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निर्जला एकादशी पर 7 साल बाद बन रहा है खास संयोग, जरूर करें इस नियम का पालन

  • निर्जला एकादशी पर इस बार बेहद खास संयोग बन रहा है। श्रद्धालु इस बार स्वाति नक्षत्र में निर्जला एकादशी का व्रत करेंगे। इससे व्रत फलदायी होगा। सात साल बाद इस बार पंच योग और स्वाति नक्षत्र में लोग निर्जला व्रत रखेंगे।

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Yogesh Joshi नई दिल्ली, एजेंसी/लाइव हिन्दुस्तान टीमTue, 18 June 2024 12:43 AM
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निर्जला एकादशी पर इस बार बेहद खास संयोग बन रहा है। श्रद्धालु इस बार स्वाति नक्षत्र में निर्जला एकादशी का व्रत करेंगे। इससे व्रत फलदायी होगा। सात साल बाद इस बार पंच योग और स्वाति नक्षत्र में लोग निर्जला व्रत रखेंगे। निर्जला एकादशी का व्रत मंगलवार को रखा जाएगा।

ज्योतिषाचार्य डॉ.सुशांतराज ने बताया कि ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत सोमवार सुबह 04 बजकर 43 मिनट से हो गई है। मंगलवार यानी 18 जून की सुबह 06 बजकर 24 मिनट पर इसकी समाप्ति है। ऐसे में उदया तिथि 18 जून को निर्जला एकादशी का उपवास रखा जाना श्रेयस्कर है। हिंदू पंचांगों में अलग-अलग नामों से कुल 24 एकादशी पर लोग व्रत और भगवान विष्णु का पूजन-अर्चना करते हैं। इन 24 एकादशियों में ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी सबसे श्रेष्ठ मानी जाती है। व्रत के दौरान भगवान विष्णु का ओम नमो भगवते वासुदेवाय का जप करना चाहिए। गौ, वस्त्र, छत्र, फल आदि का दान करें।

इस नियम का पालन करना होता है जरूरी

निर्जला एकादशी व्रत में जल का त्याग करना होता है। इस व्रत में व्रती पानी का सेवन नहीं कर सकता है। व्रत का पारण करने के बाद ही व्रती जल का सेवन कर सकता है। 

निर्जला एकादशी पूजा-विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं।

घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।

भगवान विष्णु का गंगा जल से अभिषेक करें।

भगवान विष्णु को पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें।

अगर संभव हो तो इस दिन व्रत भी रखें।

भगवान की आरती करें। 

भगवान को भोग लगाएं। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है। भगवान विष्णु के भोग में तुलसी को जरूर शामिल करें। ऐसा माना जाता है कि बिना तुलसी के भगवान विष्णु भोग ग्रहण नहीं करते हैं। 

इस पावन दिन भगवान विष्णु के साथ ही माता लक्ष्मी की पूजा भी करें। 

इस दिन भगवान का अधिक से अधिक ध्यान करें। 

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