निर्जला एकादशी 2026: व्रत का पारण करने से पहले करें ये 3 काम, जानें शुभ समय, विधि

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Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी व्रत का पारण 26 जून, शुक्रवार को सुबह 5:41 बजे से 8:25 बजे तक किया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पारण से पहले व्रत कथा पढ़ना, भगवान विष्णु की आरती करना और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। 

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हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का बहुत अधिक महत्व होता है। एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस व्रत का पारण सही समय और विधि से करने पर ही व्रत का पूर्ण फल मिलता है। साल 2026 में निर्जला एकादशी का व्रत आज है। एकादशी व्रत का पारण अगले दिन यानी 26 जून, शुक्रवार को किया जाएगा। अगर आपने निर्जला एकादशी का व्रत रखा है, तो पारण करने से पहले कुछ धार्मिक कार्य जरूर कर लें।

निर्जला एकादशी 2026 पारण का शुभ समय

पंचांग के अनुसार, 26 जून 2026, शुक्रवार को सुबह 5:41 बजे से सुबह 8:25 बजे तक पारण का शुभ समय रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी व्रत का पारण हमेशा द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद और हरि वासर समाप्त होने के बाद ही करना चाहिए।

पारण से पहले जरूर करें ये 3 काम

1. निर्जला एकादशी व्रत कथा पढ़ें

पारण से पहले निर्जला एकादशी की व्रत कथा पढ़ना या सुनना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे व्रत की पूजा पूर्ण मानी जाती है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

2. भगवान विष्णु की आरती करें

व्रत खोलने से पहले भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें और उनकी आरती करें। इसके बाद ही पारण करें। ऐसा करने से पूजा का संपूर्ण फल मिलने की मान्यता है।

3. 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप करें

पारण से पहले 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का श्रद्धा और भक्ति के साथ जप करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंत्र के जाप से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और भक्त को शुभ फल की प्राप्ति होती है।

पारण से पहले करें स्नान और पूजा

द्वादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा घर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाएं। भगवान को पीले फूल, चंदन, अक्षत और मौसमी फल अर्पित करें। भोग में तुलसी दल जरूर रखें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी के बिना भगवान विष्णु भोग स्वीकार नहीं करते।

आरती का है विशेष महत्व

भगवान विष्णु की आरती अवश्य करें। मान्यता है कि इससे पूजा पूर्ण मानी जाती है और व्रत का शुभ फल प्राप्त होता है।

पारण से पहले दान करना शुभ माना जाता है

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, व्रत खोलने से पहले जरूरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को भोजन कराना शुभ माना गया है। इसके अलावा जल से भरा घड़ा, सुराही, पंखा, छाता, अनाज, वस्त्र या सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा का दान भी किया जा सकता है। ज्येष्ठ माह में जलदान का विशेष महत्व बताया गया है।

इस तरह खोलें निर्जला एकादशी का व्रत

पूजा और दान के बाद सबसे पहले भगवान विष्णु का चरणामृत या तुलसी दल ग्रहण करें। इसके बाद सादा जल पीकर व्रत का पारण करें। चूंकि यह कठिन निर्जला व्रत होता है, इसलिए शुरुआत में हल्का आहार लें। पहले फल, नारियल पानी या नींबू पानी लें और उसके बाद सात्विक भोजन करें।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Yogesh Joshi

लेखक के बारे में

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योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


परिचय और अनुभव


योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।


न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।


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