रत्न शास्त्र: नीलन पहनने के बाद गलती से ना करें ये 5 काम, फायदे की जगह हो सकता है नुकसान

Navaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
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रत्न शास्त्र: नीलम पहनने के बाद ये 5 गलतियां कभी ना करें, वरना फायदे की जगह नुकसान हो सकता है। नीलम के साथ विपरीत रत्न ना पहनें, टूटा रत्न ना रखें, मांस-मदिरा से दूर रहें और नियमित शुद्धिकरण करें। जानें पूरी सावधानियां।

रत्न शास्त्र: नीलन पहनने के बाद गलती से ना करें ये 5 काम, फायदे की जगह हो सकता है नुकसान

नीलम शनि ग्रह का रत्न है। इसे पहनने से अनुशासन, धैर्य और दीर्घकालिक सफलता मिलती है, लेकिन ज्योतिष और रत्न शास्त्र के अनुसार, नीलम बहुत संवेदनशील रत्न है। अगर इसे गलत तरीके से पहना जाए या कुछ गलतियां की जाएं, तो फायदे की जगह भारी नुकसान हो सकता है। कई बार लोग नीलम पहनने के बाद अनजाने में ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिनसे उनका जीवन उथल-पुथल हो जाता है। आइए जानते हैं नीलम पहनने के बाद कौन-सी 5 गलतियां कभी नहीं करनी चाहिए।

1. विपरीत रत्नों से बचें

रत्न शास्त्र में नीलम को शनि का रत्न माना जाता है। इसे कभी भी माणिक्य, मूंगा, मोती या पीला पुखराज के साथ नहीं पहनना चाहिए। ये रत्न शनि के शत्रु माने जाते हैं। इनका एक साथ उपयोग करने से ग्रहों में संघर्ष होता है, जिससे मानसिक तनाव, आर्थिक हानि, स्वास्थ्य समस्या और पारिवारिक कलह बढ़ सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, नीलम पहनते समय अन्य रत्नों का मेल हमेशा ज्योतिषी से जांच करवाना चाहिए।

2. टूटे या खंडित नीलम को कभी ना पहनें

नीलम अगर कहीं से चटक जाए, टूट जाए या उसमें दरार आ जाए, तो उसे तुरंत उतार देना चाहिए। खंडित नीलम नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है। इससे दुर्घटना, आर्थिक नुकसान और मानसिक अशांति का खतरा बढ़ जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि टूटा हुआ रत्न अपनी शक्ति खो देता है और कभी-कभी विपरीत प्रभाव देता है। इसलिए नीलम की नियमित जांच करवाएं और यदि कोई खराबी दिखे, तो उसे बदल दें।

3. खान-पान और आचरण में सावधानी बरतें

नीलम अनुशासन और सादगी का रत्न है। इसे पहनने के बाद मांसाहार, मदिरा, धूम्रपान और व्यसनों से पूरी तरह दूर रहना चाहिए। शनि देव न्याय के देवता हैं, इसलिए नीलम पहनकर झूठ बोलना, धोखा देना या किसी को हानि पहुंचाना बहुत खतरनाक हो सकता है। ऐसा करने से शनि का प्रकोप बढ़ता है और व्यक्ति को भारी कष्ट झेलने पड़ सकते हैं। सात्विक जीवनशैली अपनाने से नीलम का सकारात्मक प्रभाव बढ़ता है।

4. नीलम का नियमित शुद्धिकरण जरूरी है

नीलम को समय-समय पर शुद्ध करना बहुत जरूरी है। गंगाजल, कच्चे दूध या हल्दी वाले पानी से इसे साफ करें। अगर नीलम गंदा हो जाए या अपनी चमक खो दे, तो उसकी ऊर्जा कमजोर पड़ जाती है। सप्ताह में कम से कम एक बार इसे शुद्ध करने की आदत डालें। शुद्ध नीलम ही सही ढंग से काम करता है।

5. बार-बार रत्न उतारकर ना रखें

नीलम पहनने के बाद इसे बार-बार उतारना या बार-बार बदलना अच्छा नहीं माना जाता है। एक बार पहनने के बाद इसे लगातार पहनें। अगर कभी उतारना पड़े, तो शनिवार को उतारें और शनिवार को ही दोबारा पहनें। बीच-बीच में उतार-चढ़ाव करने से शनि की ऊर्जा में अस्थिरता आती है, जिससे फायदे की जगह नुकसान हो सकता है।

नीलम एक शक्तिशाली रत्न है। इसे सही नियमों और अनुशासन के साथ पहनने पर यह जीवन में स्थिरता, सफलता और सम्मान देता है। लेकिन गलत तरीके से उपयोग करने पर यह उल्टा प्रभाव दे सकता है। इसलिए नीलम पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी से सलाह जरूर लें और ऊपर बताए गए नियमों का सख्ती से पालन करें।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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नवनीत राठौर नए युग के डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में करीब 7 साल का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन के हिस्सा हैं। यहां वह अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष से जुड़ी खबरें लिखते हैं।


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डिजिटल मीडिया में अपनी अलग पहचान बना रहे नवनीत राठौर धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा में पाठकों के लिए परोसते हैं। वो अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और करीब 5 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान नवनीत ने वेबस्टोरी, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।


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नवनीत ने शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा से जनसंचार एवं पत्रकारिता में स्नातक और शुभारती विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।


नवनीत राठौर ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत जनतंत्र न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने सूर्या समाचार और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद नवनीत लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। पाठकों को सरल, विश्वसनीय और प्रेरणादायक जानकारी प्रदान करना ही नवनीत राठौर का मुख्य उद्देश्य है।


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