निर्जला एकादशी पर पानी पीना कब उचित माना जाता है? जान लें ज्योतिर्विद का मत और व्रत नियम

लाइव हिन्दुस्तान
Follow us on Google News
share

Nirjala ekadashi vrat Niyam: निर्जला एकादशी व्रत में अन्न और जल ग्रहण करने की मनाही होती है। ज्येष्ठ माह की तपती गर्मी में बिना जल इस व्रत के नियम का पालन करना अत्यंत कठिन माना जाता है। इसलिए सभी एकादशी व्रत में यह व्रत श्रेष्ठ माना जाता है।

nirjala ekadashi mein pani kab pi sakte hain

Nirjala ekadashi mein pani kab pi sakte hain: निर्जला एकादशी व्रत हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को किया जाता है। इस साल निर्जला एकादशी व्रत 25 जून 2026 को रखा जाएगा। एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। इस व्रत में श्री हरि की उपासना करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। निर्जला एकादशी का व्रत अन्य सभी एकादशी व्रतों में सबसे कठिन और श्रेष्ठ माना जाता है। इस व्रत में अन्न और जल दोनों का त्याग किया जाता है। कई बार निर्जला एकादशी व्रत में भीषण गर्मी और स्वास्थ्य परेशानियों के कारण प्यास अधिक लगती है और गला सूखने पर प्राणों पर ही संकट महसूस होने लगता है। जानें ज्योतिर्विद से अगर निर्जला एकादशी पर गला प्यास से सूख जाए और स्वास्थ्य परेशानी बढ़ जाए, तो क्या पानी पिया जा सकता है।

निर्जला एकादशी पर पानी पीने की क्यों मनाही होती है:

निर्जला का अर्थ है बिना जल किया जाने वाला व्रत। इस व्रत में सूर्योदय के पूर्व उठकर स्नान आदि करके व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद अगले दिन सूर्योदय तक पानी पीने की मनाही होती है। इस व्रत में अन्न और जल दोनों का ही त्याग किया जाता है। एकादशी व्रत पारण के समय ही पानी पीना उचित माना जाता है। मान्यता है कि एकादशी व्रत करने सभी 24 एकादशी व्रत के समान पुण्य प्राप्त होता है। इसलिए यह व्रत सभी एकादशी व्रतों में श्रेष्ठ माना जाता है।

किन लोगों को या किस परिस्थिति में मिल सकती है छूट?

पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, निर्जला एकादशी व्रत में कुछ विषम परिस्थितियों में व्रती को जल ग्रहण करने की छूट होती है। बच्चे, बुजुर्ग या बीमार लोगों को छूट है। अगर व्रत करने वाला कोई व्यक्ति किसी स्वास्थ्य समस्या से परेशान है, तो जल ग्रहण कर सकता है। इस व्रत का मुख्य नियम जल का त्याग करना ही है, इसलिए नियमानुसार फलाहार निर्जला एकादशी व्रत करने से पूर्ण फल की प्राप्ति नहीं होती है। लेकिन भगवान विष्णु की आराधना करने की मनाही नहीं है।

अगर प्यास के कारण प्राणों पर संकट आ जाए, तो क्या करें:

पंडित जी के अनुसार, निर्जला एकादशी पर सेहत या प्राणों पर संकट जैसे चक्कर आना, बीपी लो होना या डिहाइड्रेशन होना जैसी स्थितियों में पानी पिया जा सकता है। व्रत से महत्वपूर्ण प्राणों की रक्षा है। इसके अलावा आचमन या कुल्ला करने के लिए जल की कुछ बूंदों का प्रयोग मान्य है। पंडित जी के अनुसार, यह छूट उन लोगों के लिए जो किसी कारण वश अन्न और जल का त्याग नहीं कर सकते हैं। शास्त्रों में स्पष्ट रूप से वर्णित है कि निर्जला एकादशी व्रत में पानी पीने से व्रत खंडित होता है या टूट जाता है।

