निर्जला एकादशी 2026: गया के विष्णुपद मंदिर और देवघाट क्यों जाते हैं लोग? जानें धार्मिक महत्व

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Vishupad Mandir: निर्जला एकादशी 2026 पर गया के विष्णुपद मंदिर और देवघाट का विशेष महत्व माना जाता है। जानें इन पवित्र स्थलों से जुड़ी धार्मिक मान्यता के बारे में।

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कल 25 जून को निर्जला एकादशी है और इसे साल भर पड़ने वाली कुल 24 एकादशियों में से सबसे खास माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी एकादशियों के बराबर पुण्य मिलता है। इसी खास दिन पर देशभर से हजारों लोग बिहार के गया में स्थित विष्णुपद मंदिर और देवघाट पहुंचते हैं। गया का विष्णुपद मंदिर अपने आप में खास है और लोगों के बीच इसका खूब महत्व है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार यहां पर भगवान विष्णु के चरण चिह्न मौजूद हैं। निर्जला एकादशी पर लोग यहां पहुंचकर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं। माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा से भगवान विष्णु विशेष कृपा बरसाते हैं। देती है तथा जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

विष्णुपद मंदिर का महत्व

निर्जला एकादशी का दिन पूरी तरह भगवान विष्णु की पूजा को समर्पित होता है। ऐसे में लोग इस दिन विष्णुपद मंदिर में दर्शन करके विष्णु जी का आशीर्वाद लेना चाहते हैं। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु के इस मंदिर में आने से खूब शांति मिलती है और सारे कष्ट धीरे-धीरे कम होने लगते हैं। पुराणों के अनुसार, गयासुर नामक असुर को भगवान विष्णु ने अपने चरणों से दबाया था। उसी स्थान पर उनके चरणों के निशान बने, जिन्हें आज विष्णुपद के नाम से जाना जाता है। यही वजह है कि यह मंदिर वैष्णव भक्तों के लिए विशेष आस्था का केंद्र है।

देवघाट पर स्नान का है विशेष महत्व

विष्णुपद मंदिर के पास स्थित देवघाट भी निर्जला एकादशी के दिन श्रद्धालुओं से भरा रहता है। यहां बहने वाली फल्गु नदी को पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार निर्जला एकादशी पर देवघाट में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। व्रत रखने वाले कई श्रद्धालु सुबह-सुबह देवघाट पहुंचकर स्नान करते हैं और फिर भगवान विष्णु के दर्शन के लिए मंदिर जाते हैं। माना जाता है कि इससे व्रत का फल दोगुना बढ़ जाता है।

मोक्ष की भूमि है गया

गया को मोक्ष की भूमि माना जाता है। निर्जला एकादशी पर लोग यहां भगवान विष्णु की पूजा और पितरों के तर्पण और पूजा के लिए आते हैं। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की कृपा से पूर्वजों को शांति मिलती है।

इसी धार्मिक महत्व और गहरी आस्था के चलते निर्जला एकादशी पर गया के विष्णुपद मंदिर और देवघाट में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। भगवान विष्णु के दर्शन, पवित्र स्नान और पूजा-अर्चना के लिए यह दिन बेहद खास माना जाता है।

Garima Singh

लेखक के बारे में

Garima Singh

शॉर्ट बायो: गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।

परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।

करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।

एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।

व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।

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