमेंट) और राजनीतिक (पॉलिटिक्स) विषयों पर भी विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम किया है। लाइव हिन्दुस्तान में सौम्या की टॉप परफॉर्मेंस रही है, जिसके लिए उन्हें कई बार पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। खाली समय में वह धार्मिक ग्रंथों और पुराणों का अध्ययन करना और पाठकों तक सही जानकारी पहुंचाना पसंद करती हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
सौम्या तिवारी ने कानपुर विश्वविद्यालय से स्नातक (बीए) किया है और जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से जनसंचार एवं पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा प्राप्त किया है। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान ही उन्हें हैदराबाद की लोकल न्यूज वेबसाइट इंडिलिक्स से पहली नौकरी का प्रस्ताव मिला।
इसके बाद वह जनसत्ता (द इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप), द क्विंट और जी न्यूज जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों से जुड़ी रहीं। साल 2020 में वह लाइव हिन्दुस्तान के धर्म व ज्योतिष सेक्शन का हिस्सा बनीं।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की रहने वाली सौम्या तिवारी को धार्मिक और ज्योतिषीय विषयों की जानकारी जुटाना पसंद है। इसके अलावा उन्हें नई-नई जगहों पर घूमने का भी शौक है।
विशेषज्ञता
ग्रह और नक्षत्रों का राशि पर असर
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वास्तु शास्त्र
अंक शास्त्र
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