
नवरात्रि की सप्तमी पर नोट कर लें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, उपाय से लेकर सबकुछ
नवरात्रि हिंदू धर्म का अत्यंत पवित्र त्योहार है, जिसे मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना के लिए मनाया जाता है। यह पर्व विशेष रूप से शक्ति, समृद्धि, और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करने का महत्व होता है।
नवरात्रि हिंदू धर्म का अत्यंत पवित्र त्योहार है, जिसे मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना के लिए मनाया जाता है। यह पर्व विशेष रूप से शक्ति, समृद्धि, और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करने का महत्व होता है। हर दिन की पूजा में विशेष नियम, मंत्र, और शुभ मुहूर्त होते हैं। कल यानी 29 सितंबर को नवरात्रि की सप्तमी तिथि यानी सातवां दिन है। नवरात्रि का सातवें दिन मां के सप्तम स्वरूप की पूजा होती है। मां दुर्गा के सातवां स्वरूप मां कालरात्रि का है। मां कालरात्रि का रूप अत्यंत भयानक है, लेकिन माता रानी अपने भक्तों को सभी कष्टों से छुटकारा दिलाती है और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती है। मां कालरात्रि का शरीर अंधकार की तरह काला है। मां के बाल लंबे और बिखरे हुए हैं। मां के गले में माला है जो बिजली की तरह चमकते रहती है। मां कालरात्रि के चार हाथ हैं। मां के हाथों में खड्ग, लौह शस्त्र, वरमुद्रा और अभय मुद्रा है।
शुभ मुहूर्त-
ब्रह्म मुहूर्त 04:53 ए एम से 05:41 ए एम
अभिजित मुहूर्त 12:05 पी एम से 12:53 पी एम
विजय मुहूर्त 02:29 पी एम से 03:17 पी एम
गोधूलि मुहूर्त 06:29 पी एम से 06:53 पी एम
अमृत काल 11:15 पी एम से 01:01 ए एम, सितम्बर 30
निशिता मुहूर्त 12:05 ए एम, सितम्बर 30 से 12:53 ए एम, सितम्बर 30
मां का प्रिय भोग- मां कालरात्रि को गुड़ और गुड़ से बनी चीजें पसंद है। इसलिए महासप्तमी के दिन मां दुर्गा को गुड़ से बनी चीजों का भोग लगाने से वह प्रसन्न होती हैं और भक्तों की मनोकामना पूरी करती हैं।
पूजा विधि-
1 सबसे पहले घर के मंदिर या पूजा स्थल को साफ करें।
2. दीपक जलाएं और धूपबत्ती लगाएं।
3. माता के चित्र या प्रतिमा पर हल्दी और कुमकुम लगाएं।
4. माता को फूल चढ़ाएं और नैवेद्य अर्पित करें।
5. सप्तमी के दिन विशेष मंत्र का जाप करें। सबसे प्रमुख मंत्र है:‘ओम ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ऊं कालरात्रि दैव्ये नम:।’
इस मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करें।
6. माता से अपने घर और परिवार की खुशहाली, स्वास्थ्य, और सुख-समृद्धि के लिए आशीर्वाद मांगें।
7. पूजा के अंत में माता का आरती करें।
8. आरती के बाद भोग अवश्य लगाएं।
सप्तमी तिथि के उपाय
1. इस दिन माता की सेवा करें, विशेष रूप से गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन या कपड़े दान करें।
2. लाल फूल और लाल वस्त्र का प्रयोग पूजा में करें।
3. अगर घर में रोग या अशांति हो तो सप्तमी के दिन विशेष रूप से हवन या यज्ञ करें।
सप्तमी तिथि का महत्व
नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की उपासना का विधान है। मां की उपासना से सभी तरह की नकारात्मक शक्तियों का विनाश होता है। माता के भक्तों को किसी प्रकार से भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। माता अपने भक्तों को सदैव शुभ फल का आशीर्वाद देने वाली हैं। माता का एक नाम शुभंकारी भी है।
मां कालरात्रि की आरती-
कालरात्रि जय जय महाकाली
काल के मुंह से बचाने वाली
दुष्ट संहारिणी नाम तुम्हारा
महा चंडी तेरा अवतारा
पृथ्वी और आकाश पर सारा
महाकाली है तेरा पसारा
खंडा खप्पर रखने वाली
दुष्टों का लहू चखने वाली
कलकत्ता स्थान तुम्हारा
सब जगह देखूं तेरा नजारा
सभी देवता सब नर नारी
गावे स्तुति सभी तुम्हारी
रक्तदंता और अन्नपूर्णा
कृपा करे तो कोई भी दु:ख ना
ना कोई चिंता रहे ना बीमारी
ना कोई गम ना संकट भारी
उस पर कभी कष्ट ना आवे
महाकाली मां जिसे बचावे
तू भी 'भक्त' प्रेम से कह
कालरात्रि मां तेरी जय





