निर्जला एकादशी : यहां जान लें साल की सबसे बड़ी एकादशी से जुड़ी 10 जरूरी बातें
Nirjala ekadashi 25 June 2026: साल की सबसे बड़ी एकादशी व्रत 25 जून को रखा जाएगा। इसे निर्जला एकादशी के नाम से जानते हैं। जान लें निर्जला एकादशी व्रत से जुड़ी 10 जरूरी बातें।

Nirjala ekadashi 25 June 2026 Puja Time: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि अत्यंत शुभ मानी जाती है। एकादशी व्रत और तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। हर महीने दो एकादशी व्रत आते हैं। इस तरह से साल में कुल 24 एकादशी व्रत का विधान है। इस समय ज्येष्ठ माह चल रहा है। ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी 25 जून 2026 को है। इस दिन निर्जला एकादशी व्रत किया जाएगा। इस व्रत में अन्न और जल दोनों का त्याग किया जाता है। ज्योतिष शास्त्र में निर्जला एकादशी को साल की सबसे बड़ी एकादशी माना जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से सभी एकादशी व्रत के समान पुण्य मिलता है। इस बार निर्जला एकादशी पर शिव, साद्ध और रवि योग का अद्भुत संयोग बन रहा है। लेकिन इस दिन भद्रा का साया भी रहने वाला है। ज्योतिष शास्त्र में भद्रा को अशुभ माना जाता है, इस दौरान शुभ कार्यों को करने की मनाही होती है। जानें निर्जला एकादशी पर भद्रा कब से कब तक, पूजन का समय, व्रत का फल, दान लिस्ट और व्रत पारण मुहूर्त समेत 10 जरूरी जानकारी।
1. निर्जला एकादशी पर बन रहे शुभ संयोग:
निर्जला एकादशी तीन दुर्लभ संयोग रवि योग, शिव और सिद्धि योग में मनाई जाएगी। एकादशी के दिन गुरुवार पड़ रहा है। जो कि भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है, जिससे इसका धार्मिक महत्व बढ़ गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, तीन शुभ योगों में भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी की पूजा, जप, दान और तप करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। इस दिन श्रीमद भागवत गीता का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
2. रवि, शिव और सिद्धि योग कब से कब तक रहेगा:
पंचांग के अनुसार, रवि योग 25 जून सुबह 5 बजकर 25 मिनट से शाम चार बजकर 29 मिनट तक रहेगा। शिव योग 24 जून सुबह 10 बजकर 24 मिनट से 25 जून सुबह 10 बजकर 45 तक रहेगा। सिद्धि योग 25 जून सुबह 10 बजकर 55 मिनट से 26 जून सुबह 11 बजकर 39 मिनट तक रहेगा।
3. निर्जला एकादशी के दिन भद्रा कब तक रहेगी:
निर्जला एकादशी के दिन भद्रा सुबह 05 बजकर 48 मिनट पर प्रारंभ होगी और शाम 04 बजकर 39 मिनट तक रहेगी। हिंदू धर्म में भद्रा का समय शुभ नहीं माना जाता है।
4. निर्जला एकादशी पर पूजन का शुभ समय क्या है:
निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि इस दिन शुभ मुहूर्त में किए गए पूजन-पाठ और दान का अक्षय पुण्य प्राप्त होता है। इस दिन पूजन का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:46 बजे से सुबह 05:17 बजे तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 01:21 बजे से दोपहर 02:26 बजे तक रहेगा। विजय मुहूर्त शाम 04:35 बजे से शाम 05:40 बजे तक रहेगा।
5. निर्जला एकादशी पर किन चीजों का दान करना चाहिए:
निर्जला एकादशी के दिन जल, अन्न, वस्त्र, जूते-चप्पल, छाता और मौसमी फलों का दान सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। मान्यता है कि इससे भगवान विष्णु की कृपा से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति सभी सुखों को भोगकर अंत में मोक्ष को प्राप्त करता है।
6. निर्जला एकादशी व्रत का फल:
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस व्रत के प्रभाव से जातक के जन्म-जन्मांतर के सभी पाप खत्म हो जाते हैं। यमदूतों का भय समाप्त हो जाता है और व्यक्ति सभी सुखों को भोगकर विष्णु लोक को जाता है। साथ ही मनवांछित फल मिलता है।
7. निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी क्यों कहा जाता है:
निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत काल में भीम ने महर्षि वेदव्यास के कहने पर यह व्रत किया था। तभी से यह व्रत भीमसेनी एकादशी के नाम से जाना जाने लगा।
8. निर्जला एकादशी व्रत पारण का समय:
निर्जला एकादशी व्रत का पारण 26 जून 2026 को किया जाएगा। इस दिन व्रत पारण का समय सुबह 05 बजकर 49 मिनट से सुबह 09 बजकर 03 मिनट तक रहेगा। पारण के दिन द्वादशी तिथि समाप्त होने का समय शाम 06 बजकर 52 मिनट है। एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि के भीतर करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
9. निर्जला एकादशी पर पानी कब पीना चाहिए:
निर्जला एकादशी व्रत में जल ग्रहण करने की मनाही होती है। मान्यता है कि एक बूंद भी पानी पीने से व्रत भंग हो जाता है। इस व्रत के पारण के समय जल ग्रहण करना शुभ माना जाता है।
10. क्या निर्जला एकादशी से कर सकते हैं व्रत की शुरुआत:
पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, निर्जला एकादशी व्रत से एकादशी व्रत की शुरुआत करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा एकादशी व्रत की शुरुआत उत्पन्ना एकादशी से भी की जा सकती है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
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इसके अलावा उन्होंने मनोरंजन (एंटरटेनमेंट) और राजनीतिक (पॉलिटिक्स) विषयों पर भी विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम किया है। लाइव हिन्दुस्तान में सौम्या की टॉप परफॉर्मेंस रही है, जिसके लिए उन्हें कई बार पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। खाली समय में वह धार्मिक ग्रंथों और पुराणों का अध्ययन करना और पाठकों तक सही जानकारी पहुंचाना पसंद करती हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
सौम्या तिवारी ने कानपुर विश्वविद्यालय से स्नातक (बीए) किया है और जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से जनसंचार एवं पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा प्राप्त किया है। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान ही उन्हें हैदराबाद की लोकल न्यूज वेबसाइट इंडिलिक्स से पहली नौकरी का प्रस्ताव मिला।
इसके बाद वह जनसत्ता (द इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप), द क्विंट और जी न्यूज जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों से जुड़ी रहीं। साल 2020 में वह लाइव हिन्दुस्तान के धर्म व ज्योतिष सेक्शन का हिस्सा बनीं।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की रहने वाली सौम्या तिवारी को धार्मिक और ज्योतिषीय विषयों की जानकारी जुटाना पसंद है। इसके अलावा उन्हें नई-नई जगहों पर घूमने का भी शौक है।
विशेषज्ञता
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