नाग पंचमी पर 24 घंटे खुलता है ये मंदिर, कालसर्प दोष से जुड़ी है मान्यता; जानें 364 दिन क्यों बंद रहते हैं कपाट

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर परिसर में स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर साल में केवल एक बार नाग पंचमी के दिन 24 घंटे के लिए श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है। 2026 में नाग पंचमी 17 अगस्त को है और इसी दिन सावन का तीसरा सोमवार भी पड़ रहा है। 

Nag Panchami 2026
Nag Panchami

उज्जैन को महाकाल की नगरी कहा जाता है और यहां कई ऐसे धार्मिक स्थल हैं, जिनसे जुड़ी परंपराएं लोगों को आकर्षित करती हैं। इन्हीं में से एक है नागचंद्रेश्वर मंदिर। महाकालेश्वर मंदिर परिसर के ऊपरी तल पर स्थित यह मंदिर आम श्रद्धालुओं के लिए पूरे साल बंद रहता है। इसके कपाट केवल नाग पंचमी के दिन 24 घंटे के लिए खोले जाते हैं। साल 2026 में नाग पंचमी 17 अगस्त, सोमवार को है। इस दिन सावन का तीसरा सोमवार भी पड़ रहा है, जिससे उज्जैन में धार्मिक गतिविधियां और बढ़ गई हैं।

नागचंद्रेश्वर मंदिर की सबसे खास बात यहां विराजमान भगवान शिव की प्रतिमा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती नाग के आसन पर विराजमान हैं। इस प्रतिमा को प्राचीन और दुर्लभ माना जाता है। नाग पंचमी के अवसर पर ही श्रद्धालुओं को इसके प्रत्यक्ष दर्शन का अवसर मिलता है।

क्यों सिर्फ नाग पंचमी पर खुलता है मंदिर?

नागचंद्रेश्वर मंदिर के साल में सिर्फ एक बार खुलने के पीछे धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हैं। मान्यता है कि नागराज तक्षक ने भगवान शिव की आराधना की थी और उनकी कृपा प्राप्त की। इसी वजह से नाग पंचमी के दिन नागचंद्रेश्वर के दर्शन और पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है।

परंपरा के अनुसार नाग पंचमी पर विशेष पूजा के बाद मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं। 24 घंटे बाद पूजा-अर्चना के साथ कपाट फिर बंद कर दिए जाते हैं और अगले नाग पंचमी तक आम लोगों के लिए दर्शन उपलब्ध नहीं होते।

कालसर्प दोष से क्या है संबंध?

ज्योतिष में कालसर्प दोष का संबंध राहु और केतु की स्थिति से जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यताओं में नाग देवता और भगवान शिव की पूजा को ऐसे दोषों की शांति के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। इसी वजह से नाग पंचमी पर नागचंद्रेश्वर मंदिर में दर्शन-पूजन को कालसर्प दोष से राहत की कामना से भी जोड़ा जाता है।

हालांकि, इसे ज्योतिषीय मान्यता के रूप में ही समझना चाहिए। कुंडली में कालसर्प दोष की स्थिति और उसके प्रभाव को लेकर ज्योतिषाचार्यों के मत अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए केवल किसी एक उपाय को निश्चित परिणाम की गारंटी नहीं माना जा सकता।

2026 में क्यों खास है नाग पंचमी?

इस बार नाग पंचमी 17 अगस्त, सोमवार को पड़ रही है। इसी दिन सावन का तीसरा सोमवार भी है। यानी एक ही दिन नाग पूजा और भगवान शिव की आराधना का पर्व साथ आ रहा है। पंचांग के अनुसार 17 अगस्त को नाग पंचमी और सिंह संक्रांति भी है।

नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट खुलने के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। मंदिर की यह अनोखी परंपरा ही इसे देश के चर्चित धार्मिक स्थलों में शामिल करती है। नाग पंचमी पर यहां दर्शन करने वाले श्रद्धालु भगवान शिव, माता पार्वती और नाग देवता की पूजा कर सुख-समृद्धि और ग्रह संबंधी परेशानियों से राहत की कामना करते हैं।

नाग पंचमी पर क्या करें?

नाग पंचमी के दिन भगवान शिव और नाग देवता की पूजा करने की परंपरा है। श्रद्धालु शिवलिंग पर जल अर्पित कर सकते हैं और शिव मंत्रों का जाप कर सकते हैं। नागचंद्रेश्वर मंदिर में दर्शन का अवसर मिले तो श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना की जाती है।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राहु-केतु से जुड़े दोषों की शांति के लिए भगवान शिव की आराधना, नाग देवता का पूजन और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। लेकिन किसी भी उपाय को कुंडली के विश्लेषण और व्यक्तिगत परिस्थितियों के अनुसार ही देखना बेहतर माना जाता है।

इसलिए नागचंद्रेश्वर मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता सिर्फ यह नहीं है कि यहां दर्शन साल में एक बार होते हैं, बल्कि नाग पंचमी के दिन खुलने वाली यह परंपरा उज्जैन की धार्मिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।

Yogesh Joshi

लेखक के बारे में

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योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


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