Nirjala Ekadashi: निर्जला एकादशी का पारण कब होगा, जानें मुहूर्त और विधि

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Nirjala Ekadashi 2026 : इस साल गुरुवार  को शुभ मुहूर्त में भगवान विष्णु की विधिवत उपासना की जाएगी। निर्जला एकादशी की पूजा ही नहीं पारण भी शुभ मुहूर्त में करना जरूरी माना जाता है। जानें निर्जला एकादशी व्रत पारण का शुभ मुहूर्त- 

Nirjala Ekadashi 2026 paran muhurat time and Nirjala Ekadashi vrat paran vidhi

Nirjala Ekadashi 2026 paran muhurat time, निर्जला एकादशी कब है : इस साल हिंदू पंचांग के अनुसार गुरुवार के दिन विष्णु भक्त निर्जला एकादशी का व्रत रखेंगे और भगवान की आराधना करेंगे। धार्मिक मान्यताओं की मानें तो निर्जला एकादशी का व्रत रखने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इस साल उदया तिथि में 25 जून को निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाएगा। वहीं, निर्जला एकादशी की पूजा ही नहीं पारण का भी मुहूर्त देखा जाता है। आइए जानते हैं कब होगा निर्जला एकादशी व्रत का पारण व विधि-

निर्जला एकादशी का पारण कब होगा, जानें मुहूर्त और विधि

निर्जला एकादशी का व्रत पारण का शुभ मुहूर्त- ज्येष्ठ महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का व्रत पारण 26 जून को किया जाएगा। इस दिन पारण (व्रत तोड़ने का) शुभ समय सुबह 05:14 मिनट से सुबह में 08:00 मिनट तक रहेगा। पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय सुबह 10 बजकर 22 मिनट रहेगा।

निर्जला एकादशी का व्रत पारण कैसे करना चाहिए?

  • स्नान आदि कर साफ वस्त्र धारण करें
  • भगवान श्री हरि विष्णु का जलाभिषेक करें
  • प्रभु का पंचामृत सहित गंगाजल से अभिषेक करें
  • अब प्रभु को पीला चंदन और पीले पुष्प अर्पित करें
  • मंदिर में घी का दीपक प्रज्वलित करें
  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें
  • पूरी श्रद्धा के साथ भगवान श्री हरि विष्णु और लक्ष्मी जी की आरती करें
  • प्रभु को तुलसी सहित भोग लगाएं
  • अंत में व्रत संकल्प पूर्ण करें व क्षमा प्रार्थना करें

निर्जला एकादशी के व्रत पारण के समय ध्यान रखें ये बातें- दृक पंचांग के अनुसार, निर्जला एकादशी व्रत के अगले दिन सूर्य के उदय होने के बाद पारण किया जाता है। निर्जला एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना जरूरी माना जाता है। अगर द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाती है तो निर्जला एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के बाद ही किया जाता है। द्वादशी तिथि के भीतर पारण न करना शुभ नहीं माना जाता है। निर्जला एकादशी व्रत का पारण हरि वासर के दौरान भी नहीं करना चाहिए। जो विष्णु भक्त व्रत कर रहे हैं, उन्हें व्रत तोड़ने से पहले हरि वासर समाप्त होने का इंतजार करना चाहिये। हरि वासर द्वादशी तिथि की पहली एक चौथाई अवधि मानी जाती है। व्रत तोड़ने के लिए सबसे शुभ समय प्रातः काल का होता है। कुछ कारणों की वजह से अगर कोई प्रातः काल पारण करने में सक्षम नहीं है तो उसे मध्याह्न के बाद पारण करना चाहिए।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियां मान्यताओं पर आधारित हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Shrishti Chaubey

लेखक के बारे में

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