नवरात्रि की सप्तमी तिथि आज, मां कालरात्रि की होगी पूजा, जानें पूजा विधि, भोग, मंत्र, आरती और शुभ मुहूर्त

Yogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व देशभर में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। इस महापर्व के हर दिन माता दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप की पूजा होती है। आज नवरात्रि का सातवां दिन यानी सप्तमी तिथि है, जो मां कालरात्रि की आराधना के लिए समर्पित है।

नवरात्रि की सप्तमी तिथि आज, मां कालरात्रि की होगी पूजा, जानें पूजा विधि, भोग, मंत्र, आरती और शुभ मुहूर्त

शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व देशभर में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। इस महापर्व के हर दिन माता दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप की पूजा होती है। आज नवरात्रि का सातवां दिन यानी सप्तमी तिथि है, जो मां कालरात्रि की आराधना के लिए समर्पित है। मां कालरात्रि अपने भयानक स्वरूप के बावजूद भक्तों को भय और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति दिलाती हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि सातवें दिन की पूजा से सभी प्रकार के संकटों का नाश होता है और घर में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह होता है। लोग व्रत रखते हैं, विशेष भोग लगाते हैं, मंत्र और आरती करते हैं और शुभ मुहूर्त में मां की आराधना करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

मां कालरात्रि का स्वरूप और महत्व

– मां कालरात्रि का शरीर काला, बाल बिखरे हुए और गले में बिजली जैसी माला रहती है।

– इनके चार हाथ हैं जिनमें खड्ग, लौह शस्त्र, वरमुद्रा और अभयमुद्रा रहती है।

– यह स्वरूप भय और अंधकार का नाश करने वाला माना जाता है।

– इनकी पूजा से शत्रु भय, रोग और अकाल मृत्यु के डर से मुक्ति मिलती है।

पूजा विधि

– सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें।

– पूजा स्थान को साफ करें और मां कालरात्रि की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।

– गंगाजल से शुद्धिकरण करें।

– सिंदूर, कुमकुम, हल्दी, अक्षत, फूल और नारियल अर्पित करें।

– धूप-दीप जलाएं और सिद्धकुंजिका स्तोत्र या अर्गला स्तोत्र का पाठ करें।

– मध्यरात्रि उपासना को सबसे श्रेष्ठ माना गया है।

भोग

मां कालरात्रि को गुड़, ज्वार, नारंगी रंग का हलवा और पंचमेवा चढ़ाना शुभ माना जाता है। इस दिन नारंगी रंग के वस्त्र पहनना भी मंगलकारी होता है।

मंत्र

“ॐ देवी कालरात्र्यै नमः”

या

“एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।

लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।।

वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा।

वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी।।’’

इस मंत्र के जाप से भय और विघ्नों का नाश होता है।

सातवें दिन की पूजा के लाभ

– हर प्रकार के भय, बाधा और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति

– स्वास्थ्य, धन और प्रतिष्ठा में वृद्धि

– शत्रुओं पर विजय

– मानसिक बल और आत्मविश्वास बढ़ना

शुभ मुहूर्त-

ब्रह्म मुहूर्त 04:53 ए एम से 05:41 ए एम

अभिजित मुहूर्त 12:05 पी एम से 12:53 पी एम

विजय मुहूर्त 02:29 पी एम से 03:17 पी एम

गोधूलि मुहूर्त 06:29 पी एम से 06:53 पी एम

अमृत काल 11:15 पी एम से 01:01 ए एम, सितम्बर 30

निशिता मुहूर्त 12:05 ए एम, सितम्बर 30 से 12:53 ए एम, सितम्बर 30

मां कालरात्रि की आरती-

कालरात्रि जय जय महाकाली

काल के मुंह से बचाने वाली

दुष्ट संहारिणी नाम तुम्हारा

महा चंडी तेरा अवतारा

पृथ्वी और आकाश पर सारा

महाकाली है तेरा पसारा

खंडा खप्पर रखने वाली

दुष्टों का लहू चखने वाली

कलकत्ता स्थान तुम्हारा

सब जगह देखूं तेरा नजारा

सभी देवता सब नर नारी

गावे स्तुति सभी तुम्हारी

रक्तदंता और अन्नपूर्णा

कृपा करे तो कोई भी दु:ख ना

ना कोई चिंता रहे ना बीमारी

ना कोई गम ना संकट भारी

उस पर कभी कष्ट ना आवे

महाकाली मां जिसे बचावे

तू भी 'भक्त' प्रेम से कह

कालरात्रि मां तेरी जय

Yogesh Joshi

लेखक के बारे में

Yogesh Joshi

योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


परिचय और अनुभव


योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।


न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि


योगेश जोशी ने मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की इस पढ़ाई ने उन्हें तथ्यों के साथ जिम्मेदारी और संतुलन बनाए रखने की समझ दी, जो उनके लेखन में साफ झलकती है।


करियर की शुरुआत और प्रोफेशनल सफर


योगेश ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफॉर्म से की। यहां उन्होंने डिजिटल न्यूज़, कंटेंट राइटिंग और एडिटिंग पर काम करते हुए मजबूत आधार तैयार किया। इसके बाद डिजिटल मीडिया में लगातार काम करते हुए उन्होंने एस्ट्रोलॉजी और धार्मिक विषयों से जुड़े कंटेंट में विशेषज्ञता विकसित की।
पाठक किस भाषा में बात समझता है और किस तरह की जानकारी उसके लिए उपयोगी होती है—यह समझ उनके प्रोफेशनल सफर की सबसे बड़ी ताकत रही है।

एस्ट्रोलॉजी लेखन और उद्देश्य


योगेश के लिए ज्योतिष केवल भविष्य बताने का जरिया नहीं है। वह इसे आत्मचिंतन और सही फैसलों में मदद करने वाले एक मार्गदर्शक के रूप में देखते हैं। इसी सोच के साथ वह राशिफल और अन्य ज्योतिषीय विषयों को संतुलित, व्यावहारिक और भरोसेमंद तरीके से प्रस्तुत करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों को डराना नहीं, बल्कि जानकारी के जरिए उन्हें सोचने और समझने की दिशा देना है।


व्यक्तिगत रुचियां


काम के अलावा योगेश को सामाजिक विषयों पर पढ़ना, लिखना और भारतीय परंपराओं को समझना पसंद है। उनका मानना है कि एक पत्रकार के लिए सीखना और खुद को अपडेट रखना सबसे जरूरी है।


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