निर्जला एकादशी व्रत नियम-

1. शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत में पानी की एक बूंद पीना भी वर्जित माना जाता है।

2. व्रत शुरू होने से एक दिन पहले व्रती व्यक्ति को चावल का सेवन नहीं करना चाहिए और तामसिक भोजन से दूरी बनानी चाहिए।

3. इस दिन जल, घड़ा, वस्त्र और मौसमी फलों का दान अत्यंत शुभ माना जाता है।

4. एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ने की मनाही होती है। व्रत के दिन एक दिन पहले तोड़े गए पत्तों का प्रयोग करना चाहिए।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Saumya Tiwari

लेखक के बारे में

Saumya Tiwari

संक्षिप्त विवरण

सौम्या तिवारी लाइव हिन्दुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा हैं और इस संस्थान के साथ करीब 5 वर्षों से अधिक समय से जुड़ी हैं। इन्हें डिजिटल पत्रकारिता में करीब 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। यहां वह ग्रह राशि परिवर्तन, टैरो, वैदिक ज्योतिष, फेंगशुई, अंकराशि, रत्न शास्त्र और व्रत-त्योहार आदि से जुड़ी खबरें लिखती हैं।


विस्तृत बायो


परिचय और अनुभव

सौम्या तिवारी की ग्रह राशि परिवर्तन, व्रत-त्योहार, सामुद्रिक शास्त्र, अंकज्योतिष, वास्तु शास्त्र एवं फेंगशुई, कथा-कहानी जैसे विषयों पर अच्छी पकड़ है। उन्हें ज्योतिष एवं धार्मिक विषयों में करीब 6 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर डिप्टी कंटेंट प्रोड्यूसर कार्यरत हैं और धर्म व ज्योतिष (एस्ट्रोलॉजी) सेक्शन का हिस्सा हैं।


इसके अलावा उन्होंने मनोरंजन (एंटरटेनमेंट) और राजनीतिक (पॉलिटिक्स) विषयों पर भी विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम किया है। लाइव हिन्दुस्तान में सौम्या की टॉप परफॉर्मेंस रही है, जिसके लिए उन्हें कई बार पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। खाली समय में वह धार्मिक ग्रंथों और पुराणों का अध्ययन करना और पाठकों तक सही जानकारी पहुंचाना पसंद करती हैं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि

सौम्या तिवारी ने कानपुर विश्वविद्यालय से स्नातक (बीए) किया है और जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से जनसंचार एवं पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा प्राप्त किया है। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान ही उन्हें हैदराबाद की लोकल न्यूज वेबसाइट इंडिलिक्स से पहली नौकरी का प्रस्ताव मिला।


इसके बाद वह जनसत्ता (द इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप), द क्विंट और जी न्यूज जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों से जुड़ी रहीं। साल 2020 में वह लाइव हिन्दुस्तान के धर्म व ज्योतिष सेक्शन का हिस्सा बनीं।


व्यक्तिगत रुचियां

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की रहने वाली सौम्या तिवारी को धार्मिक और ज्योतिषीय विषयों की जानकारी जुटाना पसंद है। इसके अलावा उन्हें नई-नई जगहों पर घूमने का भी शौक है।


विशेषज्ञता

ग्रह और नक्षत्रों का राशि पर असर
फेंगशुई
वास्तु शास्त्र
अंक शास्त्र
रत्न विज्ञान

और पढ़ें
जानें Sawan 2026, Rashifal और Panchang की सटीक जानकारी। रोजाना पूजा-पाठ के लिए पढ़ें Shiv Chalisa, Shiv Aarti, Shiv Mahamrityunjaya Mantra, Shiv Stuti, Hanuman Chalisa और Bajrang Baan
Hindi Newsधर्म न्यूज़निर्जला एकादशी पर पानी पीना कब उचित माना जाता है? जान लें ज्योतिर्विद का मत