
New Year 2026: 1 जनवरी को है शुक्र प्रदोष व्रत, घर लाएं शिव जी से जुड़ी ये चीजें, बढ़ेगा धन-सौभाग्य
हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि शिवजी को समर्पित होती है। इस दिन व्रत का भी विधान है। साथ ही साधक शिव जी को प्रसन्न करने के लिए अलग-अलग उपाय करते हैं। कहते हैं कि जिस पर शिव जी की कृपा रहती है, उसे किसी भी चीज की कमी नहीं रहती है।
नए साल यानी 2026 की शुरुआत हो गई है। पहले दिन यानी एक जनवरी को शुक्र प्रदोष व्रत है। हिंदू धर्म में इसका काफी महत्व है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा अर्चना पूरे विधि-विधान से की जाती है। हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि शिवजी को समर्पित होती है। इस दिन व्रत का भी विधान है। साथ ही साधक शिव जी को प्रसन्न करने के लिए अलग-अलग उपाय करते हैं। कहते हैं कि जिस पर शिव जी की कृपा रहती है, उसे किसी भी चीज की कमी नहीं रहती है।
ऐसे में अगर आप भी इस प्रदोष व्रत में उन्हें प्रसन्न करना चाहते हैं, तो सुबह स्नान-ध्यान के बाद विधि-विधान से शिव जी की पूजा करें। साथ ही शिव जी से जुड़ी कुछ चीजें घर लाकर उन्हें प्रसन्न कर सकते हैं।
नंदी
भगवान शिव के प्रमुख गणों में से एक है नंदी। माना जाता है कि प्राचीनकालीन किताब कामशास्त्र, धर्मशास्त्र, अर्थशास्त्र और मोक्षशास्त्र में से कामशास्त्र के रचनाकार नंदी ही थे। ऐसे में अगर आप शिव की कृपा चाहते हैं, तो घर में चांदी से निर्मित नंदी घर लाएं। इससे घर का वास्तु दोष भी दूर होता है। नंदी शिव के वाहन हैं, लेकिन वे शिव की आराधना और सेवा में हमेशा स्थिर रहते हैं। वो शिव के सामने बैठे रहते हैं।
त्रिशूल
नए साल पर आप त्रिशूल घर ला सकते हैं। इसे आप पूजा घर या छत पर लगा सकते हैं। ध्यान रहे कि इसका आकार छोटा ही रहे। साथ ही इसमें लाल रंग की चुनरी त्रिशूल में बांधें। इसे घर में रखने से शिव की कृपा बनी रहती है। साथ ही नकारात्मक शक्तियां घर में हावी नहीं होती है।
डमरू
घर में व्याप्त दुख, संकट और अन्य परेशानियों को दूर करने के लिए नए साल के पहले दिन डमरू की खरीदारी जरूर करें। इसके बाद भगवान शिव की पूजा के समय डमरू की भी पूजा करें। आप अपनी मनोकामना कहने के बाद डमरू अवश्य बजाएं। इसके बाद घर के सभी कोने में डमरू बजाएं।
पारद शिवलिंग
नए साल के पहले दिन पारद शिवलिंग घर लाएं। इसका आकार भी छोटा रहे। घर में स्थापित करने के बाद इसकी पूजा अर्चना पूरे विधि-विधान से करें। पूजा के समय भगवान शिव का अभिषेक जरूर करें। आप दूध, दही और गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक कर सकते हैं।
रुद्राक्ष
रुद्राक्ष को भगवान शिव के अश्रु से उत्पन्न माना जाता है, और इसे धारण करना स्वयं शिव की कृपा को अपने जीवन में आमंत्रित करना होता है। ऐसे में इसे नए साल पर घर ला सकते हैं। पंचमुखी रुद्राक्ष सामान्य श्रद्धालुओं के लिए सबसे उपयुक्त होता है जो मानसिक शांति, रोग निवारण और चिंतनशील जीवन के लिए लाभकारी होता है। यदि आप एक शुद्ध रुद्राक्ष माला को घर ला रहे हैं, तो उसे गंगाजल या गौमूत्र से शुद्ध करें और ॐ ह्रीं नमः मंत्र का 108 बार जप करके उसे अभिमंत्रित करें, तो वह माला ऊर्जा से भर जाती है।
दक्षिणावर्ती शंख
शिवजी को शंखनाद अत्यंत प्रिय है, लेकिन विशेष रूप से दक्षिणावर्ती शंख या शिव शंख उनकी पूजा में विशेष स्थान रखता है। यह शंख वाम मार्गी नहीं, बल्कि दक्षिण दिशा में खुलने वाला होता है और इसे भगवान शिव का रूप माना जाता है। इस पवित्र शंख को घर लाकर पूजा स्थान में स्थापित करना अत्यंत शुभ होता है।
गुरु प्रदोष व्रत-पूजा विधि
- गुरु प्रदोष व्रत के दिन व्रती को दिन भर बिना कुछ खाए-पिए रहना पड़ता है। अगर ऐसा करना संभव न हो तो फल या दूध ले सकते हैं।
- दिन भर किसी की बुराई न करें, क्रोध आदि भी न करें। ऐसा करने से भी व्रत का पूरा फल नहीं मिलता। ऊपर बताए शुभ मुहूर्त से पहले पूजा की पूरी तैयारी कर लें और पूजन सामग्री एकत्रित कर लें।
- मुहूर्त शुरू होने पर शिवलिंग पर जल चढ़ाएं फिर गाय के दूध से अभिषेक करें। पुन: एक बार शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। शुद्ध घी का दीपक लगाएं। पूजा करते समय ऊं नम: शिवाय का जाप करते रहें।
- शिवलिंग पर एक-एक करके बिल्व पत्र, धतूरा, आंकड़े के फूल, जनेऊ, रोली, अबीर आदि चीजें अर्पित करें। इस तरह पूजा करने के बाद महादेव को भोग लगाएं और विधि-विधान से आरती करें।
- पूजा से बाद सात्विक भोजन करें। प्रदोष व्रत करने से महादेव अपने भक्तों की हर इच्छा पूरी करते हैं। इस व्रत के शुभ प्रभाव से जीवन में आने वाले संकट स्वत: ही टल जाते हैं।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।





