Nirjala Ekadashi Date : 2026 में निर्जला एकादशी कब है? नोट कर लें सही डेट और शुभ मुहूर्त

Yogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
share

निर्जला एकादशी साल की सबसे कठिन एकादशी मानी जाती है। इस दिन व्रत रखने वाले लोग न कुछ खाते हैं और न ही पानी पीते हैं। इसलिए इसे बाकी सभी एकादशियों से अलग और ज्यादा कठिन माना जाता है। फिर भी लोग इस व्रत को बड़ी श्रद्धा से रखते हैं, क्योंकि मान्यता है कि इसका फल बहुत बड़ा होता है।

Nirjala Ekadashi Date : 2026 में निर्जला एकादशी कब है? नोट कर लें सही डेट और शुभ मुहूर्त

निर्जला एकादशी साल की सबसे कठिन एकादशी मानी जाती है। इस दिन व्रत रखने वाले लोग न कुछ खाते हैं और न ही पानी पीते हैं। इसलिए इसे बाकी सभी एकादशियों से अलग और ज्यादा कठिन माना जाता है। फिर भी लोग इस व्रत को बड़ी श्रद्धा से रखते हैं, क्योंकि मान्यता है कि इसका फल बहुत बड़ा होता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति पूरे साल की एकादशी नहीं रख पाता, तो वह सिर्फ निर्जला एकादशी रखकर भी उतना ही पुण्य पा सकता है। यही वजह है कि इस व्रत का इंतजार लोग पूरे साल करते हैं।

कब है निर्जला एकादशी 2026

पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि 24 जून 2026 को शाम 6 बजकर 12 मिनट से शुरू होगी और 25 जून को रात 8 बजकर 9 मिनट तक रहेगी। व्रत हमेशा उदय तिथि के हिसाब से रखा जाता है, इसलिए इस बार निर्जला एकादशी 25 जून, गुरुवार को रखी जाएगी।

क्यों इतना कठिन होता है यह व्रत- इस व्रत में पानी तक नहीं पीना होता। सुबह से अगले दिन तक पूरा दिन बिना जल के रहना आसान नहीं होता, खासकर जून की गर्मी में। इसी वजह से इसे सबसे कठिन व्रत कहा जाता है। कहानी भी मिलती है कि भीमसेन को भूख बहुत लगती थी और वे व्रत नहीं रख पाते थे, लेकिन उन्होंने भी यह व्रत रखा था। इसलिए इसे भीम एकादशी भी कहते हैं।

पूजा का समय और तरीका- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु का ध्यान करें। सुबह 5:25 से 7:10 बजे तक पूजा करना अच्छा माना गया है। ब्रह्म मुहूर्त 4:05 से 4:45 बजे तक रहेगा। इस समय में पूजा करने से ज्यादा शुभ फल मिलता है। दिनभर भगवान विष्णु का नाम लें और शांत रहने की कोशिश करें।

व्रत का क्या महत्व है- ऐसा माना जाता है कि निर्जला एकादशी रखने से पाप खत्म होते हैं और भगवान विष्णु की कृपा मिलती है। इस व्रत का फल बाकी सभी एकादशियों के बराबर बताया गया है। लोग इसे इसलिए भी रखते हैं ताकि जीवन में सुख-शांति बनी रहे।

पारण कब करें- व्रत के बाद उसे सही समय पर खोलना जरूरी होता है। 26 जून को सुबह 5:25 से 8:13 बजे के बीच व्रत खोल सकते हैं। इसी समय को सही माना गया है।

ध्यान रखने वाली बातें

  • अगर आपकी तबीयत ठीक नहीं है, तो जबरदस्ती व्रत न रखें।
  • दिनभर धैर्य रखें और ज्यादा मेहनत वाले काम से बचें।
  • जरूरतमंद को दान करना अच्छा माना जाता है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Yogesh Joshi

लेखक के बारे में

Yogesh Joshi

योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


परिचय और अनुभव


योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।


न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि


योगेश जोशी ने मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की इस पढ़ाई ने उन्हें तथ्यों के साथ जिम्मेदारी और संतुलन बनाए रखने की समझ दी, जो उनके लेखन में साफ झलकती है।


करियर की शुरुआत और प्रोफेशनल सफर


योगेश ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफॉर्म से की। यहां उन्होंने डिजिटल न्यूज़, कंटेंट राइटिंग और एडिटिंग पर काम करते हुए मजबूत आधार तैयार किया। इसके बाद डिजिटल मीडिया में लगातार काम करते हुए उन्होंने एस्ट्रोलॉजी और धार्मिक विषयों से जुड़े कंटेंट में विशेषज्ञता विकसित की।
पाठक किस भाषा में बात समझता है और किस तरह की जानकारी उसके लिए उपयोगी होती है—यह समझ उनके प्रोफेशनल सफर की सबसे बड़ी ताकत रही है।

एस्ट्रोलॉजी लेखन और उद्देश्य


योगेश के लिए ज्योतिष केवल भविष्य बताने का जरिया नहीं है। वह इसे आत्मचिंतन और सही फैसलों में मदद करने वाले एक मार्गदर्शक के रूप में देखते हैं। इसी सोच के साथ वह राशिफल और अन्य ज्योतिषीय विषयों को संतुलित, व्यावहारिक और भरोसेमंद तरीके से प्रस्तुत करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों को डराना नहीं, बल्कि जानकारी के जरिए उन्हें सोचने और समझने की दिशा देना है।


व्यक्तिगत रुचियां


काम के अलावा योगेश को सामाजिक विषयों पर पढ़ना, लिखना और भारतीय परंपराओं को समझना पसंद है। उनका मानना है कि एक पत्रकार के लिए सीखना और खुद को अपडेट रखना सबसे जरूरी है।


विशेषज्ञता (Areas of Expertise):

राशिफल (डेली एवं वीकली)
ग्रह-गोचर
दशा-महादशा
अंकज्योतिष
सामुद्रिक शास्त्र
वास्तु शास्त्र
फेंगशुई
रत्न-उपाय
व्रत-त्योहार एवं पूजा-विधि

और पढ़ें
जानें लेटेस्ट Dharm News, Aaj ka Rashifal और सटीक Panchang की जानकारी। अपनी डेली पूजा के लिए यहाँ पढ़ें Shiv Chalisa, Hanuman Chalisa और Bajrang Baanहिंदू कैलेंडर 2026 की शुभ तिथियों के साथ अपने हर दिन को खास बनाएं!