Ekadashi Vrat: निर्जला एकादशी के बाद कौन-सी एकादशी आती है? जान लें सही तारीख और महत्व
Nirjala ekadashi ke baad konsi ekadashi hai: निर्जला एकादशी को 'भीमसेनी एकादशी' भी कहा जाता है। यह व्रत सभी एकादशियों में सबसे श्रेष्ठ और कठिन माना जाता है। इस व्रत में भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। जानें निर्जला एकादशी के बाद कौन-सी एकादशी तिथि आती है।

Nirjala ekadashi ke baad konsi ekadashi aati hai: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का खास महत्व है। एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु के साथ मां लक्ष्मी की विधिवत पूजा करने से सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। श्री हरि की कृपा से मनवांछित परिणाम मिलते हैं और साधक सभी सुखों को भोगकर अंत में मोक्ष को प्राप्त करता है। पंचांग के अनुसार, हर साल ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी व्रत किया जाता है। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, निर्जला एकादशी व्रत सभी एकादशी व्रतों के समान पुण्य दिलाने वाला है। इस व्रत में अन्न और जल ग्रहण करने की मनाही होती है। अगर आप भी एकादशी व्रत करते हैं, तो जानें निर्जला एकादशी कब है और इसके बाद कौन-सा एकादशी व्रत आता है।
निर्जला एकादशी व्रत 2026 कब है:
निर्जला एकादशी व्रत ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष में रखा जाता है। इस साल यह व्रत 25 जून 2026, गुरुवार को है। गुरुवार के दिन एकादशी व्रत होने के कारण इस दिन का महत्व बढ़ रहा है। गुरुवार का दिन भी भगवान विष्णु को समर्पित है।
निर्जला एकादशी के बाद कौन-सी एकादशी आती है:
निर्जला एकादशी के ठीक बाद योगिनी एकादशी आती है। यह व्रत आषाढ़ कृष्ण पक्ष में रखा जाता है। इस साल योगिनी एकादशी व्रत 10 जुलाई 2026, शुक्रवार को है। योगिनी एकादशी के बाद आषाढ़ शुक्ल पक्ष में देवशयनी एकादशी व्रत किया जाता है। देवशयनी एकादशी के दिन से चातुर्मास की शुरुआत होती है।
योगिनी एकादशी का महत्व:
शास्त्रों के अनुसार, योगिनी एकादशी व्रत सभी पापों,रोगों से मुक्ति दिलाने और मोक्ष की प्राप्ति कराने वाला अत्यंत पुण्यकारी व्रत है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति को 84 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान पुण्य मिलता है।
एकादशी के दिन क्या करना चाहिए:
एकादशी व्रत में दशमी तिथि की रात से ही अन्न त्याग करने का विधान है। इस व्रत में भगवान विष्णु की पूजा भक्तिभाव के साथ की जाती है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, इस दिन चावल का भूलकर भी सेवन नहीं करना चाहिए। एकादशी व्रत में फलाहारी चीजें ही खानी चाहिए। इस दिन 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप अत्यंत लाभकारी माना गया है।
एकादशी व्रत पारण नियम:
एकादशी व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद किया जाता है। इस व्रत का पारण द्वादशी तिथि के भीतर नहीं करना पाप के समान होता है। पारण तुलसी के पत्ते और जल ग्रहण करके करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Saumya Tiwariसंक्षिप्त विवरण
सौम्या तिवारी लाइव हिन्दुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा हैं और इस संस्थान के साथ करीब 5 वर्षों से अधिक समय से जुड़ी हैं। इन्हें डिजिटल पत्रकारिता में करीब 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। यहां वह ग्रह राशि परिवर्तन, टैरो, वैदिक ज्योतिष, फेंगशुई, अंकराशि, रत्न शास्त्र और व्रत-त्योहार आदि से जुड़ी खबरें लिखती हैं।
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इसके अलावा उन्होंने मनोरंजन (एंटरटेनमेंट) और राजनीतिक (पॉलिटिक्स) विषयों पर भी विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम किया है। लाइव हिन्दुस्तान में सौम्या की टॉप परफॉर्मेंस रही है, जिसके लिए उन्हें कई बार पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। खाली समय में वह धार्मिक ग्रंथों और पुराणों का अध्ययन करना और पाठकों तक सही जानकारी पहुंचाना पसंद करती हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
सौम्या तिवारी ने कानपुर विश्वविद्यालय से स्नातक (बीए) किया है और जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से जनसंचार एवं पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा प्राप्त किया है। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान ही उन्हें हैदराबाद की लोकल न्यूज वेबसाइट इंडिलिक्स से पहली नौकरी का प्रस्ताव मिला।
इसके बाद वह जनसत्ता (द इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप), द क्विंट और जी न्यूज जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों से जुड़ी रहीं। साल 2020 में वह लाइव हिन्दुस्तान के धर्म व ज्योतिष सेक्शन का हिस्सा बनीं।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की रहने वाली सौम्या तिवारी को धार्मिक और ज्योतिषीय विषयों की जानकारी जुटाना पसंद है। इसके अलावा उन्हें नई-नई जगहों पर घूमने का भी शौक है।
विशेषज्ञता
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